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बीमारी में व्रत खतरनाक

Swatantra Vaartha  Tue, 6 Jul 2010, IST

बीमारी में व्रत खतरनाक

व्रत रखने वाले व्रती दो कारणों से उपवास रखते हैं। प्रथम है धार्मिक भाव एवं द्वितीय है स्वास्थ्य लाभ। उपवास रखने वाला व्यक्ति यदि कुछ बातों का ध्यान रखे तो उसे और अधिक शारीरिक लाभ मिल सकता है, किंतु बीमार व्यक्ति के लिए उपवास खतरनाक सिद्ध हो सकता है।

व्रतउपवास रखने से अनेक लाभ हैं। यह उपवास मौसम परिवर्तन की अवस्था में रखने पर ऋृतु संक्रमण काल की बीमारियां उसके पास नहीं आती। मौसमी बीमारियों का आक्रमण नहीं होता। ये मनुष्य में भूखे रहने एवं भूख सहने की इच्छा शक्ति ब़ढाते हैं।

बीमारी की अवस्था मेंअल्सर, पीलिया, एनीमिया, उल्टीदस्त, बीपी, शुगर और हृदय रोग संबंधी बीमारियों में खाली पेट नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में रोगी की तकलीफ ब़ढ सकती है। कभीकभी जान का खतरा भी बना रहता है। अल्सर में खाली पेट रहने पर एसिडिटी ब़ढ जाती है। अधिक दिनों तक भूखे रहने पर पेट का अल्सर फटने एवं उससे खून निकलने की आशंका रहती है। पीलिया पी़डत को भी उपवास नहीं रखना चाहिए। खाना नहीं खाने से शरीर में खून की कमी होती जाती है। इससे कमजोरी एवं चक्कर आने की शिकायत होती है। एनीमिया रोगी के लिए उपवास नुक्सानदायक है। उन्हें हमेशा कुछ न कुछ खाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर बीमारी ब़ढ जाती है।

उल्टीदस्त की स्थिति में खाली पेट नहीं रहना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इस स्थिति में रोगी यदि उपवास रखता है तो शरीर में और पानी की कमी हो जाएगी।

शुगर के रोगी खाली पेट रहते हैं तो बीमारी और ब़ढ सकती है। गर्भवती स्त्री को उपवास से परहेज करना चाहिए। ऐसे समय में उन्हें अतिरिक्त विटामिन, प्रोटीन और कैल्शियम की आवश्यकता होती है मगर वे उपवास रखती हैं तो बच्चे को पोषक तत्व नहीं मिलेंगे।

उपवास से लाभ दोनों नवरात्रियां ऋृतु संक्रमण काल में आती हैं। इन दिनों उपवास रहने पर वातावरण के सक्रिय कीटाणु शरीर पर आक्रमण नहीं कर पाते हैं। खाने में नियंत्रण कर बीमारी से दूर रहा जा सकता है।

निर्जला उपवास निर्जला उपवास से पेट एवं लिवर संबंधित परेशानी ब़ढ जाती है। आहार नली में सिक़ुडन आ सकती है। बीचबीच में तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए। इससे शरीर में पानी की मात्रा बनी रहती । चौबीस घंटे, में एक बार फलाहार या भोजन करने से शारीरिक क्षमता बनी रहती है।

बच्चे, ब़ूढे उपवास से सावधान१४ से कम उम्र के बच्चे एवं ६० से अधिक आयु के वृद्ध को उपवास नहीं रखना चाहिए। १४ वर्ष तक बच्चों का शारीरिक विकास तेजी से होता है। इस बीच पर्याप्त भोजन एवं पौष्टिक तत्व मिलते रहने से शारीरिक विकास अच्छा होता है। इसी तरह ६० वर्ष की उम्र के बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होने लगती है जिसे खानपान में ध्यान रख नियंत्रित रखा जा सकता है।

उपवास के बाद खानपान का रखें ध्यानउपवास त़ोडने पर सबसे पहले नमक व शक्कर मिला नींबू पानी पीना चाहिए। उपवास त़ोडने पर एक बारगी प़ूडी, मसाले वाली सब्जी अधिक नहीं खानी चाहिए। इसे प्रसाद के तौर पर कुछ मात्रा में लेना चाहिए। व्रत खोलने के बाद नमक वाला सादा खाना जैसे दाल, चावल, सब्जी आहार में शामिल करना चाहिए। नवरात्रि उपरांत एक हफ्ते भर सादा भोजन लेना सेहत के लिए अच्छा रहता है। उपवास की अवस्था में पाचन तंत्र अनियंत्रित हो जाता है जो व्रत सामान्य होने पर एकबारगी अधिक भोजन तेल, घी, मसाला खाने से एसिडिटी, पेट में जलन, दर्द, उल्टी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

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