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क्या आप भी थकान से चूर रहते हैं ?

Swatantra Vaartha  Tue, 31 Aug 2010, IST

क्या आप भी थकान से चूर रहते हैं ?

क्या रात भर सोने के बाद भी अगले दिन आप मानसिक थकान, बदन में टूटन एवं बिलकुल बेजान सा अनुभव करते हैं? अगर ऐसा है, तो आप सीएफएस अर्थात्‌ क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम नामक बीमारी से पी़डत हो सकते हैं। शहर में रहने वाले अधिकांश व्यक्तियों में आज के समय में सीएफएस पाया जाने लगा है।

सीएफएस की स्थिति में भीषण थकान के साथ ही शरीर टूटने लगता है और अंग बेजान से लगने लगते हैं। रोगी की तबीयत कुछ भी करने की नहीं होती। हरदम बिस्तर प़डे रहने का ही मन करता रहता है। मन बुझाबुझा सा रहने लगता है तथा कुछ भी करने का मन नहीं करता है। रोगी हरदम एकांत में रहना ही पसंद करते हैं तथा किसी से मेलजोल या कोई मनोरंजन भी रोगी को अच्छा नहीं लगता।

सीएफएस के लगभग तीस प्रतिशत रोगियों की परेशानी की मूल वजह थकान ही होती है। मानसिक परेशानी, गलत जीवनशैली जैसे कारणों से भी सीएफएस की बीमारी स्त्री या पुरुष किसी में भी हो सकती है। अगर महिला की उम्र ४० से ऊपर की है, तो मेनोपॉज की वजह से भी यह बीमारी उसे हो सकती है। तीस वर्ष से ऊपर की आयु में लगातार थकान की शिकायत थायरॉयड की ग़डब़डी से भी हो सकती है।

थायरॉयड की ग़डब़डी एनीमिया, डिप्रेशन, पोषण की कमी, फूड एलर्जी, गलत जीवनशैली, स्लीम एप्नीया, तनाव, सेक्सगत कमजोरियां आदि सीएफएस के प्रमुख कारणों में से माने जाते हैं। थायरॉयड की ग़डब़डी अधिकतर महिलाआें में देखने को मिलती है। इसका पता वजन घटते जाने थकान महसूस करने वालों एवं त्वचा में खुश्की आने और बारबार सर्दीजुकाम हाेेने से लगता है।

गर्भवती महिलाआें में थकान का प्रमुख कारण एनीमिया अर्थात्‌ खून की कमी हो सकता है। विटामिन बी६,बी२, बी१२, विटामिन ई, मैग्नेशियम एवं जिंक की कमी से थकान हो सकता है। गेहूं, जौ एवं ओट्‌स में मौजूद ग्लूटन से भी कई लोगों को कोलिएक नामक बीमारी हो जाती है, जिससे थकान भी महसूस होती है। नींद के दौरान सांस टूटने (स्लीप एप्नीया) के कारण भी थकान होती है।

पैंतीस प्रतिशत के लगभग शहरी नौकरी पेशा लोग सीएफएस से पी़डत रहते हैं। तीस से पैंतालिस प्रतिशत लोग उम्र की वजह से सीएफएस के शिकार होते हैं। तेज दर्द एवं थकान से ग्रस्त होते ही चिकित्सक को दिखाना चाहिए। दो सप्ताह के अंदर अगर आराम नहीं होता तो चिकित्सा से स्वयं को दूर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि आगे चलकर यह जानलेवा भी हो सकता है। अधिकतर तीन महीने के उपचार के बाद रोगी पूर्ण स्वस्थ हो जाता है। सीएफएस के रोगी को धैर्य धारण करना चाहिए।

सीएफएस के रोगी को अपने भोजन में ताजे फल, सब्जियों को अधिकाधिक मात्रा में लेते रहना चाहिए। रोगी को प्यास लगने की नौबत नहीं आने देनी चाहिए। इससे पहले कि शरीर खुश्की की गिरफ्त में आए, जूस, पानी, नारियल पानी, छाछ, शिकंजी, दूध आदि को पी लेना चाहिए। एकदो सप्ताह केेे बीच मिनरल्स के साथ मल्टी विटामिन टेबलेट्‌स की खुराक अवश्य ही लेते रहना चाहिए। प्रतिदिन छह से आठ घंटे तक की नींद लेने की आदत नियमपूर्वक डालनी चाहिए।

ठीक से खाना न खाना, समय पर न खाना, समय पर न सोना, दिनरात काम करते रहना आदि की आदतों को त्यागने से ही सीएफएस से छुटकारा मिल सकता है। हेल्थ चेकअप नियमित कराना, थायरॉयड टेस्ट कराना, ब्लडप्रेशर चेक कराते रहना आपके हक में हो सकता है।

शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण नजर आते ही उसे नजर अंदाज न करके शीघ्र चिकित्सक से मिलें। भूख न लगना, वजन निरंतर कम होते जाना, चक्कर आना आदि पर गौर फरमायें और तुरंत चिकित्सक से मिलें। हो सकता है आप डायबीटीज के भी शिकार हो चुके हों। नियमित रूप से कसरत, योगाभ्यास, शारीरिक श्रम करके तथा जीवनशैली में आवश्यक सुधार करके सीएफएस की बीमारी से निजात पायी जा सकती है। यह बीमारी प़ढने वाले छात्रछात्राआें में भी पाठ्‌यक्रम के बोझ के कारण हो सकती है, अतएव उन्हें अपने खानपान एवं दिनचर्या पर आवश्यक ध्यान देते हुए तानवमुक्त रहने का प्रयत्न करते रहना चाहिए।

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