धान की भूसी का तेल
काफी लबे अरसे से भारत में नस को वाद के आधार पर ही पसद किया जाता ह। इस पसद में सेहत को हमेशा दूसरा थान ही मिलता आया ह। आज लोग समझदारी से रह रहे ह आर निरतर अपनी जीवनशली में विवेकतापूण बदलाव कर रहे ह, यह देखते हए कि उपभाेा नक माट बनने को ाेसाहित हों।
आप सोच रहे होंगे की आखिरकार इसमें ऐसा या ह। मलिन एममोट व रिचड टली ारा किया गया एक अययन २००५ में अमेरिकन जनरल आफ लीनिकल यूटीशियन में काशित हआ जिसमें बताया गया की धान के छिलके का तेल यकों में कोलेटाल को कम करता ह। नियति खुराक के साथ धान के तेल में बने खा पदाथा] के सेवन से कुछ कोलेटाल का तर विशि प से कम होता ह। इसके अलावा धान के छिलके का तेल सेवन से हानिकारक एलडीएल कोलेटाल ७ तिशत तक घट जाता ह, जबकि एचडीएल कोलेटाल में कोइ परिवतन नहीं होता।
सर गगाराम हापिटल के आहारविद शशि माथुर कहती ह कि वाय के ति जागक लोगों को सबसे अधिक चिंता यह सताती ह कि आमतार पर नस को सचुरेटिड फट व टास फट यु तेल में तला जाता ह। इस कार की वसा र में कोलेटाल के तर को बढाती ह, जो कि दिल के रोगों का सबसे बडा कारण ह। यदि आप २० से ३० वष के बीच ह, तनाव भरे माहाल में काम कर रहे ह आर अवायकर तेल में बने नस खाने के शाकीन ह, तो आपको चाका होने की जरत ह, योंकि हो सकता ह की इन सबका दश आपका दिल चुपचाप सह रहा हो। तो आपकी ये चिताए दूर हो जाएगीं योंकि धान के तेल में बने नस में सचुरेटिड फटी एसिड अय नस के मुकाबले ४० तिशत तक कम हो जाते ह, जो बात इन नस को आकषक बनाती ह वह यह ह कि ये मोनोसोडियम लूटामेट से मु ह, जो मोटापे का मुख कारण ह।
यह बहत महवपूण ह कि आप माट तरीके से नकिंग करे आर यह काम आपके लिए सभव बनाता ह धान के छिलके का तेल। यह तेल धान के बीज व अदनी भूसी से निकाला जाता ह। सवाल उठता ह कि वह या चीज ह जो धान के छिलके के तेल को बाकी तेलों से यादा वायकर बनाती ह? सबसे पहली व खास बात इसमें एटीआसीडेंट बहतायत में माजूद होते ह, जसेटोकोफोरल, ओरिजानोल आर टोकोटीनोल। दुनिया भर में किए गए गहन शोधों से यह बात साबित हइ ह कि ओरिजानोल अछे कोलेटाल को घटाए बगर हानिकारक कोलेटाल को कम करता ह।
टोकोटीनोल कुदरत में माजूद एक शशािली विटामिन इ जिसके बारे में कहा जाता ह कि यह कसर रोधी भाव डालता ह। इस तेल में फाइटोटोरोस भी होता ह जिसके बारे में विवास ह कि ये कोलेटाल के अवशोषण को कम करता ह।
विव वाय सघ के मुताबित सचुरेटिड फटी एसिड, मोनो अनसचुरेटिड फटी एसिड, पाली अनसचुरेटिड फटी एसिड के बीच का अनुपात ११५१ होना चाहिए। धान के छिलके के तेल को जतून के तेल का भारतीय सकरण कहा जाता ह। जतून के तेल को कम टास फट वाला वायकर तेल कहा जाता ह। इसमें लगभग सभी जरी फटी एसिड आर नानफटी एसिड अवयव होते ह जिनके सेहत पर लाभदायक भाव होते ह।
सेहत के लिए धान के तेल के अय फायदों में शामिल ह शरीर के फी रडिकस से लड कर बढती उम के असर को कम करना। काबिले गार ह कि फी रडिकस वे रसायन ह जो उम बढने के लिए जिमेदार ह। शशािली एटीआसीडेंट की वजह से धान का तेल अय तेलों के मुकाबले कहीं अधिक पी आसीकरण रोधी थिरता दान करता ह। इस वजह से नस के दीघकालीन सेवन के लिए यह तेल एक आदश विकप ह, योंकि इससे बने नस में लबे समय तक पाकिता बनी रहती ह। यानी यदि आप आज एक पकेट खोलते ह, तो दो दिनों के बाद भी उसके वाद एव पाकिता में कोइ कमी नहीं आएगी।
सेहत के लिए लाभदायक हाेेने के साथसाथ धान का तेल अय के मुकाबले कुछ अनूठे फायदे भी देता ह। इससे नक को काफल सी सुगध मिलती ह, जबकि मूगफली के तेल में मटियाला लेवर आता ह। अय तेलों के मुकाबले धान के तेल का मोकिंग पाइट भी यादा होता ह। इसलिए जिन पदाथा] को तलने के लिए यादा ताप चाहिए उनके लिए यह बिलकुल ठीक ह। डीप फाइ करने के बाद भी यह तले हए खा को आदश रगत तथा न चिपकने वाला टसचर देता ह।
भोजन को तलने के लिए धान के तेल का योग कोइ नया नहीं ह। चीन जापान जसेे एशियाइ देशों में इसका इतेमाल सदियों से किया जाता रहा ह। हालाकि सेेहत के लिए लाभदायक इसके वज्ञानिक पहलुआें का खुलासा हाल के वषा] में ही हआ ह। यही कारण ह कि पसी जसे बडे नक निमाता ने बाजार में मशहूर अपने नस की खातिर अपनी वफादारी धान के तेल पर टिका दी ह।
तो अगली बार से आपका मन अगर चिस का मजा लेने को मचले, तो अपनी चिंताआें को दरकिनार कर के उनका भरपूर लुफ उठाइए। बशर्ते की जो चिस आप खा रहे ह उसके पकेट पर यह लिखा हो कि उहें धान के तेल में ही तयार किया गया ह।
यों ह धान का तेल वायकारी
* धान का तेल सेहतमद यकों का कोलेटाल कम करता ह।
* इसमें लगभग सभी आवयक फटी एसिड होते ह आर इसके नानफटी एसिड अवयव का भी सेहत पर लाभकारी असर होता ह।
* इसमें टोकोफेरोल, ओरिजानोल व टोकोटीनोल जसे एटीआसीडेंड कुदरती तार पर चुर माा में माजूद ह। ओरिजानोल अछे कोलेटाल को भावित किए बिना हानिकारक कोलेटाल को घटाता ह। टोक ाेटीनोल में शशािली विटामिन इ होता ह जो कसररोधी भाव डालता ह।
* इसमें फाइफोटेराल भी होता ह, जो कोलेटाल के अवशोषण को कम करता ह।
* धान के तेल मे तयार उपादों का वाद साय होता ह जबकि अय तेलों जसे मूगफली के तेल में उनका खास वाद बसा रहता ह।
