साहित्य

चारमहल५

चारमहल५ आइये अब आपका परिचय एक ऐसे परिवार से कराएं जिसकी चार पुश्तों ने पुलिस में नौकरी करते हुए धर्म परायणता, सच्चरित्रता तथा ईमानदारी को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया, कीर्ति तथा नाम कमाया वह नाम जो आज भी आदर से लिये जाते हैं।

जाने दो साऽऽब !

जाने दो साऽऽब ! ‘पांव दिये तीरथ जाने कू हाथ दिये कर दान।

अंगार से भरा मंज़र लहूलहू

अंगार से भरा मंज़र लहूलहू ‘मंजर लहूलहू’ स्वाधीन का नवीनतम ग़ज़ल संग्रह है। इसके पहले उनके ‘कालजयी’ ‘समुद्र में नदियां’ एवं ‘भूख धान और चि़डया’ काव्य संग्रह भी नुमायां हो चुके हैं। स्वाधीन जमीनी संघर्ष और जनवादी आंदोलनों से भी ज़ुडे हैं।

समकालीन कविता : सरोकार और हस्ताक्षर

समकालीन कविता : सरोकार और हस्ताक्षर आधुनिक हिंदी कविता के इतिहास में १९७० के बाद की कविता को समकालीन कविता के नाम से जाना जाता है। आरंभ में यह एक विशेष काव्यान्दोलन का सूचक नाम था, जिसमें ‘बिकमिंग’ या अपने काल विशेष में होने वाली ...

काव्यकुंज

काव्यकुंज एतिरंगा हम अपने वतन का क्या हाल सुनाए ए तिरंगा यहां तो अपनो में ही