स्वास्थ्य के लिए जरुरी है नींद और आराम
प्राचीन समय से ही स्वस्थ रहने के नियमों में सबसे पहला स्थान नींद का रहा है। मानव शरीर की यही खासियत है कि दिनभर की शारीरिक थकान की भरपाई रातभर की नींद में पूरी हो जाती है। जो लोग रात में नहीं सोते उन्हें किसी न किसी तरह दिन में इसकी भरपाई करना जरूरी होता है। हर साल लाखों स़डक दुर्घटनाएं उनींदे ड्राइवरों के कारण होती हैं।
कितनी नींद जरूरी
इस पर कई मतभेद है। आधुनिक युग से पहले यानी १९२० के आसपास यूके में माना जाता था कि ९ घंटे की नींद तरोताजा रहने के लिएजरूरी है। अब ऐसा नहीं है। अब स़ाढे सात घंटे की नींद को ही विशेषज्ञ पर्याप्त मानते हैं। कई विद्वानों का मानना है कि ६ घंटे की नींद वयस्क मानव शरीर के लिएपर्याप्त है। शर्त यही है कि उसे नींद दवाआें की मदद से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से आए।
क्या होती है नींद
नींद के कई चरण होते हैं। मात्र दस मिनट में ही जागृत अवस्था के हल्की नींद की ओर जाने को स्टेज वन श्रेणी की नींद माना गया है। स्टेज टू पहले से गहरी होती है, जो २० मिनट तक रहती है। नींद के तीसरे और चौथे चरण को गहरी नींद माना गया है। नींद के इसी चौथे चरण को गहरी नींद माना गया है। नींद के इसी हिस्से में शरीर और दिमाग को आराम मिलता है और दिनभर की थकान मिटती है। नींद के इस हिस्से में दिमाग से डेल्टा लहरें उत्पन्न होती हैं, इसलिए इसे डेल्टा वेव भी कहा जाता है। इस अवधि में कोई सपने नहीं आते। ९० मिनट की गहरी नींद के बाद रैपिड आई मूवमेंट शुरू होता है। सामान्य नींद में लोग इसके कई बार कई चरणों से होकर गुजरते हैं। दिक्कत तब उत्पन्न होती है, जब यह पैटर्न बदल जाता है।
नींद का दुरुपयोग
आधुनिक युग में नींद का सबसे अधिक दुरुपयोग किया जाता है। लोग बेडरूम का इस्तेमाल सिर्फ सोने के लिए नहीं, बल्कि दूसरे कामों के लिएभी करने लगे हैं। अक्सर शिकायत करते हैं कि रात को देर से खाते हैं, इसलिए जागना प़डता है। कई बार पालक यह शिकायत करते हैं कि बच्चे जगते रहते हैं, इसलिएहमें भी जागना प़डता है। यह प्रकृति की नियामत का दुरुपयोग है। टीवी सीरियल देखना या देर रात तक फिल्में देखने से नींद का पैटर्न बदल जाता है। दिनभर की थकावट निकल ही नहीं पाती और दूसरा दिन सामने आ ख़डा होता है। जब रात में ठीक से नींद नहीं होती तब च़िडच़िडापन घर करने लगता है। एसीडिटी तथा अन्य शारीरिक समस्याएं तो साथ आती ही हैं। अक्सर देखा गया है कि जो लोग रात को भरपूर नींद नहीं सोते, उन्हें दिन में नींद के झोंके आते रहते हैं। शरीर किसी न किसी तरह अपने नींद के कोटे की भरपाई कर लेना चाहता है, लेकिन आधुनिक जीवन की जरूरतें उसे पीछे धकेलती रहती हैं।
नींद और मूड
नींद और मूड का चोलीदामन का साथ है। जिस तरह संतुष्टि प्रदान करने वाले भोजन के बाद एक तृप्ति का भाव आता है, उसी तरह भरपूर नींद के बाद भी दिल खुश बना रहता है। अधूरी नींद से शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली भी ठीक से काम नहीं करती है। यही वजह है कि जिन्हें ठीक से नींद नहीं आती, उन्हें बहुत जल्दी संक्रमण लग जाता है। भरपूर नींद के बाद दिमाग तनावरहित हो जाता है। जब हमारे शरीर और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिलता तब तनाव, अवसाद, बेचैनी और अन्य बीमारियां घेर लेती हैं। नींद से मस्तिष्क के रसायनों का संतुलन कायम रहता है। इस संतुलन के कारण दिमाग क्रियाशील होकर दिन भर का प़ीडादायक तनाव कम करता है। जब हम नींद नहीं ले रहे होते हैं, तो हम नींद के स्वास्थ्य कारक फायदों से वंचित रहते हैं।
नहीं होती नुकसान की भरपाई
नींद की कमी की भरपाई होना मुश्किल होता है। यदि आप सोमवार से शुक्रवार तक काम में मसरूक रहते हैं और रातों की नींद के कुछ घंटों की बलि च़ढा देते हैं, तो उसकी भरपाई शनिवार को चंद घंटे अधिक सोने से नहीं होगी। नींद की कमी की पूर्ति सिर्फ रात को सोने से ही पूरी होगी। नींद के विषय की गंभीरता से लेना जरूरी है, ताकि मन और शरीर स्वस्थ बना रहे, कार्यकुशलता एवं क्षमता भी बरकरार रहे। थकान के कारण शरीर पूरी क्षमता से काम नहीं करता है।
दवाआें का दुरुपयोग
नींद की कमी को पूरा करने के लिए नींद लाने वाली दवाआें का सेवन करते हैं, किंतु इनसे मिलने वाली नींद साधारण नींद न होकर नशा होती है। इसमें नींद के प्राकृतिक गुण नहीं होते। इससे नींद के लाभों से वंचित रह जाते हैं।
क्या रखें सावधानी
खाना जल्दी खाएं। दूध में शहद डालकर पीने से नींद अच्छी आती है। व्यक्ति नींद की चिंता न करें। संतोषी मन बनाकर सोएं तो नींद अच्छी आएगी। रात को स्नान करके सोने से भी नींद अच्छी आ सकती है।
