निरोग और आकर्षक बनाते हैं विभिन्न स्नान
स्नान हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। स्नान द्वारा ही हम अपने शरीर को स्वच्छ रख सकते हैैैं। प्रातः स्नान का अपना महत्व होता है। इससे हम अपनी दिनचर्या स्वच्छतापूर्वक शुरू कर सकते हैं। स्नान हम अपनी त्वचा को साफ सुथरा और सुंदर बनाने के लिए करते हैं। ब़डे शहरों में तो विभिन्न स्नान लेने के लिए लोग ब्यूटी पार्लर जाते हैं। विभिन्न स्नान कई रोगों का इलाज माने जाते हैं और त्वचा को मुलायम बनाने के लिए, युवा दिखनेे के लिए और त्वचा निखारने में भी विभिन्न स्नानों का प्रयोग किया जाता है।
स्नान करने के लिए ध्यान रखें कि न तो अधिक ठंडा पानी होना चाहिए न अधिक गर्म। दोनों की अधिकता त्वचा पर कुप्रभाव डालती है। इसलिए गर्मियों में ताजे पानी से और सर्दियों में गुनगुने पानी से स्नान करना अति उत्तम होता है। खाने के बाद कभी स्नान न करें, क्योंकि उस समय आमाशय को खून की जरूरत होती है। नींद न आने पर थकान और कमजोरी होने पर गुनगुने पानी से स्नान करें। गर्मी से बेचैनी होने पर ठंंडे पानी से नहाने से राहत मिलती है।
स्वास्थ्य और सौंदर्य को बरकरार रखने के लिए केवल पानी से ही स्नान करना काफी नहीं है। इसके अतिरिक्त और भी कई विशेष स्नान हैं, जो स्वास्थ्य और सुंदरता के लिए लाभप्रद हैं। आइए जानें विभिन्न स्नानों के बारे मेंः
भाप स्नानः भाप स्नान शरीर से पसीना निकालकर शरीर के रोमकूपों को खोल देता है। भाप स्नान १५२० मिनट तक लेना चाहिए। इससे शरीर से पसीना निकलेगा। पसीने के साथ विजातीय द्रव्य भी निकल जायेंगे। इससे त्वचा के अवरोध दूर हो जायेंगे। भाप स्नान लेने के एकदम पश्चात ठंडे पानी से नहा लेना चाहिए। गर्मियों में भाप स्नान लेने से पूर्व ठंडा पानी पिएं। सर्दियों में गर्म पानी पिएं ताकि भाप से निकल जानेेे वाले जल की पूर्ति हो सके, नहीं तो पानी की कमी होने से चक्कर आ सकते हैं। सिर पर गीला तौलिया ५६ बार रखें।
भाप स्नान से अनेक चर्म रोग जैसे फ़ोडेफुंसी, एक्जिमा, दाद, आदि दूर होते हैं। दमा तथा जुकाम के लिए भी यह स्नान लाभप्रद होता है। इस स्नान से नींद अच्छी आती है। मधुमेह रोगियों का शरीर शिथिल प़ड जाता है। इस स्नान से त्वचा और शरीर में सक्रियता आ जाती है। ध्यान रखें यह स्नान सप्ताह में एक या अधिक सेे अधिक दो बार लें।
सूर्य स्नान ः सूर्य की धूप यदि कुछ दिन तक हमें न मिले तो हमारा शरीर बीमार प़ड सकता है। हमारी त्वचा एक अंधेरे मेेें रखे हुए पौधे की तरह मुरझा जाएगी। जिन लोगों को पर्याप्त रोशनी धूप और ताजी हवा मिलती है वे लोग खिले खिले रहते हैं। सूर्य की किरणों में विकार दुर्गंध दूर करने की शक्ति होती है। वैसे नग्न होकर सूर्य स्नान करना अधिक हितकर होता है। बहुत कमजोर व्यक्ति को हल्के वस्त्र पहना कर धूप में थ़ोडी देर लिटाना या बैठाना चाहिए। सूर्य स्नान करते समय ध्यान दें कि हवा तेज नहीं चलनी चाहिए।
गर्मियों में धूप स्नान प्रातः काल या सायंकाल जब सूर्य अस्त हो रहा हो, करना चाहिए। सर्दियों में दोपहर के समय सूर्य स्नान लेना चाहिए। सूर्य स्नान के समय सिर और चेहरे को धूप से बचा कर रखना चाहिए। सूर्य स्नान के समय सिर को ठंडा ही रखें और करवट बदलते रहें। शुरू में ५ मिनट तक सूर्य स्नान लें। धीरेेधीरे ब़ढाएं। सिर दर्द होने पर एकदम सूर्य स्नान बंद कर दें। सूर्य स्नान के पश्चात् साधारण ताप वाले पानी से नहाना चाहिए। गर्मियाेें में ठंडे पानी से भी नहा सकते हैं।
दुग्ध स्नानः त्वचा में स्निग्धता व चमक दमक लाने के लिए सबसे उत्तम दुग्ध स्नान होता है। यह स्नान प्राचीन समय से ही प्रचलित है। इन्हें पहले रानियांमहारानियां लेती थीं परंतु अब दुग्ध स्नान ब्यूटी पार्लर में भी उपलब्ध है।
एक कप दूध लेकर पहले चेहरे पर अच्छी तरह लगायें। थ़ोडी देर बाद हल्के हाथों से रग़डें। दूध में रूई को भिगोकर गर्दन, बाजू, कान के पीछे लगाएं और कुहनियों पर लगायें। थ़ोडी देर बाद पुनः इन स्थानों पर दूध लगायें। जब त्वचा खिंचने लगे तो पानी डालते हुए रग़ड कर त्वचा साफ करें। ऐसा करनेे से रक्त संचार ब़ढेगा, त्वचा के छिद्र खुलेेंगे और वायु से जमे मैल के कण बाहर निकलेंगे क्योंकि दूध में एस्ट्रिंजेन्ट होता है, जो मैल को बाहर निकालता है। दूध में विटामिन ए, प्रोटीन और कैल्शियम होने से त्वचा को पोषण मिलता है।
कटि स्नानः कब्ज से छुटकारा पाने के लिए कटि स्नान लाभप्रद माना जाता है। टब में ठंडा पानी इतना डालें कि बैठने पर आपकी नाभि तक जल आ जाए। पैरों को बाहर स्टूल या चौकी पर रखें। पीठ को टब के पिछले भाग से लगाकर रखें। तौलिए को गीला कर नाभि से निचले भाग को थ़ोडे दबाव के साथ रग़डें।
यह स्नान ५ से १५ मिनट तक लिया जा सकता है। शुरू में कम, बाद में धीरे धीरे समय को ब़ढाएं। सर्दी के दिनों में सारे शरीर को हाथों से रग़डकर गर्म कर लेना चाहिए। इससे ठंड कम लगेगी। प्रातः शौच से फ्री होकर ही कटि स्नान करें। इस स्नान से उदर विकार दूर होकर शरीर में ताजगी आती है। दिन में एक बार कटि स्नान लें।
वायु स्नानः त्वचा की सुंदरता और स्वास्थ्य के लिए कभी कभी कम कप़डे पहन कर शीतल वायु का स्पर्श लें। इससे त्वचा को टोनिंग मिलती है और कुछ रोगों से आराम भी मिलता है। १५ से ३० मिनट तक जब तक आप हवा में ठंडक सहन कर सकें, वायु स्नान लें। गर्मी के मौसम में सुबह और रात में और सर्दी में ९१० बजे वायु स्नान ले सकते हैं। वायु स्नान के पश्चात जल स्नान अवश्य लें ताकि त्वचा पर किसी भी प्रकार की प़डी धूल साफ हो सके। वायु स्नान वहां करें जहां शुद्ध वायु हो। विभिन्न स्नानों से पूरा लाभ उठा सकते हैं अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर।
