विधेयक के मुद्दे पर भाजपा में भी नाराजगी
नई दिल्ली। महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर भाजपा नेतृत्व को आज अपने कई सांसदों की नाराजगी का सामना करना प़डा, जिन्होंने कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण विधेयक को समर्थन देने का फैसला करने से पहले उनसे सलाहमशविरा नहीं किया गया।
भाजपा सूत्रों ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर लोकसभा के सभी भाजपा सांसदों की आज बुलायी गयी बैठक में करीब १८ सांसदों ने अपनी यह शिकायत जाहिर की। यह बैठक विधेयक का समर्थन करने के पार्टी के फैसले पर विरोध के रुख को नियंत्रित करने के लिये बुलायी गयी थी। नेतृत्व के फैसले की आलोचना करने वाले प्रमुख नेताआें में मेनका गांधी, हुकुमदेव नारायण यादव, योगी आदित्यनाथ, शत्रुघ्न सिन्हा और शाहनवाज हुसैन शामिल हैं। इनमें से अधिकतर इस बात पर नाखुश हैं कि उनसे तभी सलाहमशविरा किया गया, जब पार्टी में नाखुशी ब़ढने लगी। कुछ को विधेयक के प्रारूप से समस्याएं हैं, जबकि कुछ अन्य का मानना है कि भाजपा कांग्रेस को महिला सशक्तीकरण का श्रेय लेने दे रही है। मेनका ने कहा कि वह महसूस करती हैं कि प्रस्तावित विधेयक से समाज के कमजोर वर्ग की महत्वाकांक्षी महिला उम्मीदवारों को मौके मिलने की राह में नेताआें की पत्नी और पुत्रियां अवरोध डालेंगी। मेनका ने कहा कि इस तरह के आरक्षण से खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आने वाली महिलाआें का नैसर्गिक नेतृत्व उभरकर आना चाहिये। राजनीतिक दल संरपचों को विधायक या संसद सदस्य बनाने के लिये प्रेरित करने के बजाय इस तरह के नैसर्गिक नेतृत्व को विकसित करें। समाजवादी पार्टी तथा राजद के अपनाये गये रुख की ही तर्ज पर हुकुमदेव यादव ने भी कोटा के भीतर कोटा की बात कही। उन्होंने कहा कि महिला की पहचान उसकी जाति से अधिक होती है और इससे नहीं होती कि वह एक महिला है। इस पर मेनका ने आपत्ति जतायी।
