‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’
‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’
फिल्म ‘रॉक ऑन’ और ‘लक बाय चॉंस’ के बाद फरहान को एक अभिनेता के तौर पर गंभीरता से लिया जा रहा हैं। उनका नाम यदि किसी फिल्म से ज़ुडा हैं, तो दर्शकों की फिल्म से उम्मीदें ब़ढ जाती हैं। उन्होंने बतौर निर्देशक और अब अभिनेता के तई एक अलग पहचान बना ली हैं।
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पीहर’ की ऊंची उ़डान
पीहर’ की ऊंची उ़डान
कभीकभी कुछ धारावाहिक दर्शकों में अपनी पक़ड धीरेधीरे करते हैं। उन्हीं धारावाहिकों में से एक है दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक ‘पीहर’ ने अपनी जगह अच्छी बना ली है। इसने देखते ही देखते टीआरपी की ऊंची छलांग लगाई है। प्रतिदिन दोपहर
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ना घर के ना घाट के
ना घर के ना घाट के
अक्सर निर्माता पुत्रों को अभिनेता बनते हुए देखा जाता है, लेकिन एक साथदोदो जिम्मेदारियां यानी अभिनय और निर्देशन एक साथ कम ही देखने को मिलता है। इस फिल्म से अभिनय ही नहीं, वरन् निर्देशन की दुनिया में राहुल अग्रवाल कदम रख रहे हैं।
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राइट या रॉन्ग
राइट या रॉन्ग
आजकल नईनई जो़डयां बनाई जा रही है। यानी दर्शक जिसकी कल्पना नहीं कर सकते उनके साथ निर्माता/निर्देशक जो़डयां बनाकर फिल्म बना रहे हैं। अभी रिलीज हुई फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ में अजय देवगन और कोंकणा सेन की ज़ोडी बनाई गई थी।
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कार्तिक कॉलिंग कार्तिक
कार्तिक कॉलिंग कार्तिक
दो टूक : डर आपके भीतर होता है बाहर नहीं। यदि आप चाहें तो इसे कभी भी काफूर कर सकते हैं। बस इतना सा संदेश देती है निर्देशक से अभिनेता बने फरहान अख्तर, दीपिका पादुकोण और शेफाली छाया की मुख्य भूमिका वाली निर्देशक विवेक लालवानी की फिल्म
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अतिथि तुम कब जाओगे
अतिथि तुम कब जाओगे
एक समय था यानि १९८० का दशक, तब कॉमेडी फिल्में भी चला करती थीं। साथ ही उनका संगीत भी कॉमेडी टच लिए होता था। आजकल की कॉमेडी का टेस्ट कुछ अलग है। फिर भी प्रयासों की प्रशंसा अवश्य ही की जानी चाहिए। अजय और कोंंकणा की इस फिल्म
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तीन पत्ती
तीन पत्ती
दो टूक : जुए में ताश के पत्ते लगाना बेशक आसान हो, लेकिन जिंदगी में उसकी मर्जी के बगैर आप उसके पत्तों के बारे में कुछ नहीं जान सकते। यही नहीं, हो सकता है कि जिंदगी में ताश के पत्तों से ज़ुडी कोई सच्चाई आपको जिंदगी और मौत के एक ऐसे खेल में फंसा दे, जिससे
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अभिनय कोई नहीं सिखा सकता : महेश ठाकुर
अभिनय कोई नहीं सिखा सकता : महेश ठाकुर
गौर से देखा जाए तो वे अंग्रेजी थियेटर की जानी मानी हस्ती है, लेकिन टीवी उनकी लोकप्रियता का आधार है। पहली बार वे तब चर्चा में आए जब जी टीवी के स्पर्श, थ़ोडा है थ़ोडे की जरूरत है और सैलाब जैसी टीवी धारावाहिकों में अपनी लोकप्रियता के आसमान पर थे और
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बदलती छवियों की अभिनेत्री बनना चाहती हूंः जया भट्टाचार्य
बदलती छवियों की अभिनेत्री बनना चाहती हूंः जया भट्टाचार्य
इन दिनों कलर्स के नए धारावाहिक ऐसे करो ना विदा से एक बार फिर चर्चा में आने वाली लखनऊ के मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार की अभिनेत्री जया भट्टाचार्य के लिए अभिनय में आना बेशक संयोगों भरा है, पर उनके अब तक के अभिनय के सफर में मिली सफलता संयोग
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‘तीन पत्ती’
‘तीन पत्ती’
एक जमाना था जब अमिताभ बच्चन की फिल्में रिलीज हुआ करती थी तो धूम मच जाती थी। वहीं आज अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘तीन पत्ती’ रिलीज हो रही है । अमिताभ अब उनके साथ काम करने वालों की तमन्ना पूरी करते दिख रहे हैं। इस फिल्म से शक्ति कपूर की बेटी श्वेता कपूर भी डेब्यू कर रही है।
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