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पाक ने 25 को भारत से वार्ता के दिए संकेत

Swatantra Vaartha  Fri, 12 Feb 2010, IST

पाक ने 25 को भारत से वार्ता के दिए संकेत

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने 25 फरवरी को भारत के साथ सचिव स्तरीय वार्ता के लिए तैयार रहने के संकेत दिए हैं और कहा है कि दोनों पक्षों को आगे ब़ढने की जरूरत है, लेकिन पाकिस्तान ने जोर देकर कहा है कि कश्मीर तथा अन्य लंबित मुद्दों को शामिल करने वाली समग्र वार्ता प्रक्रिया की बहाली सार्थक और फलदायी होनी चाहिए।

वार्ता के लिए भारत द्वारा सुझायी गयी दो तारीखों के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि वार्ता के लिए २५ फरवरी की तारीख कोई बुरी तारीख नहीं है। विदेश सचिव निरुपमा राव ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष सलमान बशीर के समक्ष वार्ता के लिए १८ और २५ फरवरी की तारीखों का प्रस्ताव रखा था। २६/११ के मुंबई आतंकवादी हमलों के मद्देनजर दोनों पक्षों के बीच समग्र वार्ता प्रक्रिया ठप प़ड गयी थी। कुरैशी ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि हमें आगे ब़ढना चाहिए। सामान्य समझ यही कहती है कि वार्ता जल्दसेजल्द होनी चाहिए।’

उन्होंने ‘जीयोन्यूज’ चैनल तथा ‘न्यूजदैनिक’ को अलगअलग साक्षात्कार में बताया, ‘महत्वपूर्ण यह है कि हम बातचीत शुरू करें। निसंदेह, हम महसूस करते हैं कि ये वार्ताएं समग्र वार्ता प्रक्रिया की शुरुआत होनी चाहिए और इसे वहीं से शुरू किया जाना चाहिए, जहां से छ़ोडा था। कुल मिलाकर वे सभी मुद्दे जिन्हें दोनों पक्ष उठाना चाहते हैं, वे समग्र वार्ता में हैं।’

कुरैशी ने कहा, ‘कश्मीर जैसे कई लंबित मुद्दे हमारे एजेंडे में हैं, जिन्हें भारत भी स्वीकार करता है। यहां पानी का मुद्दा भी है, जिस पर बातचीत होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘यदि आप इन मुद्दों पर बात नहीं करते हैं, तो वार्ता लाभदायक नहीं होगी। आप प्रगति चाहते हैं या केवल बातचीत। हम प्रगति चाहते हैं और केवल बात के लिए बात नहीं करना चाहते। हम सार्थक और फलदायी वार्ता चाहते हैं।’ वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या भारत आगामी वार्ता में कश्मीर जैसे मुद्दों को शामिल करेगा। उन्होंने कहा कि यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है कि वार्ता कहां हो रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि पाकिस्तान खुले दिमाग से बातचीत के लिए संपर्क करेगा।

कश्मीर के संबंध में कुरैशी ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत तक ने कश्मीरियों के साथ खामोश कूटनीति शुरू की थी। उन्होंने कहा कि उसके साथ ही जल बंटवारा महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान एक कृषि आधारित देश है, जहां ९० फीसदी जल की जरूरत कृषि के लिए होती है। उन्होंने कहा कि आगामी वार्ता में पाकिस्तान ‘सामरिक संतुलन’ का भी मुद्दा उठाएगा।

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