‘क्लिक’
कैमरा आज हर किसी के लिए आवश्यकता के रूप में उभरकर आ रहा हैं। निर्माता/निर्देशकों द्वारा इस पर भी फिल्म को फोकस किया जा रहा हैं। पिछले साल भी कैमरे पर आधारित ‘आ देखें जरा’ आई थी। जो एक तरह से जादुई कैमरे पर आधारित थी। यह फिल्म जादुई कैमरे पर तो नहीं लेकिन एक फोटोग्रॉफर द्वारा खींची गई फोटो और उसके पीछे की सच्चाई पर आधारित हैं। श्रेयस तलप़डे जैसे कलाकार को लेकर किसी भी प्रकार का प्रयोग किया जा सकता हैं। क्योंकि वे जहां कॉमेडी फिल्मों के लिए भी उपयुक्त हैं, तो गॉंवख़ेडे वाली फिल्मों मसलन ‘वेलकम टू सज्जनपूर’ जैसी फिल्मों के लिए भी उनकी उपस्थिति दर्शनीय होती हैं। इन फिल्मों की विशेषताएं यह होती हैं, कि गुमनामी में जा चुकी अभिनेत्रियां भी इन फिल्मों का हिस्सा बन जाती हैं। इसी को लें इसमें स्नेहा उल्लाल जो कभी सलमान की हिरोईन बनकर आई थी उसे ऐश्वर्या की डुप्लिकेट तक कहा गया था। आगे कुछ ना कर सकी। इस फिल्म में वे भूत के किरदार में नजर आ रही है। ऐसा बताया जा रहा हैं कि यह सत्य घटना पर आधारित हैं।
इस फिल्म की कहानी एक फोटोग्रॉफर अवि (श्रेयस तलप़डे) की हैं। जिसे फोटोगॉफी का शौक स्कूल और कॉलेज के जमाने से ही हैैं। वह अपना कैरियर एक फैशन फोटोग्रॉफर के रूप में बनाना चाहता हैं, क्योंकि फोटो खींचना उसका जुनून हैं। फोटोग्रॉफी के कुछ असाईन्मेंट के दौरान उसकी मुलाकात सोनिया (सदा) से होती हैं। दोनों की आपसी रुचियां और स्वभाव के कारण दोनों एकदूसरे के नजदीक आ जाते हैं। सोनिया, अवि से मिलने के पहले कम आत्मविश्वासी, अपने आपमें खोयी हुई डरपोक किस्म की ल़डकी थी। अवि से मिलने के बाद उसमें आत्मविश्वास जागा और उसने अपनी शक्ति और प्यार को पहचाना। दोनों एकदूसरे को चाहने लगे और अच्छे दोस्त बन गए। अवि के खुले विचारों वाला होने के कारण वह सोनिया द्वारा दी जाने वाली राय का सम्मान करता था। सोनिया भी उस पर खूब विश्वास करने लगी और उसे चाहने लगी थी। अवि, जो भी तस्वीरें खींचता था उसके पीछे हमेशा एक कहानी होती थी। वह भी सत्य। लेकिन इस बारे में सिर्फ अवि ही जानता था, कि इसके पीछे क्याक्या राज छिपे हैं, क्योंकि ये राज तस्वीरों के खींचने यानी क्लिक करने के बाद का काला सच जहां भयभित कर देने वाला होता था वहीं इसमें दी जाने वाली धमकियों का समावेश भी था जो उसके अतीत की यादों से ज़ुडी हुई थी। जिसे वह सोनिया से छिपा रहा था और अपने दोस्तों, परिवार व प्यार करने वालों से भी। क्योंकि वह अपनी जिंदगी तबाह व बर्बाद होते नहीं देख सकता था। यह राज उसके लिए कुछ और व दुनिया के लिए कुछ और हैं। क्या हैं वह राज जिसे वह सोनिया को भी नहीं बता सकता? ऐसी कौनसी बात हैं जिसे वह दुनिया के सामने नहीं रख सकता? यदि रखता हैं, तो विश्वास कौन करेगा? उसके द्वारा की गई एकएक क्लिक में राज में राज हैं?
इस फिल्म के बारे में इसके निर्देशक संगीत सिवान जो फिल्म ‘संध्या’ का ६ साल पहले निर्देशन कर चुके हैं। तब उन्हें इस फिल्म के बारे में ख्याल आया था। इसके बाद वे ‘चुरा लिया हैं तुमने, क्या कूल हैं हम, एकद पॉवर ऑफ वन और अपना सपना मनीमनी’ बना चुके हैं। वे इस बारे में कहते हैंइस फिल्म का नाम मुझे जापानी की हॉरर फिल्मों को देखकर याद आया। हालांकि मैं हॉरर फिल्मों का फैन नहीं हू। लेकिन कुछ हॉरर फिल्मों ने मुझे प्रभावित किया हैं। इन फिल्मों को बनाने के लिए अच्छा मूड भी होना चाहिए। वहीं ऐसी फिल्मों को बनाने के लिए लिये वातावरण और स्पेशल इफेक्ट का सहारा बहुत ज्यादा लेना प़डता हैं।
प्रीतिश नन्दी कम्यूनिकेशन और आरएनए प्ले इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता संजय अहलूवालिया, संगीत सिवान, विनय चौकसे और संजय चतुर्वेदी हैं। वहीं निर्देशन संगीत सिवान ने किया हैं। कथापटकथा हरीश नायर व संवाद समीर अरोरा के हैं। शब्बीर अहमद के गीतों में संगीत शमीर टंडन का हैं। इस फिल्म के अन्य कलाकारों में स्नेहा उल्लाल, रेहान मिर्जा और चंकी पांडे प्रमुख हैं।
