‘जिज्ञासा’ का आधुनिक जीवनशैली एवं बीमारियों पर केंद्रित संग्रहणीय विशेषांक
कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र हैदराबाद की प्रतिष्ठित वार्षिक वैज्ञानिक पत्रिका ‘जिज्ञासा’ का ११वां अंक (२००९१०) कुछ विलंब से प्रकाशित हुआ, लेकिन उसका पारंपरिक उच्च स्तर बना हुआ है। संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ लालजी सिंह की भाषाई व वैज्ञानिक अभिकल्पना की उपज इस पत्रिका को नये निदेशक डॉ सीएमोहन राव ने और बेहतर बनाने की कोशिश की है। संपादक आर चंद्रशेखर ने भी इसके कलेवर व प्रस्तुति में कुछ नया करने की कोशिश की है। मुख पृष्ठ की डिजाइन में भी कुछ परिवर्तन किया गया है। आवरण पृष्ठों सहित ९६ पृष्ठों की यह पत्रिका हिंदी में प्रकाशित अपने ढंग की निश्चय ही एक विशिष्ट पत्रिका है।
यह अंक आधुनिक जीवनशैली एवं उससे उत्पन्न होने वाली बीमारियों परकेंद्रित एक विशेषांक है। इसका एक विशेष आकर्षण यह भी है कि इसमें ‘डीएनए फिंगर प्रिंटिंग’ पर प्राय: समग्र सूचनाएं देने वाला एक विस्तृत आलेख शामिल किया गया है, जिसका संकेत मुख पृष्ठ पर ही दे दिया गया है ।
पत्रिका के इस अंक का पहला ही आलेख कम्प्यूटर के अधिक उपयोग से उत्पन्न बीमारियों पर केंद्रित है। कम्प्यूटर आज की जीवनशैली का अभिन्न अंग है। बहुत से लोगों के कामकाज का आधा से अधिक समय कम्प्यूटर पर ही खर्च हो रहा है। कम्प्यूटर का अधिक उपयोग किस तरह स्नायविक व अन्य प्रकार की शारीरिक, मानसिक समस्याएं पैदा कर रहा है, इसकी एकदो दशक पूर्व कल्पना भी नहीं थी। इस आलेख में इन तमाम दुष्प्रभावों तथा उनसे बचने की सावधानियों का विवरण दिया गया है। इसमें कई आलेख संयुक्त रूप से लिखे गये हैं। हो सकता है कुछ लेखों को अनुवाद करके प्रस्तुत किया गया हो, लेकिन प्राय: सभी आलेख उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक है। एक आलेख आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न बीमारियों और मानव मस्तिष्क पर केंद्रित है। विविध पारंपरिक रोगों जैसे मधुमेह (डायबिटीज), तनाव, मोटापा, अनिद्रा पर आधुनिक जीवनशैली के प्रभावों पर प्रकाश डालने वाले कई आलेख हैं। मानव जीवनशैली का वन्यजीवों पर क्या प्रभाव प़ड रहा है, इस पर भी एक उल्लेखनीयआलेख है।
डीएनए फिंगर प्रिंटिंग पर प्रकाशित एक समग्र आलेख भारत में फिंगर प्रिंटिंग टेक्नीक के पुरोधा माने जाने वाले स्वयं डॉ लालजी सिंह का है। साथ में उनका एकसाक्षात्कार भी प्रकाशित है, जो स्वयं पत्रिका के संपादक द्वारा लिया गया है। वर्तमान निदेशक डॉ सीएच मोहन राव का भी संपादक द्वारा ही लिया गया एक साक्षात्कार प्रकाशित है। इस साक्षात्कार में अपने जीवन एवं काया] का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए डॉ मोहन राव युवाआें को वैज्ञानिक अध्ययन विशेषकर प्राणी विज्ञान केेे अध्ययन अनुसंधान की तरफ प्रवृत्त होने की प्रेरणा देते हैं। यह सही भी है, क्योंकि सारे वैज्ञानिक अनुसंधानों का लक्ष्य अंतत: मनुष्य है। सारी वैज्ञानिक शाखाआें का किसी न किसी स्तर पर प्राणी विज्ञान के साथ सुनिश्चित संबंध है। इसलिए वैज्ञानिक अध्ययन में प्राणी विज्ञान उसकी संरचना, कार्यकलाप तथा अंतर्संंबंधों के अध्ययन का विशेष महत्व है।
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पत्रिका, वैज्ञानिकों, छात्रों तथा सामान्यजनों के लिए समान रूप से उपयोगी तथा संग्रहणीय है। वैज्ञानिक विषयों पर वैज्ञानिकों द्वारा ही लिखी गयी प्रामाणिक जानकारी हिंदी में प्रस्तुत यह एक प्रशंसनीय खंडकोष है। इसके लिए संस्थान के निदेशक, वैज्ञानिक वर्ग तथा संपादक व संपादकीय सहयोगी सभी बधाई के पात्र हैं।
