ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या तेलंगाना मामला केन्द्र सरकार के गले की हड्‍डी बन गया है?

  • हाँ
  • नहीं
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

प्यार इंपासिबल

swatanvartha  Fri, 8 Jan 2010, IST

प्यार इंपासिबल

प्यार हमारी फिल्म इडटी वालों के लिए एक ऐसा शद ह जिस पर फिम बनाना सबसे आसान माना जाता ह। फिर बडे बनर के तले यदि फिम बनती है, तो उसके तुतिकरण पर बहत कुछ निभर करता है। फिमों में चाहे दार कामेडी का हो या फिर एशन का ‘यार’ का सजेट हर जगह फिट । बकि यह फिट ही नहीं हिट भी है। जिस पर फिमें बनाने का सिलसिला बदतूर जारी है।

उदय चोपडा को अब तक वह मुकाम नहीं मिल पाया है जो वे सोचकर चले थे। अब तक वे ‘मोहबते’,‘सुपारी’, ‘मुझसे दोती करोगे’, ‘नील एड निकी’ आर ‘धूम’ जसी फिमें कर चुके है। लेकिन उनकी मटीटारर फिमों को छोडकर कोइ भी फिम हिट की श्रेणी में नहीं आ पाइ ह। जिससे उनके करियर को गति मिल सकें। यह भी एक साइ ह कि यदि वे यश चोपडा के बेटे ना होते तो उनके हाथ इतनी फिमें भी नहीं लगनी थी।

इस बार उदय चोपडा को यिका चोपडा का सहारा मिला ह। बचपन में अमिताभ बन को निदेशित करने की बात करने वाले जुगल हसराज को उदय चोपडा की फिम निर्देशित करने के लिए मिली ह। उदय चोपडा यहा पर कइ जिमेदारिया निभा रहे ह। इस फिम के हीरो होने के साथसाथ वे इस फिम के कथा पटकथा, सवाद लेखक होने के साथ निमाता की भी भूमिकामें ।

उदय यिका के जरिये अपनी सफलता को बडा बनाना चाहते ह ऐसा लगता ह। इधर यिका का भी हाल कोइ बहत अछा नहींह। उनकी महवाकाक्षी फिम ‘हाटस योर राशि’ को असफलता का मुह देखना पडा ह। ऐसे में वे भी एक अदद हिट की तलाश में है

इस फिम की कहानी कलीफोनिया थित यूनिवसिटी में पढने वाली अलिशा (यिका चोपडा) की जिसके चर्चे चारों ओर ह। इसकी वजह ह अलिशा की खूबसूरती। पूरे कपस में उसके जसी हाट आर सुदर लडकी कोइ आर नहीं ।

हर लडका उसे चाहता ह आर उसे देखने के लिए घटों इतजार करता ह। वहीं अभय (उदय चोपडा) भी सारे लडकों की तरह दिल ही दिल मे अलिशा पर मरने लगता ह। अपने कयूटर आर मक टोस की बजाय वह अलिशा के बारे में यादा सोचता रहता ह। अभय एक अति साधारण लडका ह, जो मोटा चमा लगाता है। अजीबसा यवहार करता ह आर दुनिया का सामना करने से घबराता ह। उसमें अमविवास जरा भी नहीं ह आर वह बेहद शमिला ह। अलिशा को तो पता भी नहीं होगा कि उस जसे इसान भी दुनिया में होते ह। अभय इस बात से अछी तरह से वाकिफ ह कि अलिशा एक राजकुमारी ह आर वह बदसूरत आर साधारण किम का लडका ह। कहीं से भी वह अलिशा के लायक नहीं ह। इसके बावजूद वह हिमत जुटाकर अलिशा से अपने यार का इजहार कर देता ह आर उसे समझ आ जाता ह कि यह यार इपासिबल ह। कुछ दिनों बाद दोनों अलगअलग राहों पर चल देते ह। अभय अपने आपको थापित करने में लगा हआ ह, लेकिन तकदीर एक बार फिर अभय को उसके सपनों की रानी के सामने ला खडा करती ह।

या अभय अपने आप पर विवास कर वो पाने में सफल होगा जो उसके लिए असभव ह? या अलिशा चमे के पीछे छिपे उस आदमी को देख पाएगी, जो उसके परफेट मन की परिभाषा पर खरा नहीं उतरता ह? या, सब कुछ भाय ारा निधारित होता ह या भाय को बदला भी जा सकता ह? ये यार सभव ह या असभव? यानी यार पासिबल ह या यार इपासिबल यहीं इसमें दिखाया गया ह।अभिनेेता से निर्देशक बने जुगल हसराज की यशराज फिस के बनर तले बनी यह दूसरी निर्देशित फिम ह। इससे पहले वे एनिमेशन फिम ‘रोड साइड रोमियों’ का निर्देशन कर चुके ह। इस फिम के बारे में वे कहते ह‘यार, पर अब तक हजारों फिमे बन चुकी ह। मने भी अपनी तरफ से कोशिश की ह कि कुछ नयापन दशकों कों म अपनी ओर से दू। इसमें मने कुछ योग किये ह, जो पसद आ सकते है।’

इस फिम के अय कलाकारों में डीनो मोरिया आर अनुपम खेर मुख ह। गीत अनविता दा गु ने लिखे ह आर सगीत सलीमसुलेमान का है।

आपकी राय