अभिनय कोई नहीं सिखा सकता : महेश ठाकुर
गौर से देखा जाए तो वे अंग्रेजी थियेटर की जानी मानी हस्ती है, लेकिन टीवी उनकी लोकप्रियता का आधार है। पहली बार वे तब चर्चा में आए जब जी टीवी के स्पर्श, थ़ोडा है थ़ोडे की जरूरत है और सैलाब जैसी टीवी धारावाहिकों में अपनी लोकप्रियता के आसमान पर थे और उनमें नायिका के एक आधार नायक की भूमिका करने वाले अभिनेता महेश ठाकुर को लोग आदर्श प्रेमी और पति का सबसे ब़डा उदाहरण मानते थे, लेकिन सहारा के मालनी अय्यर और स्टार प्लस के तू तू मैं मैं में उनकी श्रीदेवी और सुप्रिया पिलगांवकर के पतियों की निभायी कॉमेडीनुमा भूमिकाआें ने उन्हें एक कुशल अभिनेता का दर्जा भी दिलवा दिया। इसके बाद लंबे अरसे तक वे टीवी से गायब रहे। उसके बाद वे स्टार के बिदायी और नाइन एक्स पर जिया जले से वापस भी आए, लेकिन उन्हें वह मजा नहीं आया जो उनकी तू तू मैं मैं जैसी भूमिकाआें में दिखायी सुनायी देता था। इस बार वे फिर लौटे हैं और उनका मानना है कि इस बार वे स्टार प्लस के नए धारावाहिक ससुराल गेंदाफूल में एक ऐसी भूमिका में है, जो उन्हें सुकून देने वाली ही नहीं है, बल्कि लोकप्रियता दिलाने वाली भी है।
प्र आपको नहीं लगता कि आप अपनी वापसी में भी वही दोहरा रहे हैं, जो पहले करते थे, हर तरह से एक समझौता करने वाला इंसान?
उ (हंसते है) आपको लगता है कि समझौता करने वाला इंसान बनना आसान काम है। ऐसी बात नहीं है। दरअसल बिदायी में मैं एक ऐसा पिता था, जिसकी बेटी को पता नहीं कि उसका पिता मर चुका है और जिया जले में मैं एक ऐसे पिता और पति की भूमिका में था, जो अपनी पत्नी की मौत से वाकिफ है और अपनी बेटी के सपनों को उसके रहते पूरा करना चाहता है, पर गेंदाफूल की भूमिका एक ऐसा की है, जो अपनी पत्नी की मौत के बाद अपनी बेटियों की परवरिश करता है।
ा हां पर इसमें नया क्या है?
ल टीवी और फिल्मों में बहुत कुछ नया नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि भूमिका में स्तरों के आधार पर विविधता हो, तो उसमें नया किया जा सकता है। कमल किशोर वाजपेयी की भूमिका भी एक ऐसी ही पिता की है, जो अपनी बेटी के विवाह के लिए प्रयास कर रहा है, जबकि वह शादी नहीं करना चाहती। पर जब उनकी इस बेटी की शादी हो जाती है, तो लाड प्यार में पली यह बेटी उनके परिवार के लिए भी सम्मान और प्रतिष्ठा का नया आधार बन जाती है।
ा बिदायी और जिया जले के बाद गेंदाफूल के पिता में मौलिक फर्क क्या है?
ल कोई खास नहीं। बस इस बार भी मैं पिता ही हूं (हंसते है)
ा लेकिन इतने दिनों तक आप कहां रहे?
ल मैं हमेशा यहीं था। टीवी मैंने कभी नहीं छ़ोडा। बस जो लोग केवल स्टार प्लस देखते हैं, वे सोचते हैं कि मैं काम नहीं कर रहा था। मैं बराबर अपने नाटकों, शोज और विज्ञापनों में व्यस्त था। मैं अपने कैरियर की शुरुआत से ही यह सब कर रहा हूं। धारावाहिकों में तो हम महीनों बाद खुद को साबित कर पाते हैं, पर विज्ञापनों में हम जरा सी देर में ही अपने होने का अर्थ लोगों तक पहुंचा देते हैं। बिदायी में भी मैंने इसलिए काम किया कि वह भूमिका कुछ दिनों की मगर महत्वपूर्ण थी।
ा आप अकेले ऐसे पिता की भूमिका करने वाले कलाकार हैं, जो अपने चेहरे को मेकअप और सफेद बालों से बचाए रहते हैं?
ल (हंसते है) मैं क्या करूं। निर्माता मेरे लिए ऐसी ही भूमिकाएं चुनते हैं। उनका कहना है कि मैं किसी भी उम्र का चरित्र ऐसे ही निभा सकता हूं, पर मैं अब ऐसे भले मानस की भूमिकाएं करतेकरते थक गया हूं। अब मैं कुछ नकारात्मक किस्म की भूमिकाएं चाहता हूं।
ा आपको लगता है कि आपकी इमेज ऐसी ही बन गयी है?
ल नहीं। मालनी अय्यर और तू तू, मैं मैं से पहले मैंने स्पर्श और सैलाब जैसे जो धारावाहिक किए उनकी वजह से लोगों को लगा कि मैं केवल ऐसे ही धारावाहिकों के लिए उपयुक्त हूं। पर यकीन मानिए मैं बुरा आदमी भी बहुत अच्छा बन सकता हूं। (हंसते है) मेरे भाभी और शरारत जैसे धारावाहिक इनसे अलग विस्तारों और स्तरों वाले धारावाहिक रहे हैं।
ा फिल्में ज्यादा क्यों नहीं की ?
ल (हंसते है) यह मेरे हाथ में नहीं। मैंने जब हम साथसाथ है की तो लोगों ने कहा कि तुमने कमाल का काम किया। पर फिल्म वाले लोग समझते हैं कि हम केवल टीवी पर ही अच्छा काम कर सकते हैं।
ा कैरियर में सबसे महत्वपूर्ण क्या रहा?
ल मामली अय्यर में श्रीदेवी के पति की भूमिका निभाना। फिल्मों में मैं यह शायद कभी नहीं कर पाता, पर दुःख इस बात है कि सहारा का यह ज्यादा चल नहीं पाया और लोगों ने कहा कि यह असफल हो गया। जबकि वह एक रोमांचक धारावाहिक था। मैं राजश्री और सतीश कौशिक जी जैसे लोगों का अहसानमंद हूं कि मुझे उन्होंने यह मौके दिए।
ा आपने कभी विधिवत अभिनय की शिक्षा नहीं ली?
ल नहीं। अभिनय कोई भी नहीं सिखा सकता। मैंने भी नहीं सीखा, लेकिन अपनी शुरुआत में मैं रोशन नतेजा के यहां जरूर तीन हफ्ते तक रहा। इससे मैं अभिनय के बारे में जान जरूर गया।
ा आगे क्या तैयारी है ?
ल कुछ नहीं। बस अभी एक अंग्रेजी के नाटक मेड फोर इच अदर किया है। बाकी तो ससुराल गेंदाफूल में ही सारा समय निकल जाता है और जो समय मिलता है, वह अपने परिवार के साथ बिताता हूं। मैं इतना ही काम करता हूं, जितना मेरे परिवार और मेरे लिए खाने कमाने के लिए काफी है। काम करते हुए मैं अपने परिवार से दूर नहीं जा सकता। वह मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
