नाश्ते में हो मजा, तो बच्चे नहीं करेंगे मना
क्या एक मां के तौर पर आप अपने बच्चे की सेहत के प्रति चिंतित हैं? उसके नाश्ता छ़ोडने और खाने को देख कर नाक च़ढाने की आदत से आपका चैन उ़ड गया है? आप सब कुछ प्रयोग कर चुकी हैं, पर यह नहीं जान पाई की अपने बच्चे को पोषक खुराक कैसे खिलाएं? यदि ऐसा हो तो बच्चों के नाश्ते के बारे में जानकारी आपके बहुत काम आएगी। बच्चों का ठीक से नाश्ता न करना एक आम समस्या बनती जा रही है। हाल ही में कॉलेज ऑफ होम साइंस, निर्मला निकेतन, मुंबई में हुए एक अध्ययन में पता लगा कि देश के ६१ प्रतिशत विद्यार्थी सुबह का नाश्ता नहीं करते। ८ से १२ साल के ४५ प्रतिशत बच्चे और १३ से १५ साल के ५४ प्रतिशत बच्चे सुबह सिर्फ दूध का एक गिलास पीकर स्कूल निकल जाते हैं। निश्चित तौर पर ये चिंताजनक आंक़डे हैं।
लेकिन जहां स्वाद की बात आती है वहां बच्चे और कुछ नहीं देखते, ऐसे कई सबूत है,जो बताते हैं कि विभिन्न स्वादों के लालच से बच्चों का व्यवहार बदला जा सकता है। कुछ स्वादों को बच्चे कुदरती तौर पर पसंद करते हैं जैसे चाकलेट, वनीला, फ्रूट फ्लेवर और शहद। और माताएं बोरिंग से स्वाद वाला खाने को देती हैं, यह कह कर की वह पौष्टिक है, बच्चे उससे मुंर्ह म़ोड लेते हैं।
सुबह की जल्दबाजी और देर से सोकर उठना भी सुबह का नाश्ता छ़ोडने का कारण बनते हैं। ८ साल का वेदांत अपनी मां श्रद्धा से पूछता है कि मुझे बोरिंग ब्रेकफास्ट क्यों देते हो? मुझे ब्रेकफास्ट में पिज्जा बर्गर चाहिए और श्रद्धा यह सुनकर परेशान हो जाती है। श्रद्धा जैसी माताएं यूं ही परेशान नहीं हैं। गहन शोध बताते हैं कि नाश्ता छ़ोडने से मानसिक व शारीरिक प्रदर्शन में गिरावट आती है, तो माताएं अगर चिंता करती हैं, तो उनकी चिंता बेवजह नहीं है। यूनिवसिर्टी ऑफ मिन्नेसोटा में १९९७ में हुए एक अध्ययन में पता लगा कि वे बच्चे जो सुबह नाश्ता करके स्कूल जाते हैं उनकी एकाग्रता एवं संपूर्ण बुद्धि जागृत रहती है, बनिस्बत उन बच्चों के जो सुबह बगैर नाश्ता किए स्कूल चले जाते है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, दिल्ली में असिस्टेंट चीफ डायटीशियन सुश्री शादान रिजवी कहती हैं, स्कूल जाने से पहले सुबह के वक्त भरपूर पौष्टिक नाश्ता बच्चों को दिमागी तौर पर चौकन्ना और शारीरिक रूप से सक्रिय रखता है। यह बच्चे की संपूर्ण क्षमता को बेहतर बनाता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि उन्हें पूरा पोषण मिले। नाश्ता छ़ोडना जो आजकल एक आम बात बनती जा रही है, बिलकुल नहीं होनी चाहिए। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि ब्रेकफास्ट को स्वादिष्ट और दिलचस्प बनाया जाए। यह बहुत सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
क्या खाएं न खाएं इसके लिए बच्चे सिर्फ स्वाद देखते हैं और मां चिंता करती है कि इससे उनकी सेहत पर क्या असर प़डेगा। स्वाद, पोषण और उससे भी अधिक मजा शहद के स्वाद वाले सीरियल में हासिल हो सकता है। ऐसा सीरियल जो कई प्रकार के साबुत अनाजों से मिलकर बना हो। जिसमें विटामिन, खनिज और असली शहद का स्वाद भरा हो, ऐसा उत्पाद ब्रेकफास्ट की समस्या के लिए एक आदर्श समाधान है। वे ब्रेकफास्ट सीरियल्स जो साबुत गेंहू, मकई ज्वार से बने होते हैं, उनमें जटिल कर्बोहाइड्रेट होते हैं, साथ ही उनमें विटामिन, खनिज मिलाए गए हों तो वे मां की चिंता दूर करने में ब़डे मददगार सिद्ध होते हैं। दूसरी ओर ये सीरियल बच्चों के ब्रेकफास्ट को मजेदार व स्वाद से भरा अनुभव बनाने में कारगार होते हैं और साथ में शहद की पौष्टिकता इसे सेहत के पैमान पर भी खरा रखती है। शहद एक ऐसा स्वाद है, जो सदियों से बच्चों को पसंद आता रहा है।
शहद का स्वाद और क्रंची टैक्सचर और लूप जैसा आकार, बच्चों को इस सीरियल की ओर आकर्षित करता है और उनके रवैये में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। इस सीरियल के साथ ब्रेकफास्ट टाइम, फन टाइम में बदल जाएगा। बेस्वाद और नापसंद नाश्ते का बहाना स्वादिष्ट व स्वास्थ्यकर नाश्ते के उत्साह में बदल जाएगा। यह एक ऐसा नाश्ता है कि जिस पर मां और बच्चे दोनों की पसंद की मुहर है और हो भी क्यों न, मां के लिए यह सुविधाजनक है, क्योंकि वह चुटकियों में इसे तैयार कर सकती है और बच्चा भी इसे तुंरत खा लेता है। क्रंची, फन, शहद और मल्टीग्रेन युक्त सीरियल के साथ अब सुबह नाश्ते की मेज पर मांबच्चे में संघर्ष नहीं होगा। अब बच्चे आनंद लेकर अपना नाश्ता खाएंगे और मां संतोष के साथ उन्हें पौष्टिक नाश्ता करा पाएगी। इससे अच्छी बात क्या हो सकती है भला?
