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बदलती छवियों की अभिनेत्री बनना चाहती हूंः जया भट्‌टाचार्य

Swatantra Vaartha  Fri, 26 Feb 2010, IST

बदलती छवियों की अभिनेत्री बनना चाहती हूंः जया भट्‌टाचार्य

इन दिनों कलर्स के नए धारावाहिक ऐसे करो ना विदा से एक बार फिर चर्चा में आने वाली लखनऊ के मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार की अभिनेत्री जया भट्‌टाचार्य के लिए अभिनय में आना बेशक संयोगों भरा है, पर उनके अब तक के अभिनय के सफर में मिली सफलता संयोग भरी नहीं है। कलर्स के नए धारावाहिक ऐसे करो विदा में वे एक ऐसे चरित्र में है, जो उनकी पिछली नेगेटिव और पॉजिटिव किस्म की सब भूमिकाआें से अलग है। यही नहीं इन दिनों वे जी के झांसी के रानी में भी दिखायी दे रही हैं।

प्र यह वही धारावाहिक है जिसे दीया टोनी पहले विसर्जन नाम से बना रहे थे?

उ हां, लेकिन बाद में इसका नाम बदल दिया गया।

ा बदल तो आप भी गयीं। पिछले दिनों आपने फिल्म और टीवी दोनों में सकारात्मक भूमिकाएं कीं?

ग तो आप क्या चाहते हैं कि मैं हमेशा लोगों के गुस्से का शिकार होती रहूं। (हंसती हैं) मैंनेे महाभारत में कुंती की भूमिका इसीलिए की थी कि लोग मेरी नेगेटिव छवि से परेशान हो गए थे।

ा आपको नहीं लगा कि टीवी पर लगातार नेगेटिव करने वाली अभिनेत्री को लोग एक ऐतिहासिक पात्र और वह भी पॉजिटिव में इतनी जल्दी स्वीकार नहीं करेंगे?

ग (हंसती हैं) यदि ऐसी बात होती तो ना आप जैसे लोग मुझसे बात कर रहे होते और ना ही मेरी कुंती की भूमिका की इतनी चर्चा होती। अब ऐसे करो ना विदा से तो मेरी छवि पूरी तरह बदल जाएगी।

ा ऐसे करो ना विदा में आपकी भूमिका क्या है?

ग धारावाहिक में मैं रेवा नाम की एक ऐसी महिला की भूमिका में हूं जो अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रही है। वह अपनी बेटी को जिम्मेदार बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है ताकि वह खुश रह सके। पर उसकी एक आदत भी है कि वह हर काम अपनी आंखों के सामने होते देखना चाहती है, पर जब उनकी शादी का समय आता है, तो उसके बिना उसका जीवन बदलने लगता है। दरअसल यह धारावाहिक अमीरी और गरीबी के बीच की रेखा की धारा मानकर बुना गया है। यह सामाजिक असमानता और उनके संघर्ष को दिखाने वाला है।

ा यह धारावाहिक दोपहर में दिखाया जा रहा है आपको लगता है कि इसकी लोकप्रियता पर इसका असर प़डेगा?

ग नहीं। इससे पहले भी दोपहर में कई धारावाहिकों ने लोकप्रियता के मापदंड बदले हैं। यदि कोई कहानी और विचार लोगों को अच्छा लगता है, तो उसका समय नहीं देखा जाता।

ा कुंती के बारे में आप कितना जानती थीं?

ग जितना हो सकता था मैंने इस चरित्र के बारे में प़ढने की कोशिश की। मैं चाहती थी कि मेरे धर्मिक शो जय मां दुर्गा में काली मां की भूमिका निभाने के बाद लोग मेरे इस पौराणिक ऐतिहासिक चरित्र का आधार वैसे ही महसूस करें जैसा वह वास्तविकता में रहा होगा।

ा महाभारत की कुंती का इतिहास तो आपने बता दिया अब अपने कैरियर के इतिहास के बारे में भी बता दें, आपके बारे में लोग कहते हैं कि आप अपनी भूमिकाएं बीच में ही छ़ोड देती हैं?

ग ऐसी बात नहीं हैं। मैं किसी छवि का शिकार नहीं होना चाहती थी। पायल की भूमिका ने मुझे यह सिखा दिया था। लोग आज भी मेरे नाम से ज्यादा पायल कहकर मुझसे बात करते हैं। मैं चाहती हूं कि लोग मेरे बारे में भी जाने। ऐसे धारावाहिक मेरे लिए इस मामले में मदद करते हैं?

ा जैसे मुंबई आने में आपकी भप्पी सोनी ने मदद की?

ग हां। मैं उनकी शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे मुंबई में काम करने के लिए प्रस्ताव दिया।

ा लेकिन आपको फिल्मों में ज्यादा प्रस्ताव नहीं मिले?

ग नहीं। मैं ने साथिया जैसी फिल्म में विवेक आबेरॉय की बहन का महत्वपूर्ण चरित्र निभाकर अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत की थी और उसके बाद देवदास में पारो की दोस्त की, लेकिन हमेशा किसी को भी ऐसी भूमिकाएं नहीं मिलतीं, लेकिन बाद मैंने गुदगुदी, लज्जा, क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता, जिज्ञासा जैसी फिल्म भी कीं। कुछ दिन पहले एक और विवाह और हाल ही में फांस जैसी फिल्में की है।

ा कई बार लोग आपकी जीवनशैली को लेकर भी सवाल उठाते हैं कि आप सिगरेट पीती हैं और लीविंग टूगेदर वाले संबंधों की पैरवी करती हैं?

ग मैं जीवन को निराले अंदाज में जीना चाहती हूं। मैंने कई विवाह टूटते हुए देखे हैं। जिसमें औरत को ही सबसे ज्यादा नुकसान होता है।

ा कोई ऐसी भूमिका है, जो आप करना चाहती हैं?

ग हां आय एम सैम में सीन पेन्स वाली। (हंसती हैं)।

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