चंद्रयान ने चांद पर खोजा विशालकाय खड्ड
ह्यूस्टन। भारत के मानवरहित मिशन चंद्रयान१ में गये नासा के उपकरण से प्राप्त आंक़डों के विश्लेषण से पता चला है कि पृथ्वी के इस उपग्रह पर २४०० किलोमीटर लंबा और नौ किलोमीटर गहरा एक विशालकाय और बहुत गहरा खड्ड है।
चंद्रयान१ के साथ नासा का मून मिनरोलाजी मैपर (एम३) चांद पर गया था। चांद पृथ्वी का इकलौता प्राकृतिक उपग्रह है।
नासा उपकरण ने जो आंक़डे दिये हैं, उसके अनुसार चांद के निर्माण के तुरंत बाद एक क्षुद्रग्रह के साथ टक्कर होने के बाद दक्षिणी गोलार्द्ध में इस विशालकाय खड्ड का निर्माण हुआ। इस खड्ड का नाम साउथ पोल एतकेन बेसिन है। ग्रीनबेल्ट स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के प्रमुख अनुसंधानकर्ता नोआ पेट्रो ने कहा, ‘चांद पर यह सबसे ब़डा और गहरा खड्ड है, जिसमें अमेरिका के टेक्सास से लेकर ईस्ट कोस्ट का हिस्सा समा सकता है। टेक्सास में चांद और ग्रहीय विज्ञान की बैठक में पेट्रो ने कल अपने निष्कर्ष रख्खे पेट्रो के अनुसार चांद की सतह पर पप़डी के भीतर टकराने के बाद यह क्षुद्रग्रह धंस गया होगा और इससे निकला पदार्थ चांद और पूरे अंतरिक्ष में बिखर गया होगा।नासा ने कहा, ‘टक्कर के कारण उत्पन्न भारी ताप के कारण इस खड्ड की सतह भी पिघल गयी होगी। अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था ने कहा है कि यह पहली टक्कर थी। अरबों वषा] में क्षुद्रग्रहों की बौछार से चांद की सतह धब्बे वाली हो गयी है। यहां छोटे ब़डे कई खड्ड हैं। ये लावा, मलबा और धूल के आवरण से घिरे हैं।
