बन जाएगी मेरी जगह ; प्रत्युषा बनर्जी
जमशेदपुर से मुंबई आकर वर्तमान टीवी की दुनिया के सबसे लोकप्रिय धारावाहिक ‘बालिका वधू’ की नयी नायिका आनंदी बनने वाली अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी से कोई यदि पूछे कि उन्हें नयी आनंदी बनकर कैसा लग रहा है तो वे शायद कुछ नहीं कहें।
पर यदि धारावाहिक में उनकी भूमिका का नया विस्तार देखें तो उनके सपने और मंशाएं भी समझ में आ जाएंगी। यही नहीं, अपने साथ तीनतीन अभिनेत्रियों के चुनावी दंगल से नायिका चुनी गयी प्रत्युषा के लिए यह भूमिका आसान नहीं होगी। वे न केवल बाल अभिनेत्री अविका गौर की छवि से ग्रस्त हो सकती हैं, बल्कि अपने पात्र को प्राकृतिक बनाने के लिए नाटकीयता को शिकार भी हो सकती हैं।
प्र आपको पता है कि पहले से किसी भूमिका को कर रही अभिनेत्री को रिप्लेस करने का क्या मतलब होता है ?
उ पर मैं किसी ऐसे दबाव में नहीं हूं। मेरे लिए यह पांच साल आगे बढी कहानी में लीप लेकर नयी अभिनेत्री को लांच करने जैसा अनुभव है । मेरे लिए तो यह कैरियर की शुरुआत है।
ा हां पर इसमें आपके सामने निवेदिता तिवारी और केतकी चैताली भी थी लोगों से बकायदा इसके लिए वोट मांगे गए थे। आप जानती थी आप चुन ली जाएंगी ?
ग नहीं, मुझे केवल खुद पर भरोसा था बस
ा अब इस भूमिका को लेकर अपने कैरियर पर कितना भरोसा है ?
ग अभी तो मेरी शुरुआत है। मैंने अपनी पढायी पूरी की है और मैं शास्त्रीय नृत्य सीखते हुए अभिनय करना चाहती थी। लेकिन कभी मुंबई आकर अपने इस सपने के पूरे होने के बारे में नहीं सोचा था। अभी मुझे यहां सिर्फ छह महिने हुए हैं। मैं केवल उन्नीस साल की हूं। मेरे लिए एक छोटे शहर से ब़डे सहर में आकर काम करना चुनौती भरा है।
ा कैसे ?
ग यह मेरा पहला धारावाहिक है और मैंने इसके लिए कोई योजनाबद्ध तैयारी नहीं की है। बस कुछ समय तक स्कूल और कॉलेज में कुछ नाटकों में काम जरूर किया है। हां मेरे लिए माध्यम बदल गया है। लोगों की उम्मीदें मुझसे बंधी हैं।
ा आपके सामने तीन और अभिनेत्रियां थी तो ऐसा क्या था कि यह भूमिका आपको मिली ?
ग मैं कलकत्ता में प़ढ रही थी जब इसके लिए ऑडिशन की खबर आयी । मैंने भी अपना ब्यौरा भेज दिया। वे नए चेहरे की तलाश में थे। पर तब मुझे पता नहीं था कि वो नायिका तलाश रहे थे मुझे तो बाद में पता चला कि मैं नयी आनंदी बन गयी हूं।
ा आपकी भूमिका पर आनंदी का पात्र निभाने वाली अविका गौर की छाया बनी रहेगी ?
ग यह तो होगा ही। लेकिन मैं कोशिश करूंगी कि मेरा अपना अलग वजूद बने। वैसे भी अब आनंदी पांच साल बडी हो गयी है और उसमें परिपक्वता दिखायी देनी चाहिए। उसके परिवार में उसकी हैसियत और संबंधों का संसार अब बदला हुआ है, यहां तक कि उसके पति बने जगदीशा का भी।
ा आनंदी बनी प्रत्युषा के लिए इसमें क्या नया है ?
ग कुछ नहीं। वह पहले की तरह ही कोमल और परिवार में प्रेम का नया विस्तार देने वाले पात्र की तरह है। मैं वास्तविक जिंदगी में ऐसी ही हूं। हां यदि मुझे छोटी आनंदी का चरित्र करना पडता तो वह मेरे लिए मुश्किल होता।
ा लोग आपको स्वीकार करने में हिचकिचाएंगे नहीं ?
ग यह तो हमेशा होता है पर मैं लोगों के दिल में जगह बना लूंगी। मैं कोशिश करूंगी कि लोग मुझमे आनंदी का नया चेहरा तलाश लें।
ा और आपकी आगे की पढायी के साथ परिवार ?
ग मैं अपनी पढायी पत्राचार से पूरी कर रही हूं। मेरा परिवार एक पारंपरिक परिवार जरूर है पर बंगाली होने की वजह से कला मेरे खून में है और मेरे मातापिता मुझे सहयोग करते हैं। वे नहीं होते तो मैं कभी आनंदी नहीं बनती।
ा अब आगे क्या तैयारी है ?
ग अभी मैं कैसे बता सकती हूं। अभी तो मेरी शुरुआत भी नहीं हुई है पर निश्चित रूप से मेरा सपना बॉलीवुड है। मैं जानती हूं कि ये आसान नहीं है।
ा आसान तो अब आपके लिए जीवन भी नहीं होगा। आप अचानक व्यस्त हो गयी हैं ?
ग हां, अब समय नहीं मिलता। मैं महीने में पच्चीस दिन शूटिंग करती हूं। लेकिन जब फुरसत होती है तो अपने मातापिता के पास चली जाती हूं और अपने नृत्य का रियाज करती हूं बस।
