किशोरियों की वक्ष समस्याएं
किशोरावस्था के शुरू होते ही ल़डकियों के शरीर में अनेक बदलाव होने लगते हैं। यह १० से २० साल के बीच की आयु होती है। भारत में कुल आबादी की करीब १२१४ फीसदी किशोर लडकियां हैं, जिनके बिना भारत के सच्चे समाज का निर्माण अधूरा है। उनके शारीरिक बदलाव में स्तनों का विकास भी होने लगता है। यह अवस्था उनको युवा होने का अहसास कराती है। शरीर के हर अंगों की तरह किशोर ल़डकियों के स्तनों में समस्याएं आम बात हो गई है। अक्सर किशोरियां लाजशर्म के चलते अपनी स्तन संबंधी समस्याएं अपनी मां को भी नहीं बता पाती। इससे छोटी सी बीमारी भी ब़डी हो जाती है। मानसिक तनाव उन्हें कुंठाग्रस्त कर देता है। स्तनों में अनेक समस्याए उत्पन्न होती हैं, जिनमें प्रमुख हैं ः
वक्षों का अविकसित होना
अधिकांशत ः वक्षों का विकास १० से १४ साल की आयु में होता है,किंतुु कभीकभी १५ साल की आयु तक भी वक्ष का विकास शुरू नहीं होता या विकास अत्यधिक कम होता है। ऐसा किशोरियों के हार्मोंस के असंतुलन की वजह से होता है। इस तरह की हार्मोंस संंबंधी समस्याआें की जांच करवायी जा सकती है। इस समस्या का निदान प्लास्टिक सर्जरी के जरिए भी किया जाता है।
वक्ष का अधिक विकास
इसमें किशोरियों के वक्ष सामान्य से काफी ब़डे आकार के होते हैं। यह समस्या किशोरी जनित हामो]स का स्तर ब़ढने की वजह से उत्पन्न होती है। इसका निदान उन हामो]स के स्तरों की जांच करके किया जाता है।
निपल्स से रिसाव
यह समस्या तेजी से विकसित हो रहे वक्षों में अधिकतर देखी जाती है। कुछ किशोरियों में मासिक धर्म के वक्त यह समस्या होती है। यदि रिसाव दूध की तरह सफेद हो तो यह सामान्य है पर रिसाव में खून या खून मिले पानी की तरह हो, तब यह किसी तरह की बीमारी का संकेत है। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो, तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर सलाह लेनी चाहिए।
वक्ष की गांठें
किशोरियों के स्तनों का विकास ब्रेस्ट बड्स से शुरू होता है। कुछ समय बाद ये अपने आप खत्म हो जाते हैं, किंतु यदि ये गांठें लंबें समय तक बनी रहें या स्तन में कई गांठें हो जाएं तो किशोरियों को चाहिए कि वे स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। इस तरह की अधिकतर गांठों में दर्द नहीं होता है। इनका इलाज दवा के जरिए या कभीकभी सर्जरी के जरिए भी किया जाता है। किशोर ल़डकियों को चाहिए कि वे स्तनों की समयसमय पर जांच कराएं। इस बीमारी को शुरू में ही पहचान लिया जाए तो इलाज समय पर संभव है। यदि बीमारी के संकेत मिलें तो तत्काल महिला डॉक्टर से मिलें। वक्षों की जांच में खासकर हार्मोंस की जांच होती है। इसमें अल्ट्रासाउंड या एफएनएसी से हार्मोंस का परीक्षण किया जाता है। खासकर मैमोग्राफी से जांच की जरूरत किशोरियो में नहीं प़डती।
रंजीत कुमार ‘सौरभ’
