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डायबिटीज के मरीज हार्ट अटक से कसे बचें ?

swatantravaartha  Tue, 12 Jan 2010, IST

डायबिटीज के मरीज हार्ट अटक से कसे बचें ?

यह तो आप सुनते सुनते थक गये होंगे कि डायबिटीज के मरीज में हाट अटक की सभावना यादा होती है आर अगर डायबिटीज के मरीज ने कही गलती से सिगरेट, बीडी, तबाकू या जदायु पान मसाले से बेपनाह मोहबत कर ली, तो यकीन मानिये कि यमलोक का ठीक उसके सामने खुल गया ह, अगर आप डायबिटीज से गत ह आर आप चाहते है कि आपकी जिदगी व आपके परिवार वालों के सपने सुरक्षित रहें तो आप अपनी रोजमरा की जिंदगी में कुछ सावधानिया बरतें।

डायबिटीज में हाट की सुरक्षा आवयक यों ?

यह शायद लोग नहीं जानते होंगे कि डायबिटीज के मरीजों की खून की नलियों की दीवारों में निरतर चर्बी व कशियम जमा होने की किया चलती रहती ह जिसका परिणाम यह होता ह खून की नलिया सिकुड जाती ह आर उनमें पूरी तरह से कावट आ सकती ह जिससे र सलाइ में बाधा उपथित हो जाती ह। अगर शरीर के अगों को शु खून व आसीजन का भोजन पया माा में ही नहीं मिलेगा तो अग या खाक काम करेगा वह धीरेधीरे कुहला जायेगा। अगर हमारे शरीर का सबसे महवपूण अग दिल, जो शरीर के सारे अगाे को शु खून पहचाता ह, वय ही र के अभाव में कमजोर पड जाय तो आप समझ सकते ह कि दिल तो डूबेगा ही, साथ ही साथ शरीर के अय महवपूण अगों जसे मतिक व लीवर को भी ले डूबेगा। यह दिल की कमजोरी आती कहा से ह ? बडी साफ सी बात ह अगर धडकने के लिये दिल की दीवारों को पया खून न मिलें तो धडकन कमजोर पड जायेगी आर हाट अटक की घटना घटेगी।

निय टहलना आवयक

दिल को वथ रखने के लिये येक डायबिटीज के मरीज को चाहिये कि वह रोजाना कम से कम दो घटे टहलें। डेढ घटे सुबह ात कालीन सर करें व आधा घटा शाम को। अगर आप दो घटे से यादा घूमेगे तो आपके दिल व शरीर के अय अगों को आर फायदा मिलेगा । हमेशा चलने का बहाना ढूढते रहिये, जसे सजी व अय रोजमरा के सामान की खरीदारी के लिये बाजार जाने के लिये उत रहिये। रोजाना मदिर व अय धामिक थल पदल चल कर जाने की कोशिश करे। एक घटे से यादा लगातार बठे मत रहें। आफिस में कायरत डायबिटीज के कमचारी, बहमजिलीय इमारतों में ऊपर जाने के लिये लिट की बजाय सीढी या जीने का इतेमाल करें। इससे एक तरफ बिजली की बचत होगी तो दूसरी तरफ आपकी दिल की कोरोनरी आटरी की सेहत अछी रहेगी। याद रखें आलसी व आराम तलब डायबिटीज का मरीज अपनी खुद की कब वय खोदता है।

धूमपान दोहरा जहर

याद रखें अगर डायबिटीज का मरीज इस धरती मा से जदी विदा लेना चाहता ह तो तबाकू व तबाकू से बने पदाथा] जसे सिगरेट, बीडी ‘हा, जदायु पान मसाला, खनी, चनी, व जाफरानी पाी का हर हाल में सेवन करता रहे। धूमपान दोहरा जहर हयोंकि कोरोनरी र नली की दीवारों में निरतर चर्बी जमा होने से कुछ तिशत कावट हो जाती ह आर अगर ऊपर धूमपान भी जारी ह तो र नलियों में सिकुडन भी आ जाती ह। यानी दोहरी मार पडती ह। कहने का मतलब यह ह कि पहले से डायबिटीज की वजह से र नली में पचास तिशत की कावट अब धूमपान के कारण सा पतिशत यानी पूण कावट बन जाती ह। दूसरे शदों में अगर कहें कि ‘करेला आर उस पर नीम चढा।’

शराब को आदत न बनायें

डायबिटीज के मरीज को शराब पूरी तरह छोड देनी चाहियेे। मगर देखा यह गया ह कि लोग इस पर पूरी तरह से अमल नहीं कर पाते ह। शायद धीरेधीरे हमारे समाज की सोच शराब को लेकर बदलती जा रही ह आर न चाहते हुए भी, शराब हमारे जीवन व दिनचया का एक हिसा बनती जा रही ह। कुछ लोग ऐसा मानने लगे ह कि शराब दिल के लिये बडी फायदेमद ह, योकि दिल की नलियों को वथ रखने में इसका बहत बडा रोल ह। लेकिन लोग यह नहीं जानते कि शराब दिल की मासपेशियों को थायी प से निहायत कमजोर कर देती ह जिसे मेडिकल भाषा में काडियोमायोपथी की अवथा कहते ह। अगर मासपेशिया जो दिल की धडकन के लिये जिमेदार ह, थायी प से अपने नियमित सिकुडने व फलने की ताकत खो चुकी ह तो उहें आसीजन यु शु खून देकर भी हम उहें पुरानी चेतन अवथा में वापस नहीं ला सकते। आप खुद ही यह बात समझ गये होंगे कि शराबी की अगर दिल के खून की नली यानी कोरोनरी आटरी वथ भी रहे तो भी कोइ फायदा नहीं होने जा रहा ह। इसलिए शराब को लेकर, तक शा का पिटारा खोलना कोइ यादा बुमािनी की बात नहीं ह।

म डायबिटीज के मरीज को यही सलाह देना चाहगा कि महीने में सिफ एक या दो बार साठ मिली लीटर से यादा विकी न लें, एक बात आर यान रखें कि पग (विकी) लेते व, तेल में भुने हये खा पार्थो को जसे दालमोट, मेवे, चिस, समोसे, पनीर व चिकन टेि बिकुल न लें। इनकी जगह सिफ खीरा, टमाटर, याज व मूली का ही सेवन करें। विकी को इस तरह लेने के बाद, खाना (डिनर) बिकुल हका लें आर उसमें गरि व चिकनाइ वाले भोय पदाथ न हों। मिठाइ व आइसकीम सें कोसों दूर रहें।

कोलेटाल पर नजर रखें

डायबिटीज के मरीज को चाहिये कि वह कोलेेटाल को नियति करने वाली दवा का सेवन नियमित प से करें। इसके लिये जरी नहीं कि खून में कोलेटाल की माा बहत यादा हो। अगर खून में कोलेटाल की माा यादा ह तो कोलेटाल को नियति करने के लिये केवल दवा से ही काम नहीं चलता, बकि इसके साथसाथ यायाम व सही खा पदाथा] के चुनाव का अहम रोल ह। कहने का मतलब यह ह कि अकेले दवा के भरोसे खून में कोलेटाल की माा को नियति करने का यास न करें। अगर टहलने की आदत नहीं बन पायी ह आर जुबान के वाद पर रोक नहीं लग पायी ह तो कोलेटाल को दवा के भरोसे नियति करने का याल छोड दीजिये।

अपने वजन को बढने न दें

अपने वजन को अपनी लबाइ के मुताबिक ही सतुलित रखने का यास करें। यादा वजन दिल व परों दोनों केे लिये खतरनाक ह। यादा वजन वाले लोगों में दिल को नामल से अधिक खून व पानी का लोड उठाना पडता ह जिससे दिल पर तनाव पडता ह आर शिथिलता जदी पकडती ह। आखिर कोइ पप पानी का एटा लोड कब तक उठायेगा। दिल के अलावा, अतिरि वजन टागों को ले डूबता ह। शरीर का सारा लोड, घुटनों के जरिये जमीन पर जाता ह, अगर लबे समय तक वजन पर नियण नहीं रखा गया तो यकीन मानिये आपके घुटने देर सबेर जर जबाब दे जायेगे। वजन कम करने का सबसे अछा तरीका यह ह कि यायाम के साथ साथ अपने भोजन का सही चुनाव करें।

सही दूध का चुनाव कसे करें ?

अपने पूवज लोग सही कहते थे कि जसा भोजन वसी बु՟। आज के युग में अगर कहा जाय जसा भोजन वसा ही वाय, तो अतिशयो न होगी। हमारे समाज में यह धारणा बुरी तरह से या ह कि घी (देशी) आर दूध ही, आदमी के वाय के तभ ह। लोग यह बताने में थकते नहीं, बकि गव महसूस करते ह कि उनके घर में रोज ताजा भस के दूध का सेवन होता ह। गाय का शु दूध शायद निन कोटि का परिचायक । कहने का तापय यह ह कि दूध की गुणवाा में चर्बी का अहम रोल ह, यादा चर्बी तो यादा अछा दूध। आप शायद जानते ह कि भस के दूध में, गाय के दूध की तुलना में तीन गुना यादा चर्बी होती ह, यानी अपने खून में कोलेटाल की फटी लगाने का पूरा इतजाम।

मेरी यह बात आप मान लीजिये की भस का दूध दो तरह से आपको नुकसान पहचाता ह। एक तो खून में कोलेटाल व शरीर में चर्बी बढाता ह, तो दूसरी तरह, आपकी बु कुद करता ह यह तो आप तो वय जानते ह कि भस कुद बु होती ह आर उसका दूध आपकी बु को कुठित ही करेगा, योंकि म पहले ही कह चुका ह कि जसा भोजन वसी बु՟। मेरी बात मानिये भस का दूध हलवाइयों के लिये छोड दीजिये मिठाइया बनाने के लिये। हर डायबिटीज के मरीज को चाहिये कि वह आधा लीटर या हो सके तो चार सा मिलीलीटर डबल टोड दूध तिदिन लें। अगर डेयरी के दूध की अनुपलधता ह तो गाय का दूध कम से कम दो बार मलाइ निकाल कर लें याद रखें दही, लसी रायता सब दूध के ही विभि प ह। इसलिये किसी भी प में लिये गये दूध की माा दिन भर में आधा लीटर से यादा न हों।

भोजन या खायें आर या न खायें ?

यह अहम सवाल, हर डायबिटीज के मरीज के दिमाग में घूमता रहता ह। इस लेख में सही खाने की लिट आर उस पर विवेचना सभव नहीं ह। पर सातिक प से म आपका मागदशन करना चाहता ह। डायबिटीज के मरीज को चाहिये कि वह हर हालत में तेल में भुनी व घी से बने खा पदाथा] के सेवन से बचें। आलू, अरबी आर चावल का परियाग कर दें। मिठाइ व हलवाइ की दुकान से कोसों दूर रहें। पूडी, पराठा (लेन व टफड), समोसे, मठठी, छोले भटूरे, दाल मोठ के सेवन से बचें। फलों में केला, चीकू व अगूर को बिकुल न लें। खीरा, मूली, टमाटर, याज व लहसुन का चुर माा में सेवन करें। रोजाना पोदार हरी सजी (जसे पालक, सरसों नारी (कोलमी), पोइ, चालाइ व सोवा मेथी) भरपूर माा में खायें। फलों के जूस से बचें । पानी खूब भरपूर पियें, रोज सुबह, दात साफ करने के बाद, कम से कम तीन लास पानी पियें। केवल कमजोर हाट वाले लोग पानी की माा दिन भर में डेढ लीटर से यादा न लें।

तनाव से बचें

यथ बातों को कम सुनिये, अछी बातें यादा सोचिये। पडोसी से तिपा बद कर दीजिये। आपकी अपनी जिदगी का ठिकाना नहीं, पर आप अपनी सात पुतों के लिये धन सचित करने का याल रख कर अपनी अज्ञानता का परिचय दे रहें ह। लालच व इया ही दिमागी तनाव की जड ह, इन दो अवगुणों से अगर आप दूर रहेंगें, तो हमेशा तनाव से बचेंगे। तनाव से बचने के आर भी पुता उपाय ह। पाक में जाकर सुबह टहलिये, वहा थोडा समय निकाल कर बठिये। हरे का हिलना, तितलियों का उडना निहारिये, चिडियों का चहचहाना ेम से सुनिये। आप देखेंगेकि आपका मानसिक तनाव अपने आप कम होने लगा ह, इसके साथसाथ इस भम में मत जीये कि आपके बगर परिवार, धधे व इस ससार में कुछ सही नहीं हो पायेगा। यह भम आदमी को यथ चिंता आर सोच में डाले रखता ह। याद रखिये आपके पहले भी ससार चलता आया ह आर आपके बाद भी चलता रहेगा।

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