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पीहर’ की ऊंची उ़डान

Swatantra Vaartha  Fri, 12 Mar 2010, IST

पीहर’ की ऊंची उ़डान

कभीकभी कुछ धारावाहिक दर्शकों में अपनी पक़ड धीरेधीरे करते हैं। उन्हीं धारावाहिकों में से एक है दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक ‘पीहर’ ने अपनी जगह अच्छी बना ली है। इसने देखते ही देखते टीआरपी की ऊंची छलांग लगाई है। प्रतिदिन दोपहर में प्रसारित होने वाले इस नए धारावाहिक से दर्शक दिल से ज़ुड गए हैं। विशान्त ऑडियो के बैनर तले बने इस धारावाहिक के निर्माता रमेश बोक़डे है। इसका निर्देशन हिमांशु कोंसुल कर रहे हैं।

इस धारावाहिक की कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार की ल़डकी नंदिनी (टीना पारेख) के इर्दगिर्द घूमती है। नंदिनी एक गांव में रहती है। वह प़ढने में बहुत ही होशियार है और इसी तरह अपनी मेहनत व लगन के बल पर वह एमबीबीएस करके डॉक्टर बन जाती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात समीर नामक युवक से होता है। दोनों एकदूसरे को पसंद करने लगते हैं और बाद में शादी कर लेते हेैं। शादी के बाद नंदिनी अपने पति के साथ मॉरिशस चली जाती हैं, लेकिन वहां उसका मन नहीं लगता है। उसे हर पल अपने गांव व घर की याद सताती है। मॉरिशस और उसके गांव की संस्कृति व रहनसहन में भी बहुत ही अंतर है। उसके गांव व उसका पीहर आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है, जिसकी उसे बहुत चिंता है। इसी बात को लेकर नंदिनी को पति से मनमुटाव भी रहता है। उसके पिता का कहना है कि अब उसकी शादी हो चुकी है और ससुराल ही अब उसका घर है। अब उसे अपने पीहर की चिंता नहीं करनी चाहिए। अब यह सब उसका नहीं, बल्कि उसके भाइयों का फर्ज है। इसके जवाब में वो कहती है कि जब एक ही घर में एक ही मां की कोख से जन्म लेकर हम भाईबहन एक साथ रहते हैं, तो उस घर के प्रति किसी एक का नहीं, बल्कि सभी भाई व बहन का फर्ज बनता है। इसी के चलते वो वापस पीहर आ जाती है और अपने गांव में अस्पताल खोलने का जो सपना उसने पहले देखा था, उसे पूरा करना चाहती है। उसके घर में उसकी मां गायत्री (साधना सिंह) उसके तीन भाई मनीष (मुधर अरोरा), सागर (हितेश कृपलानी), विष्णु (अमित) हैं।

वहीं आगे नंदिनी को पता चलता है कि गांव में आम आदमी की क्याक्या समस्याएं हैं ? खाद के लिए सब्सिडी मिलती है, लेकिन उसका फायदा गरीब किसानों को नहीं मिल पाता। इसी तरह रोजगार योजना के तहत लोन मिलता है, लेकिन इसके लिए भी उन्हें ढेरों चक्कर लगाने प़डते हैं। ग्रामीण विकास की कई सारी योजनाएं हैं, लेकिन इसके लिए भी उन्हें ढेरों चक्कर लगाने प़डते हैं। ग्रामीण विकास की कई सारी योजनाएं हैं, लेकिन उनकी जानकारी लोगों को नहीं है। इतना ही नहीं, और कभी कई समस्याएं हैं, जिनसे ग्रामीणों को दोचार होना प़डता है। आम आदमी की इस सभी समस्याआें के पीछे ऊंचे ओहदे वाले भ्रष्टाचारी लोग है। डीएम (कुलदीप दुबे) व समाज सेविका कल्पना (कविता राठ़ौड) की मदद से नंदिनी इन सभी भ्रष्टाचारी लोगों का पर्दाफाश करने की कोशिश करती है, हालांकि इस सबकी वजह से वो कई लोगों की आंखों की किरकिरी भी बन जाती है। ऐसे में क्या नंदिनी अपने मकसद में कामयाब हो पाती है? क्या उसकी वजह से ग्रामीणों को उनके सभी अधिकार मिल पाते हैं?

सुरेश जे

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