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अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करें

swatantravaartha  Tue, 12 Jan 2010, IST

अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करें

रोग प्रतिरोधक क्षमता सब में अलगअलग होती है । ऐसा यों होता ह कि कइ लोग कभी बीमार नहीं पडते आर कइ लोगों को जरा सा मासम बदला, पानी में भीग गए, धूप में निकल गए कि फीवर आ दबोचता । या ऐसा उनकी आनुवशिकता के कारण होता ह या वथ जीवनशली, अछे खानपान के न होने के कारण उनका इयून सिटम कमजोर होता है।

इसमें दो राय नहीं कि जींस का हमारे जीवन में अहम रोल ह। अछी बुरी जींस पाना हमारे हाथ में नहीं ह मगर इयून सिटम को मजबूत किया जा सकता ह।

आजकल नइनइ बीमारिया पदा हो रही है। कारण सभी जानते ह आज का विषा वातावरण ] मिलावटी खा पदाथ, बनावटी जीवनशली, कति से दूरी, इलेटानिक गजेटस का यादा से यादा इतेमाल, शारीरिक मेहनत की कमी आदि।

मासम बदलते ही कभी सदीजुकाम, खासी, लू व वायरल फीवर आदि परेशान करने लगते ह, तो कभी चिकन गुनिया, बड लू, वाइन, डेंगू फीवर का खाफ सताने लगता है।

बीमारी से बचने के लिए ापर केयर की जरत होती ह, खासकर बे आर बूढों को आर भी यादा।

आज य को एक साथ कइ फट पर काम करना पडता ह। यात्रेको भी घर बाहर की दोहरी जिदगी से जूझना पडता ह। ऐसे में एक मजबूत शरीर की जरत आर भी यादा महसूस होती ह! यह बहत मुकिल काम नहीं। एक हदी लाइफटाइल, बलेंड डायट आर एसरसाइज आपका काम पूण कर देंगे।

अपने खाने में सुपरफूड शामिल करें

करेला वास सबधी तकलीफों के वि शरीर की रोग तिरोधक बढाता ह तथा इफेशन से भी बचाता ह।

पपीता कज की शिकायत दूर करता ह तथा डाइजेटिव सिटम के लिए बहत मुफीद भी ह।

गाजर वचा, बाल व के लिए अछी होती ह तथा तिरोधक क्षमता भी बढाती ह।

मासमी जुकाम में फायदेमद ह, खुकी मिटाती ह आर शरीर की रोग तिरोधक श आर इयुनिटी बढाती ह।

मेवा अखरोट व बादाम आदि मेवे सेहत के लिए लाभद ह, लेकिन इहें सीमित माा में लिया जाना चाहिए। साथ ही अलसी व तिल पाउडर भी रोग तिरोधक क्षमता को बढाने के लिए उपयोगी माने गएहै ।

शाकाहारी लोग दूध, दही, पनीर, चीज, सोयाबीन जसी वतुआें को अपनी डायट में शामिल करें। मासाहारी हते में आटरनेट डेज में अडा, सफेद मछली तथा चिकन ले सकते है ।

सीरियस सुबह नाते में बाजरा, ओट, सोया, गेह का दलिया ाउट मूग, मोठ, चना आदि में से दो एक चीजें शामिल करें। मीशियम यु पदाथ मीशियम मासपेशियों को लचीला करने वाला तव ह। एटी इफलेेमेटरी होने से यह आथाइटिस के मरीजों के लिए उाम ह। वास से सबधित तकलीफों से लडने में महवपूण भूमिका निभाता ह। मीशियम, बाजरा, वार, मा, गेह, चना, उडद, राजमा, सोयाबीन, साबुत मूग आदि में बहतायत से पाया जाता ह।

इसके अलावा काजू, बादाम, अखरोट जसे डाइ फूट तथा आम, अलूचे जसे फूटस के अलावा मूली, कमल ककडी में भी खूब पाया जाता ह।

एसरसाइज नियमित करें केवल बलेंड डायट से ही बात नहीं बनेगी। उसे पचाने के लिए एटिव रहना जरी ह। एसरसाइज से पाकि तथा सकमण से लडने वाले सेस का लगातार वाह बना रहता ह तथा अनावयक तव टासिन शरीर से निकल जाते ह।

एसरसाइज से हयाि मजबूत होती ह। मसस मजबूत होते ह जिससे बाडी का बलेंस आर पाचर इूव होता ह।

काडियोवकुलर एसरसाइज सर करना, साइकल चलाना, तरना आर कूदना इसके अतगत आते ह। इससे मोटापा छटता ह। २५ परसेंट मेटाबालिक रेट छह से आठ घटे तक के लिए बढा रहता ह। हते में तीन से पाच दिन २० मिनट के लिए ये एसरसाइज की जाए तो इनसे हाट आर सयुलेटरी सिटम इूव किया जा सकता ह।

लाइफटाइल में बदलाव

* एटिव लाइफ जिए। घटों लगातार टीवी लपटाप से ही न चिपके रहे।

* एलीवेटर, एकेलेटर की जगह अगर सीढिया ह, तो उनका उपयोग करें।

* काम के बीच में बेक लें आर हकी फुकी एसरसाइज करें।

* भरपूर अछी नींद लें। जीवन के ति सकारामक काेिण अपनाए। नेगेटिव सोच को करे टाटा, बायबाय।

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