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चालीस के बाद की देखभाल

Swatantra Vaartha  Tue, 31 Aug 2010, IST

चालीस के बाद की देखभाल

चालीस की उम्र पार करने के बाद सेहत संबंधी कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। इस दौरान विशेषकर महिलाआें को खानेपीने से लेकर जीवनशैली के विविध आयामों पर ध्यान देना आवश्यक होता है। इसके लिए यहां कुछ उपयोगी टिप्स दिए जा रहे हैं और आयुर्वेद के खजाने की जानकारियों के साथ क्या करें और क्या नहीं करें के जरिये चुस्तदुरुस्त बने रहने की उपयोगी सलाह भी दी जा रही है जिसे अपनाकर आप लाभान्वित हो सकते हैं:

क्या करें :

* सबसे पहले तो चालीस के होते ही पूरे शरीर की एक बार डॉक्टरी जांच करवा लेनी चाहिए। क्योंकि कई बीमारियां उम्र ब़ढने के साथसाथ शरीर में घर कर लेती हैं। जैसे दिल की बीमारी, रक्तचाप, मधुमेह या फिर स्त्रीरोग, नेत्ररोग, ज़ोडों व कमर, पीठ दर्द आदि।

* खानपान में आदत बदलें और अनुशासित तरीके से संयमित रहने की आदत डालें। यदि आप शराब या किसी अन्य नशीले पदाथा] के आदि है, तो उसके त्याग की कोशिश करें।

* फल, दाल, हरी सब्जियों का इस्तेमाल ध़डल्ले से करें।

* तनाव रहित जिंदगी जीने की कोशिश करें। मानसिक और शारीरिक श्रमरहित जीवनशैली को अपनाएं। इनसे आपको रक्तचाप, मधुमेह, अवसाद और ज़ोडों की समस्या से राहत मिल सकती है।

* दिनचर्या में कुछ नियमित व्यायाम को स्थान दें। सामान्य तौर पर सुबहशाम एक दो किलोमीटर पैदल चलने की आदत बनाएं। संभव हो तो तैराकी करें। साथ ही तनाव को कम रखने की कोशिश करें।

* व्यायाम में प्राणायाम विशेष लाभकारी है, तो धूप सेवन और शरीर की मालिश करने से हृदय रोगों से बचा जा सकता है।

* आयुर्वेद के अनुसार सुबह खाली पेट एक कप उबली हुई लौकी का रस पीने से हृदय की धमनियों और मांसपेशियों में लचीलापन बना रहता है।

* कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए २० पत्तियां तुलसी और पांच काली मिर्च का चूर्ण एक गिलास पानी में उबालें। जब यह मिश्रण आधा रह जाए तब इस पीएं।

* तनाव उत्पन्न होने वाले कारणों की पहचान करें और उन्हें स्वयं दूर करने की कोशिश करें। जैसे अपनी आर्थिक समस्या का निदान खुद करें, या फिर इसके लिए किसी जानकार की मदद लें। अपने खर्च की योजना आर्थिक सीमा को ध्यान में रखकर बनाएं। कर्ज लें तो उसे उतारने की क्षमता का पहले ध्यान रखेें।

* परिवार को समय दें और कभीकभी उनके साथ मनोरंजन और बदलाव के लिए उन्हें बाहर ले जाएं। इस दौरान अपने कामकाज और चिंताआें को घर पर ही छ़ोड दें।

क्या न करें

* तेल, मसालों और वसा कम से कम मात्रा में लेने की कोशिश करें। अर्थात्‌ गरिष्ठ भोजन पाचन में मुश्किलें पैदा कर सकता है या फिर कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इनका ज्यादा प्रयोग न करें।

* चालीस पार करने के बाद मांसाहार और शराब सेवन न ही करें तो बेहतर होगा।

* धूम्रपान और शराब हृदय रोगों का प्रमुख कारण है। ब़ीडी, सिगरेट, तंबाकू न केवल कैंसर के कारण हैं, बल्कि इनसे हृदय रोग भी हो सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक जिंदगी की चाहत के लिए इन चीजों से बचें।

* ब़ढती उम्र में विटामिन्स व एंटीऑक्सीडेंट की गोलियों के सेवन से बचें।

* मौटापा ब़ढने न दें। इसके लिए जहां तक संभव हो चिकनाईयुक्त भोजन से बचें।

* बेवजह तनाव के बोझ को न लादें।

जरूरी जांच :

ब़ढती उम्र में करवायी जाने वाली डॉक्टरी जांच बेहद जरूरी होती हैं, क्योंकि प्ऱौढावस्था के दौरान शरीर कई तरह के परिवर्तनों के दौर से गुजरता है। महिलाआें में जहां इस दौरान रजोनिवृत्ति और इससे ज़ुडे हॉर्मोनल परिवर्तन होते हैं, वहीं पुरुषों में भी कई रासायनिक परिवर्तन होते हैं। डायबीटीज टाइप२ जैसी अनुवांशिक बीमारी इसी दौर में प्रकट होती है। बरसों से धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल व फेफ़डों में जमा सिगरेट के धुएं से निकला कार्बन हृदयाघात, ब्र्रोंकाइटिस व दमा जैसी समस्याआें को जन्म देता है। इसी उम्र में कैल्शियम की कमी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। व्यायाम रहित जीवनशैली से आर्थराइटिस जैसी समस्या भी आ सकती है। साथ ही नेत्र में रोशनी कम होने की भी यही उम्र होती है। खासकर निकट की दृष्टि कमजोर हो जाती और प़ढने के लिए चश्मा लेना जरूरी हो जाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि चालीस वर्ष की उम्र हो जाने पर एक बार सभी जांचें व चिकित्सकीय परीक्षण करवा लें। इन जांचों से जहां एक ओर कोई शारीरिक समस्या जन्म ले रही होगी तो वह पक़ड में आ जाएगी और उसे आगे ब़ढने से रोका जाना संभव होगा। दूसरी ओर जांच की रिपोर्ट भविष्य के आधार का काम करेगी। जरूरी जांचों में लिपिड प्रोफाइल, ब्लड यूरिया, सीरमक्रिएटिनीन, लिवर, फंक्शन जांच, ईसीजी, चेस्ट एक्सरे, एबडोमिनल सोनोग्राफी, टीएमटी (ट्रडमिल टेस्ट), यूरिन और कम्पलीट हीमोग्राम के साथ ही बोनमैरो डेंसिटी, सरवाइकल पेपस्मीयर व मैमोग्राफी आदि हैं।

यदि परिवार में मधुमेह का इतिहास रहा हो तो ४५ वर्ष की उम्र तक दो वषा] में एक बार और फिर प्रत्येक वर्ष रक्त में शुगर की जांच अवश्य करवा लेना चाहिए। इसी प्रकार सेे यदि परिवार का कोई सदस्य पहले कभी स्तन कैंसर से पी़डत हुआ हो तब महिलाआें को साल में एक बार मैमोग्राफी अवश्य करवा लेना चाहिए। वर्ष में एक बार आंखों और कान की जांच भी करवाते रहना चाहिए।

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