जिंदगी भर का साथ दे सकता है प्रत्यारोपित हिप
मुंबई के दादर निवासी भाग्यवती जैन उन खुशनसीब मरीजों में से है जिन्हें ७० वर्ष की उम्र में कूल्हे की हड्डी टूटने के बावजूद भी न तो मरने का भय सताया और न ही रोजमर्रा के सभी काम करने लायक बनने के लिए बहुत सारे पैसे ही खर्च करने प़डे। वास्तव में यह सब कमाल है बाई पोलर हिप का, जो मरीजों को ऑपरेशन के ४८ घंटे में ख़डा कर देता है और २३ हफ्ते में लगभग ठीक कर देता है। बाई पोलर हिप वास्तव में एक प्रकार का कृत्रिम कूल्हा है जो कि २ घुरीयों पर काम करता है और कृत्रिम बाल और कटोरी में बहुत अच्छा सामंजस्य बनाकर रखता है।
इसी प्रकार जब कुछ समय पूर्व डुहा नामक १६ वर्षीय ओमानी ल़डकी भारत आई तो उसकी आंखों में एक सपना था, सभी ल़डकियों की तरह प्राकृतिक चाल चलना जो कि अब तक संभव नहीं हो पाया था। दरअसल, उस ल़डकी का एक कूल्हा विकृत हाेेने की वजह से उसकी टांग २ इंच छोटी हो गई थी और वह लंग़डाकर चलती थी। उसको हिन्दुस्तान और इंग्लैंड सहित कई देशों के विशेषज्ञ देखकर अपनीअपनी राय दे चुके थे लेकिन उसने मुंबई स्थित एक अस्पताल में मुझे संपर्क करना उचित समझा।
मैंने जांच में यह पाया कि उसके कूल्हे की कटोरी लगभग नहीं के बराबर थी। जिसकी वजह से कूल्हे की गोलाई विकृत हो गई थी और वह बारबार दर्द और लंग़डाहट दे रही थी। इस समस्या का निदान सिर्फ टोटल रिप्लेसमेंट यानी पूर्ण कूल्हा प्रत्यारोपण ही था। लेकिन क्या नकली कूल्हा जवान ल़डकी का जिंदगी भर साथ देगा? यह एक चुनौतीपूर्ण प्रश्न था और इसका जवाब था मेटल ऑन मेटल अनसीमेंटेड हिप।
इसे लगाने के दूसरे दिन से ख़डे हो सकते हैं और तीसरे दिन से पूरा वजन देकर चल सकते हैं। ३ हफ्ते बाद पालथी मारकर बैठ सकते हैं और फर्श पर भी बैठ सकते हैं। अन्य प्रत्यारोपणों के मुकाबले इसकी कीमत एक तिहाई होती है। अस्पताल में रुकने का समय लगभग आधा और सम्पूर्ण ऑपरेशन का खर्चा भी काफी कम आता है। बाई पोलर हिप का इस्तेमाल वृद्धावस्था में कूल्हे का फ्रैक्चर, कूल्हे में खून के संचार का कम हो जाने में, कूल्हे की असफल नेंलिग या प्लेटिंग और पुराने क्षतिग्रस्त कूल्हे को बदलने में किया जाता है।
हिप में भार वहन करने की क्षमता
वास्तव में कार्टिलेज, लिगामेंट्रस और मांसपेशियों से घिरा होने के कारण हिप में भार वहन करने की क्षमता शरीर के अन्य सभी ज़ोडों से अधिक होती है। कार्टिलेज अत्यंत लचीला होता है जिसके कारण चलनेफिरने में किसी तरह का दर्द नहीं होता है।
सामान्य हिप तथा समस्याग्रस्त हिप में क्या अंतर होता है, तो जब तक हिप क्षतिग्रस्त नहीं होती यानी स्वस्थ रहती है तब तक हड्डियों के अंतिम छोरों का लचीला कार्टिलेज ढका हुआ रहता है। इसके विपरीत समस्याग्रस्त हो जाने के पश्चात हिप में से कार्टिलेज का कुशन हट जाता है जिसके कारण हड्डी धीरेधीरे खुरदरी हो जाती है तथा जगहजगह छिद्र हो जाते हैं। इस अवस्था में चलनेफिरने या टहलने पर सॉकिट में बाल घिसने लगता है। इसीलिए जक़डन व दर्द महसूस होता है, जबकि हिप की स्वस्थ अवस्था में बाल आसानी से घूमती है इसके कारण घिसाव नहीं होता तथा दर्द व जक़डन का आभास नहीं होता है।
अब हिप का प्रत्यारोपण आसानी से किया जा सकता है। इसकेे लिए विदेश द़ौडने की आवश्यकता नहीं रही। अब भारत में ही यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा सकते हैैं, जाेे विदेशों के मुकाबले काफी सस्ते भी प़डते हैं।
नए हिप की कई खूबियां
यह समय के साथ घिसता नहीं है। लगभग जिंदगी भर का साथ देता है। इसे लगाकर आप द़ौड भी सकते हैं और खेलकूद में भी हिस्सा ले सकते हैं। जमीन पर बैठने अथवा पालथी माकर बैठने में भी कोई परहेज नहीं करना प़डता।
समय के साथ शरीर का एक अभिन्न हिस्सा हो जाता है। उन मरीजों को इस तकनीक की ज्यादा आवश्यकता हैः जिनका कूल्हा जन्मजात विकृत हो, कोनजेनिटल हिप डिस्प्लेसिया, जिनका कूल्हा चोट के बाद विकृत हो गया हो, पोस्टट्रोमेटिक हिप डिस्प्लेसिया, जुवेनाईल रूमेटायड आर्थराईटिस से क्षतिग्रस्त कूल्हा, एकायलोसिंग स्पोंडिलाईटिस से जाम कूल्हा परथीज डिसीस से क्षतिग्रस्त कूल्हे, तम्बाकू, शराब एवंंं स्टीरायड के लंबे सेवन से क्षतिग्रस्त कूल्हे को बदलने में भी यह सबसे उपयुक्त है।
ऑपरेशन और विकल्प?
जब दर्द के कारण आप अपना रोजमर्रा का कार्य न कर पाएं, रात में सोने में व्यवधान हो, पैर की लंबाई कम हो जाए, कूल्हा आम हो जाये या उसका मूवमेेंट काफी कम हो जाए, लार्ज हेड मेटल आन मेटल अनसीमेंटेड हिप सबसे सफल और दीर्घकालीन ऑपरेशन होता है। जबकि बाईपोलर हिप सस्ता, अच्छा और सीमेंटेड हिप है।
डॉ बीएस राजपूत
