नाक, कान एवं गले से संबंधित रोग और सावधानियां
जब तक नाक, कान एवं गला ठीक प्रकार से कार्य करते हैं,तब तक हमें यह ज्ञात भी नहीं होता कि ये हमारे शरीर के ही अभिन्न अंग हैं । यह तीनों बाहर से अलगअलग और एक दूसरे से दूर दिखाई देते हैं, पर अंदर से आपस में ज़ुडे हुए हैं। इसी वजह से एक जगह की बीमारी आसानी से दूसरी जगह पहुंच जाती हैं। कभीकभी तो ऐसा भी होता है कि बीमारी एक जगह होती है और उसका पता दूसरी जगह चलता है। उदाहरण के लिये जैसे गले, दांत या जुबान की बीमारी का दर्द कान में होता है। नाक, कान और गले (ईएन टी) से संबंधित बीमारियां पूरे शरीर पर खराब असर डालती हैं । जैसे जुकाम होने पर सिर दर्द, प़ढते समय आंखों से आंसू आना, किसी काम को करने में मन न लगना आदि व्याधियां उत्पन्न हो जाती है। इसी प्रकार अगर बच्चे का गला बारबार खराब होता है , खासकर टांसिल, तो यह बच्चे के सामान्य शारीरिक विकास में बाधा तो उत्पन्न करता ही हैं, साथ ही यह दिल की, ज़ोडों और गुर्दों की बीमारी भी पैदा कर सकता हैं । और हां, अगर सुनाई देना बंद हो जाये तो आदमी कितना परेशान हो जायेगा इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं। ईएनटी से संबंधित बीमारियां अपनी प्रारंभिक अवस्था में ऐसी तकलीफ नहीं देती कि हम बिस्तर पर ही प़डे रहें। हम अपना रोजमर्रा का काम तो कर सकते हैं, यह बात अलग है कि बीमारी की वजह से काम पूरी तन्मयता से न कर पायें । यह एक खास कारण है जिस वजह से इन बीमारियों पर लोग ज्यादा ध्यान नहीं देते। जब यही बीमारियां ब़डा रूप धारण कर लेती है तब इलाज करवाने का ध्यान हमारे जेहन में आता हैं ।
ऐसी स्थिति में साधारण चिकित्सक तो क्या विशेषज्ञ को भी इलाज करने में परेशानी का सामना करना प़डता है। कान बहने (कान से पस,मवाद, या पानी आने) की बीमारी खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत ज्यादा है। इस बीमारी के साथ ब़डा दुर्भाग्य यह है कि इसमें दर्द नहीं होता है। इसी कारण मरीज स्वयं या उनके अभिभावक इसके इलाज में लापरवाही करते हैं। कभीकभी यह बीमारी ब़डा रूप धारण कर लेती हैं और मृत्यु का कारण तक बन जाती हैं । अगर इतना नहीं तो यह बीमारी मरीज को बहरा अवश्य बना देती हैं ।
नाक, कान या गले में जो खराबी होती हैं । इसकी जांच विशेष रूप से तैयार औजारों से ही की जा सकती है। साधारण प्रकाश या टार्च से हम पूर्णत ःतो इसे देख नहीं सकते बस महसूस कर सकते हैं ।
ईएनटी की कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनमें इंजेक्शन ,दवाईगोली मरीज को कुछ समय के लिये ही आराम पहुंचा सकते हैं । इसलिये बीमारी को पूर्ण रूप से ठीक करने के लिये ऑपरेशन करवाने की आवश्यकता होती है ।
‘ऑपरेशन’ शब्द ही हमारे जेहन में घबराहट पैदा कर देता हैं जो स्वाभाविक हैं। जब भी किसी मरीज को ऑपरेशन करवाने की सलाह दी जाती हैं तब वह अपनी बीमारी को दवाई या अन्य किसी तरीके से दबाने की कोशिश करता है और इसमें बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है। ऑपरेशन के संबंध में हमारे बीच अनेक भ्रान्तियां है । यह किसी डॉक्टर के द्वारा नहीं बल्कि हमारी अज्ञानता की वजह से फैलती हैं। आज के आधुनिक युग में एक से ब़ढकर एक दवाईयां और औजार उपलब्ध है जिससे ऑपरेशन दर्द रहित हो जाते हैं। हम अगर यह चाहते हैं कि नाक, कान एवं गले से संबंधित बीमारियां हो ही न और अगर हो जायं तो वह अपना विकराल रूप धारण न करने पायें तो निम्न बातों पर विशेष तौर पर ध्यान देने की आवश्यकता है:
१ कान में अगर दर्द, पस या कोई तकलीफ न हो तो सामान्यतः कान को साफ करने की कोई आवश्यकता नहीं।
२ कान में लहसुन, प्याज या पत्तों का रस डालने से फायदा कम नुकसान ज्यादा होता है। अतःऐसी कोई चीज कान में नहीं डालना चाहिये ।
३ कान में गरम तेल डालने से कान के अंदर का नाजुक भाग जल सकता है और कभीकभी पर्दे को भी नुकसान पहुंच सकता है ।
४ कान में अगर कोई चीज चली जाय तो उसे स्वयं निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिये । विशेषज्ञ की सेवायें लेना अति उत्तम होगा ।
५ किसी भी व्यक्ति या बच्चे को कान पर थप्प़ड नहीं मारना चाहिये इससे कान का नाजुक पर्दा फट सकता है और वह बहरा हो सकता है ।
६ माताआें को चाहिये कि वे अपने बच्चे को कभी भी लेटकर दूध न पिलायें। इससे दूध कान में जा सकता हैं और कान बहना या पकना शुरू हो सकता है ।
७ कान में काेेई भी दवा विशेषज्ञ की राय के बिना नहीं डालना चाहिये।
८ कान अगर पकता है या बहता है तो कान हरगिज न धुलवायें इससे जान का खतरा हो सकता है ।
९ कान अगर पकता है तो कान में पानी नहीं जाने दें । रूई लगाकर रखें जिससे कान में मक्खी या गंदगी न जा सके और इलाज हेतु तुरंत विशेषज्ञ की राय लें ।
१० अगर कान पर कभी सीधी चोट लगती है और उसके तुरंत बाद कान में तेज दर्द होता है और सुनाई देना भी कम हो जाता है तो ऐसी स्थिति में कान में तेल या अन्य कोई दवाई डालना नुकसान दायक है। विशेषज्ञ की राय तुरंत लें ।
११ कभी स़डक दुर्घटना में किसी व्यक्ति के सिर पर चोट आती हैं और उसी समय उसके कान में खून बह रहा हो तो कभी भी उसे रोकने की कोशिश न करें, ऐसा करने से जान को खतरा बन सकता है ।
१२ कान बहने और जुकाम हो जाने की स्थिति में नदी, तालाब में नहीं नहाना चाहिये।
१३ अगर तेज जुकाम हो रहा हो और नाक भरी हुई समझ में आ रही हो तो कभी भी नाक जोर से नहीं ंछिनकना चाहिये क्योंकि नाक की बीमारी कान में जा सकती हैं ।
१४ तेज संगीत या फिर हेड फोन के जरिये संगीत सुनना कान के लिये हानिकारक होता हैं ।
१५ज्यादा जोर से चिल्लाने से हमेशा के लिये आवाज खराब हो सकती हैं ।
१६ बारबार जुकाम होने पर भी आवाज खराब हो जाने का खतरा रहता है ।
१७ अगर आपका बच्चा या पति रात को सोते समय जोरजोर से खर्राटे लेते हैं और उस वजह से उनकी सांस रूकती है तो तुरंत विशेषज्ञ की राय लें ।
१८ अगर आपके बच्चे की एक ही नाक से बदबूदार पस, मवाद आ रहा हैं तो यह समझ लीजिये कि नाक में कुछ है । बच्चे को विशेषज्ञ के पास ले जायें ।
१९ पीनस की बीमारी लाइलाज नहीं हैं , पीनस की बीमारी में नाक में क़ीडे प़ड सकते हैं ।
२० नाक बंद हैं, नाक में सांस नहीं आती, खुशबू बदबू में फर्क नहीं कर सकते , विशेषज्ञ की राय ही अति उत्तम होगी ।
२१ ‘‘मेरी तो तासीर ही ठन्डी हैं इसलिये जुकाम ज्यादा होता है ।’’ कह कर अपने मन को न समझायें । इलाज करवाना अति उत्तम होगा ।
