राइट या रॉन्ग
आजकल नईनई जो़डयां बनाई जा रही है। यानी दर्शक जिसकी कल्पना नहीं कर सकते उनके साथ निर्माता/निर्देशक जो़डयां बनाकर फिल्म बना रहे हैं। अभी रिलीज हुई फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ में अजय देवगन और कोंकणा सेन की ज़ोडी बनाई गई थी। अब सनी देओल और कोंकणा की तो नहीं, लेकिन उनके साथ ईशा कोप्पिकर अवश्य है। वहीं सनी और इरफान खान की ज़ोडी जरूर देखने को मिलेगी। वैसे भी सनी देओल एक लम्बे अर्से के बाद किसी फिल्म में आ रहे हैं। जाहिर है दर्शकों में इन जो़डयों को देखने की उत्सुकता अवश्य ही होगी। सनी का एक पुलिस ऑफिसर के रूप में फिल्मों में रिकॉर्ड बहुत ही शानदार रहा है। सो, इस फिल्म से भी उम्मीद की जानी चाहिए।
इस फिल्म की कहानी दो पुलिस ऑफिसरों पर केन्द्रित है। जिनमें एक अजय श्रीधर (सनी देओल) गोवा पुलिस का एक जाना मानानाम है। उसके सहयोगी उसे खूब चाहते हैं, वहीं मीडिया भी खबरों के लिए उसके आसपास मंडराता रहता है,क्योंकि मीडिया के साथ वह दोस्ताना अंदाज में रहता है। अजय अपनी पत्नी अंषिता (ईषा कोप्पिकर) और बेटे यश (मास्टर अली) साथ हंसीखुशी में अपनी जिंदगी गुजार रहा है । अंषिता एक इंटीरियर डिजाइनर होने के साथसाथ खुले विचारों वाली महिला है। वहीं एसीपी विनय पटनाक (इरफान खान) भी पुलिस ऑफिसर है । अजय और विनय दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त है, लेकिन दोनों के विचारों में भिन्नता है । विनय मीडिया को बिल्कुल भी भाव नहीं देता। अजय आवेग में आने वाला पुलिस ऑफिसर है। क्या सही है, क्या गलत है वह स्वयं तय करता है । अपराधी उसके नाम से डरते हैं। वहीं विनय सोचसमझकर और पूरी तहकीकात करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचने वाला ऑफिसर है। दोनों के स्वभाव विपरीत होने के बावजूद कहानी इन्हीं के आसपास घूमती है। दोनों के बीच तीव्र प्रतिद्वंद्विता है, जो उनके बीच वर्चस्व की ल़डाई आरंभ कर देती है। इस बीच अजय की पत्नी अंषिता की हत्या हो जाती है। शक की सुई अजय की ओर इशारा करती है और उसकी मुसीबत तय ब़ढ जाती है, जब मामले की जांच का जिम्मा विजय को सौंपा जाता है। इधर राधिका पटनायक (कोंकणा सेन शर्मा) पेशे से वकीले है । वह विनय की छोटी बहन है, लेकिन उसका तलाक हो चुका है। मुसीबत में फंसे अजय की मदद करने वाली वह एकमात्र शख्स है, क्योंकि उसे लगता है कि अजय निर्दोष है। वहीं उसका भाई विनय जिस तरह से इस केस की तहकीकात कर रहा है, वह गलत है । राधिका हमेशा वास्तविकताआें को समझती है, उसे लगता है कि वह हमेशा सच का साथ देती आई है और देती रहेगी। राधिका द्वारा विनय का साथ देने के कारण भी अजय और विनय की ल़डाई तेज हो जाती है। इस मामले की छानबीन के दौरान कई तथ्य सामने आते हैं, लेकिन राज नहीं खुल पाता यह खेल दिमाग से खेला जा रहा है। इस ल़डाई में कौन सही है और कौन गलत यानी राइट या रॉग का फैसला होना है। क्या ? विनय अपने द्वारा की जा रही तहकीकात में सही साबित होगा ? अजय को अपनी पत्नी की हत्या के जुर्म में सजा होगी या राधिका द्वारा सही और गलत का निर्णय हो पायेगा ? इस फिल्म की विशेषता यह है कि फिल्म को सुभाष घई प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके निर्देशक नीरज पाठक इससे पूर्व फिल्म ‘परदेस’ की कथा लिख चुके हैं। वहीं ‘अपने’ की कथापटकथा भी वे लिख चुके हैं। अपनी इस फिल्म के बारे में वे बताते हैंयह एक आउट एंड आउट थ्रिलर फिल्म है, लेकिन हर वर्ग को पसंद आएगी, इसमें सनी और इरफान की ज़ोडी को पहली बार प्रस्तुत किया जा रहा है। दोनों पुलिस ऑफिसरों के सकारात्मक विचारों को बखूबी दिखाया गया है।
इस फिल्म के निर्माता नीरज पाठक और कृष्णन चौधरी है। इसका निर्देशन नीरज पाठक ने किया है । गीतकार समीर व संगीत मोंटी शर्मा ने दिया है। इसके अन्य कलाकारों में किरण खेर, दीपल शा, शैली व आर्यन वैद्य, शौर्य चौहान, संजय सिंह, मास्टर हाजी अली, अंजन श्रीवास्तव के अलावा गोविन्द नामदेव प्रम्ुख है।
