लायक अली का पलायन
मीर लायक अली हैदराबाद राज्य (निजाम शासित) का अंतिम प्रधानमंत्री था। वह एक सफल व्यवसायी था न कि एक राजनीतिज्ञ। कासिम रजवी के निकट होने के कारण उसे राज्य का प्रधानमंत्री बनाया गया। १७ सितंबर, १९४८ के सफल पुलिस एक्शन अभियान के बाद हैदराबाद राज्य पर निजामशाही समाप्त हुई और यह राज्य भारत संघ का एक हिस्सा बन गया।
पुलिस एक्शन के पश्चात राज्य पर सैनिक शासन लागू हो गया तथा जनरल जयन्तोनाथ चौधरी को यहां का सैनिक गवर्नर नियुक्त किया गया। जनरल चौधरी ने साधारणतः राज्य में तथा विशेष रूप से नगरद्वय में शांति कायम रखने का कार्य आरंभ किया। सबसे पहले जनरल चौधरी ने कासिम रजवी तथा मीर लायक अली को गिरफ्तार किया इसी के साथ अन्य मंत्रियों तथा रजाकार नेताआें को भी बंदी बनाया गया। कासिम रजवी पर मुकदमा चलाने हेतु चंचलग़ुडा जेल भेज दिया गया,जबकि प्रधानमंत्री लायक अली को उनके निवास स्थान बेगमपेट में नजरबंद रखा गया। उनके साथ उनके परिवार के सदस्य भी थे उनकी पत्नी तथा पुत्रियां। उधर कासिम रजवी को राज्य के हितों के विरुद्ध कार्य करने, मुसलमानो तथा निजाम को गुमराह करने के जुर्म में सात वर्ष की सजा दी गयी। लायक अली की नजरबंदी का सिलसिला भारत के गणतंत्र घोषित होने के बाद भी चलता रहा। लायक अली तथा दूसरे गिरफ्तार किये गये मंत्रियों को यह आशा थी कि जनवरी १९५० के उपरान्त उनकी रिहाई हो जाएगी, किंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। लायक अली के निवास के बाहर सैनिको का क़डा पहरा रहता था तथा घर के अंदर महिला पुलिस का । लायक अली से जो लोग मिलने आते उनका नाम एक रजिस्टर में दर्ज किया जाता तथा उसके बाद भेंट करने की अनुमति दी जाती। मुलाकतियों के आनेजाने संपर्क का कार्य लायक अली की ज्येष्ठ कन्या, आलिया किया करती थी। ज्योंज्यों दिन बीतते जा रहे थे, आने वाले लोगों पर पाबंदियां घटती जा रही थीं।
२६ जनवरी १९५० को जब इन तमाम राजनैतिक बंदियों की रिहाई न हो पायी, तो लायक अली के एक मित्र अब्दुल कवी ने एक योजना तैयार की । वह एक सफल एडवोकेट था और चालाक भी । उसने हैदराबाद तथा पाकिस्तान के बीच एक योजनाबद्ध तरीके पर कई यात्राएं की। पहले उसने यह जानकारी प्राप्त की कि भारत से बाहर जाने के लिए कौनकौन से दस्तावेज की आवश्यकता प़डती है और यह भी कि हवाई अड्डे पर उनकी जांच प़डताल कैसे की जाती है। एक प्रकार से पासपोर्ट, वीजा और दूसरे आवश्यक कागजात तैयार कर लिये गये। यह कार्य फरवरी १९५० के अंत तक पूरा हो गया।
एक दिन लायक अली के बेगम ने ऊंचे स्वर में कहा, ‘साहब आपका मिजाज दुरूस्त नहीं है। आपको दवा और आराम की जरूरत है। उसी दिन से लायक अली ने बिस्तर पक़ड लिया और एक रोगी का अभिनय करने लगा। लायक अली की पत्नी प्रतिदिन घर से यह कहकर जाती कि वह डॉक्टर के पास लायक अली की कैफियत बोलने जा रही है तथा वापसी में कई दवाइयां लेकर लौटती। बेगम का इस प्रकार आनाजाना यह सिद्ध कर चुका कि लायक अली वास्तव में बीमार है और इस बात की भनक बाहर गेट पर, वरान्डे में पहरा दे रहे पहरेदारों को लग गई। इसी बात का पता महिला पुलिस को भी चल गया, जो लायक अली के कमरे की ख़िडकी के समीप पहरा देती थी। बेगम लायक अली जिस मोटर से दवा लाने जाया करती थी, उसकी ख़िडकियों पर भारी पर्दे लगे होते थे। यह उस जमाने का चलन था विशेष रूप से मुसलमान परिवारों में (ऐसा ही पर्दा साइकिल रिक्शा, हाथ का रिक्शा, शकराम एवं बंडियों पर भी लगाया जाता था, ताकि उसमें यात्रा करने वाली महिलाएं न दिख पाएं)।
बेगम लायक अली की पर्दा लगी मोटर का भी पहरेदारों ने निरीक्षण नहीं किया और न ही पर्दा हटाकर मोटर के अंदर झांका। लायक अली की बीमारी की सूचना अब पक्की हो गयी थी और पहरेदार इससे अवगत हो गए थे।
एक दिन यह घोषणा की गई कि लायक अली के एक निकट संबंंधी के घर में विवाह संपन्न हो रहा है। उसी विवाह में जहेज देने के लिए एक लारी बुलायी गयी तथा उसमें बर्तन तथा दूसरी आवश्यक वस्तुएं भरी गयी। सामान रखने के बाद लारी वहां से निकल प़डी। जैसे कि उन दिनों रिवाज था, उसी विवाह के अंतर्गत लम्ब़ाडी औरतों का नृत्य रखा गया। नृत्य की समाप्ति पर घर के अंदर से एक नौकर आया और उन नाचने वाली औरतों को ‘साहब’ की ओर से इनाम दिया। नाच गाने का यह क्रम कुछ दिन तक चलता रहा और गार्ड और दूसरे नौकर चाकरों का मनोरंजन भी होता रहा।
३ मार्च के ऐतिहासिक दिन रोज की भांति प्रातः ९३० बजे कार बुलायी गयी और पहरेदारों से कहा गया कि बेगम साहिबा डॉक्टर के पास जा रही हैं। बेगम साहिबा के मोटर में बैठते समय पहरेदार एक आचार तथा चलन के साथ वहां से हट जाया करता था। उस दिन बेगम साहिबा के स्थान पर लायक अली चुपके से पोर्टिको में ख़डी मोटर में बैठ गया, जबकि बुर्का पहने बेगम साहिबा घर के ऊपरी भाग में छुप गई। बिना रोकटोक के मोटर वहां से चल प़डी, क्योंकि यह क्रम कई दिन से चल रहा था। पहरेदारों ने उस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। लायक अली वहां से अपनी बहन शौकत उन्निसां बेगम के घर गया और एक दूसरी मोटर में अपने मित्र अब्दुल कवी के निवास पर और इस प्रकार खाली मोटर शाह मंजिल को लौट आयी। कार के पहुंचने पर एक दासी ने कहा कि बेगम साहिबा दवाइया लेकर लौट आयी हैं। थ़ोडी देर के बाद बेगम अपने कमरे की ख़िडकी के समीप गयी, जहां से पहरेदार उनको देख सकता था।
अब्दुल कवी के घर पर पर्दा लगी एक मोटर ख़डी थी, जिसमें कवी बैठा था। लायक अली उसी मोटर में सवार हो गया। वह शेरवानी तथा रूमी टोपी पहने था। मोटर में बैठने वाला तीसरा व्यक्ति था लायक अली का भांजा फसीहउद्दीन। कार कवी के मकान से गुलबर्गा की ओर चल प़़डी। जब मोटर ने शहर की सीमाओं को छ़ोडा, तो उसके पर्दे हटा दिये गये लायक अली ने एक ठंडी सांस ली और कहा।
दरओदीवार पे हसरत की नजर करते हैं
खुश रहो अहलएवतन हम तो सफर करते हैं
लायक अली ने अंतिम बार अपनी धरती मां के दर्शन किए। सिकंदराबाद से बंबई जाने वाली ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में चार बथा] का आरक्षण कर दिया गया था और इस प्रबंध के साथ कि चारों यात्री ट्रेन में गुलबर्गा से सवार होंगे। उस जमाने में प्रथम श्रेणी के डिब्बे में चारचार बर्थ का एक ‘कूपे’ होता था। उस कूपे का एक दरवाजा भी होता था, जिसे यात्री साधारणतः बंद रखते थे। यद्यपि केवल यात्री तीन थे, किंतु सावधानी बरतने के लिए चारों बथा] का आरक्षण करवा दिया गया था।
हैदरबाद से गुलबर्गा जाने वाली मोटर में केवल तीन यात्री थे । मोटर ने गुलबर्गा में प्रवेश किया तथा हजरत ख्वाजा गेसूदराज बंदे नवाज की दरगाह पर रुकी, जहां तीनों ने उस संत सूफी की समाधि पर फूल अर्पित किये और प्रार्थना की और वहां से मोटर सीधे रेलवे स्टेशन गयी। ट्रेन आधा घंटे के बाद पहुंची तथा इन तीनों यात्रियों को लेकर बम्बई की ओर चल प़डी। प्रातः छः बजे ट्रेन बम्बई के विक्टोरिया टर्मिनेस (महाराजा छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन) पहुंची। तीनों यात्री ट्रेन से उतरकर एक मोटर के जरिए लायक अली के एक मित्र के घर पहुंचे जहां स्नानादि से निवृत होकर नाश्ता किया गया। इसके उपरान्त वह बंबई हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां लायक अली, गुलाम अहमद के नाम पर कराची जाने वाले विमान में सवार हुआ।
लायक अली के इस नाटकीय पलायन के दूसरे दिन उनकी पुत्रियां भी उस काल्पनिक विवाह में शरीक होने के लिए तैयार हो गए। लायक अली की पत्नी फर्जी डॉक्टर के पास से दवाइयां लाती रही और उनको तकियों के हवाले करती रही। उस दिन धुलंडी थी। होली के अवसर पर नाचने वाले समूह शाह मंजिल पर भी आए। जिन्हें बीमार लायक अली की ओर से इनाम भी दिया गया। लायक अली की पुत्रियां नामपल्ली रेलवे स्टेशन पहुंची और बम्बई जाने वाली रेल में सवार हो गई। बम्बई में अब्दुल कवी ने उनका स्वागत किया।
इसके दूसरे दिन बेगम लायक अली ने नोटों के कई बंडल बनाए और उन्हें अपने वफादार नौकरों में वितरित कर दिया। वे अपने निवास से दवा लाने के बहाने अपने भाई के घर पहुंची जहां से वह बेगमपेट हवाई अड्डे के लिए रवाना हुई।
जहां लायक अली ने कराची के लिए उ़डान भरी, वहीं दूसरे दिन दोपहर को उसकी बेगम तथा पुत्रियों ने एसएस साबरमती जहाज से कराची के लिए प्रस्थान किया।
इधर शहर में इस बात का पता किसी को नहीं चला कि लायक अली अपने परिवार के साथ पलायन कर गया है। घर पर लगा पहरा भी इस ड्रामाई चाल से बेखबर था, केवल घर के कुछ विश्वसनीय नौकर ही इस कांड से परिचित थे।
लायक अली के पाकिस्तान पहुंचने का समाचार पाकिस्तान रेडियो ने पहली बार दिया। उसने अपने एक समाचार बुलेटिन में कहा कि हैदराबाद राज्य के भूतपूर्व प्रधानमंत्री एक स्वागत समारोह में देखे गये। उसी स्वागत समारोह में लायक अली का परिचय भारत के हाई कमिश्नर श्रीप्रकाश से करवाया गया। श्रीप्रकाश अचम्भे में प़ड गए। यह व्यक्ति तो हैदराबाद में नजरबंद था, यहां कैसे पहुंचा ? उन्होंने तुरंत सरदार पटेल से संपर्क किया और जानना चाहा कि क्या लायक अली और उसके साथियों को सरकार ने रिहा कर दिया और इसके साथ ही कराची में लायक अली से भेंट करने की बात कही। सरदार पटेल ने कहा कि किसी को भी रिहा नहीं किया गया। सरदार के कान भी ख़डे हुए, वह भी अचरज में प़ड गए। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री वेल्लोडी से संपर्क किया और इस विषय की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के आदेश दिए। वेल्लोडी ने पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल से पूछताछ की तो पता चला कि लायक अली तो रोग ग्रस्त है और घर पर आराम कर रहा है, सो रहा है। यह सुनकर पटेल उत्तेजित हो गए और कहा कि लायक अली नहीं तुम्हारी सरकार आराम कर रही है, सो रही है । पुलिस चीफ जेटली तथा कमिश्नर एसएनरेड्डी तुरंत बेगमपेट लायक अली के घर पहुंचे तो पता चला कि शिकार कब का वहां से उ़ड चुका है सबके होश उ़ड गए यह कैसे हुआ ? जेटली तो इतना क्रोधित हुआ कि उसने अपना सारा क्रोध वहां के पहरेदारों पर निकाला।
लायक अली की बहन, उसके वफादार नौकर अली बिन अहमद बागज्जाल और नौ दूसरे नौकरों को बंदी बनाया गया और उन पर राज्य में लागू कानून के अंतर्गत कार्यवाही की गयी।
संपर्क : ९२४७२५००३७
