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जब देनी हो बच्चे को दवा की खुराक

Swatantra Vaartha  Tue, 13 Jul 2010, IST

जब देनी हो बच्चे को दवा की खुराक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बुखार में दवा की खुराक को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले स्पून (चम्मच) को हम टी स्पून मान लेते हैं जो तीन मिलीमीटर से लेकर छह मिलीमीटर के साइज में होते हैं।

अलगअलग घरों में अलगअलग साइज के चम्मच होते हैं। इससे दवा की खुराक में अंतर आ जाता है जिससे ब़डी ग़डब़ड हो जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह होती है कि बच्चों को दवा की खुराक उसकी उम्र और वजन के अनुसार ही दी जानी चाहिए।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बच्चों के लिए हमेशा स्ट्रांग दवाएं सुरक्षित नहीं होती हैं। बच्चों को इस प्रकार की दवाआें को देते समय अधिक सचेत रहने की आवश्यकता होती है। सर्दी, खांसी और बुखार के समय में दवा की सही मात्रा का होना बहुत ही आवश्यक है, खासकर तब जब दवा किसी बच्चे को दी जा रही हो। सही मात्रा में दवा लेना किसी भी दवा के असरकारी होने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।

वास्तव में बुखार बच्चों को होने वाला एक ऐसा रोग है जो अभिभावकों को अनचाही दवाएं देने को बाध्य कर देता है लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि सरल और सुरक्षित दवाएं ही इसमें तुरंत लाभ प्रदान करने वाली होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एन सेड मेडिसिन (नॉन स्टीरोइडल एंटी इंफलेमैटरी ड्रग्स) रोग के लक्षण प्रकट नहीं होने देते और फायदे के बदले नुक्सान पहुंचाने में अधिक सहायक होते हैं।

डॉ दिनकर के अनुसार बुखार बच्चों में पायी जाने वाली सबसे आम बीमारी है और इसको लेकर मातापिता को चिन्तित होने की कोई खास आवश्यकता नहीं है। बुखार शरीर में होने वाले किसी इंफेक्शन के विरूद्ध एक प्रोटेक्टिव रिस्पांस है। अधिकतर रोगियों को बुखार होने की वजह ‘वाइरल इंफेक्शन’ है जो स्वतः ठीक हो जाता है।

बुखार का पता तभी लगता है, जब शरीर की गर्मी सौ डिग्री फारेनहाइट से ऊपर ब़ढ जाती है। यह ध्यान रखने योग्य है कि शरीर का ताप (स्कीन टेम्परेचर) मुंह के ताप (माउथ टेम्परेचर) से ०७५ अंश फारेनहाइट नीचे होता है, जबकि इयर ड्रम टेंपरेचर, ऑरल टेम्परेचर से०७५ अंश फारेनहाइट अधिक होता है।

बच्चों में दवा का इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब पारा १०१ डिग्री तक पहुंच जाए या बुखार के साथ सरदर्द, बदन दर्द भी हो। इन लक्षणों में हो ‘पैरासिटामोल’ की उचित खुराक बच्चों को दी जानी चाहिए। दवा चम्मच से देने की अपेक्षा एक प्लास्टिक मापक से दी जानी चाहिए, क्योंकि दवा की सही मात्रा का आकलन आवश्यक होता है। इस तथ्य को भी जान लेना आवश्यक है कि किसी भी रोगी पर पैरासिटामोल अनचाहे ढंग से प्रभावशाली नहीं होता है और यह बच्चों के लिए हानिकारक भी हो सकता है।

‘एस्पीरिन’ का इस्तेमाल बुखार की दवा के रूप में बच्चों में नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह लीवर एवं मस्तिष्क के लिए हानिकारक होता है, खासतौर से उन बच्चों के लिए जो इंफ्लुएन्जा एवं चिकन पॉक्स जैसे इंफेक्शन से पी़डत होते हैं। पैरासिटामोल लीवर टाक्सीसिटी जैसे प्रभावों को नहीं छ़ोडता है। अन्य एनसेड असाधारण परिस्थितियों में ‘हेप्टाटाक्सीसिटी’ का भी कारण बन सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा की दृष्टि से एवं प्रभावी दवा होने के कारण पैरासिटामोल न सिर्फ बच्चों के लिए ही बल्कि हर वर्ग के लोगों के लिए भी लाभकारी है। इसे घरेलू उपचार के तौर पर चिकित्सक से परामर्श लेकर उपयोग में लाया जा सकता है।

यह भी आवश्यक है कि बुखार से पी़डत बच्चे को हवादार कमरे में रखा जाए तथा उसे अधिक कम्बल या चादर से न ढका जाय। पानी एवं तरल पदार्थों का सेवन पी़डत बच्चे को अधिकाधिक कराते रहा जाय। एंटीबायोटिक देने के बाद भी अगर बुखार एक सौ चार डिग्री तक पहुंच जाए तो रोगी के माथे पर पानी की पट्‌टी बराबर रखते रहना चाहिए। इससे शरीर का तापमान कम होने लगता है।

प्रसिद्ध सेक्सोलिस्ट (यौन वैज्ञानिक) डॉ के राव के अनुसार दवा की सही मात्रा का न होना अन्य उपद्रवों के साथसाथ सेक्सुअल उपद्रव भी पैदा कर सकते हैं। दवा की गलत खुराक से यौन अंगों में भी अनेक प्रकार की विकृतियां आ सकती हैं और बाद में चलकर वह बच्चा नपुंसक या बच्ची बांझ तक बन सकती है। दवा के दुरूपयोग के कारण या उसके कुप्रभावों के कारण भी यौन अंग अविकसित रह सकते हैं। बचपन की नादानी भविष्य की परेशानी बन सकती है।

आज के समय में शीघ्रातिशीघ्र बीमारी के निदान की ललक ने अत्यंत पावर वाली दवाआें के उपयोग में वृद्धि कर दी है। कोई भी एनसेड बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होता। उसके बाहरी प्रभावों के बारे में चिकित्सक से जानकारी अवश्य ही ले लेनी चाहिए। बाह्य प्रभावों में गैसट्राइटिस, किडनी एवं लीवर पर हानिकारक प्रभाव तथा खून की उल्टी शामिल हैं।

इसी प्रकार मेफैनिक एसीड जिसे कभीकभी एनसेड के रूप में लिया जाता है, रोगी पर प्रतिकूल प्रभाव छ़ोडता है। सभी अभिभावकों को यह चाहिए कि वे बच्चे की दवा के प्रकार एवं दवा की खुराक के विषय में आवश्यक सावधानी बरतें।

आनन्द कुमार अनन्त

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