हैलो डॉर्लिंग
बॉलीवुड में अब यह ट्रेंड पुराना हो चुका हैै कि जो हिट गीत है, उसका रिमिक्स वर्जन बनाकर दर्शकों के सामने पेश कर दिया जाए, जिसके कारण कलाकारों की जमकर नकल मारी जा सके और सुननेदेखने वालों को आनंद भी आ जाये। ये हो गयी रिमिक्स की वाहवाही। इस फिल्म में कुल ६ गीत हैं। इनमें ३ मूल गीत हैं और ३ या तो रिमिक्स हैं या किसी हिट गीत से प्रेरित हैं। इसका पहला ही गीत ‘आ जाने जॉ’ इसमें थ़ोडा बहुत हेरफेर कर कम्पोज किया गया है। इस गीत को आकृति कक्क़ड और अंतरा मित्रा ने गाया है। इसे शब्बीर अहमद ने लिखा है। इस गीत की विशेषता यह है कि इसमें जावेद जाफरी से बीचबीच में गंवाया गया है। यह आजकल टीवी चैनलों पर भी चल रहा है। दूसरा गीत ‘बैंड बाजा’ की कम्पोजिंग बेस्ट बन प़डी है। आशीष पंडित के लिखे इस गीत को रिचा शर्मा, रितु पाठक और राणा मुजुमदार ने गाया है। यह एक खास अंदाज वाला गीत है। इसमें लोकगीत का टच भी देखने को मिलता है। इसमें प्रीतम ने ढोलक का अच्छा इस्तेमाल किया है। डीजे मिथ ने इसका रिमिक्स तैयार किया है, जो अच्छा लगता है। तीसरा गीत ‘दिल तो साला उल्लू का पट्ठा हैैै।’ को कुमार ने लिखा है और सुनिधि चौहान नेेे गाया है। यह एक फनी गीत है, जो सुनने में पटोरी टाइप लेकिन लगता अच्छा है। इसे कुछ लोग गुनगुना भी सकते हैं। आगे शब्बीर अहमद का गीत ‘अठारह बरस की’ को सुजाने डिमेलो ने गाया है। यह खिच़डी गीत है। अंतिम गीत ‘वर्किंग गर्ल्स’ एक मजेदार गीत हैैै। इसकी कम्पोजिशन स्पेशली विज्ञापन फिल्मों और टीवी सीरियल्स के शीर्षक गीत की तरह लगती है। इसमें टोटली वेस्टन संगीत का प्रयोग किया गया है। इस फिल्म के गीत/संगीत को सुनकर लगता है कि प्रीतम के पास काम बहुत है, लेकिन क्वालिटी कम है। मौलिक संगीत शायद वे ब़डे बैनरों के लिए बचाकर रखते हैं। यहां वे एवरेज रहे हैं। टीसीरिज ने इसे १५० रुपये में जारी किया है।
माधोलाल कीप वॉकिंग
आजकल छोटे बजट की फिल्मों का भी संगीत मिठास लिए हुए होता है। इस फिल्म के कुल ७ गीतों में ६ गीत सानी असलम ने और एक गीत साहिल फतेहपुरी ने लिखा है, जिन्हें नायब रजा ने संगीत सेे संवारा है। पहला गीत जो कि एक थीम रिलेटेड है। इसके बोल है‘नैना लागे’ इसे भूपिन्दर सिंह ने गाया है। खासकर फिल्मों में एक लम्बे अर्से के बाद उनकी आवाज सुनने को मिली है, जो कानों में मिश्री घोल देती है। यह कुल ३ बार रिपिट है, जिसमें स्वयं नायक, उसकी पत्नी और बेटी पर आधारित है। जिसे क्रमशः परवीना और मिताली सिंह ने गाया है। ‘फलसफा ये जिन्दगी का’ को अलताफ राजा ने गाया है। उनका ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ वाला जादू आज भी बरकरार है। इसमें शब्दों की बाजीगरी नजर आती है। ‘खुदा के वास्ते’ को असलम साबरी ने गाया है। कव्वालीनुमा गीतोंं को सुनने के आदी श्रोताआें को असलम की आवाज में खनक नजर आयेगी और अच्छा लगेगा। आगे ‘ये धरती’ को रजा ने गाया है। ये शायद संगीतकार ने स्वयं गाया हैै, लेकिन नाम सिर्फ रजा ही लिखवाया है। उनकी आवाज तो अच्छी है। इसका फिल्मांकन कैसा होगा उस पर यह गीत निर्भर है। अंत में इसका शीर्षक गीत ‘माधोलाल की वाकिंग’ को रजा हसन ने गाया है, जो ठीकठाक बन प़डा है। कुल मिलाकर इसमें प्रतिष्ठित गायकों को सुनने का आनंद तो उठाया ही जा सकता है। यानी माधोलाल संगीत की दृष्टि से एक खूशबू की तरह है। टाइम्स म्यूजिक ने इसे १२५ रुपये में जारी किया है।
डिवाइन चैन्ट्स ऑफ नारायण
भगवान की आराधना में हम किस तरह लगे रहें कि हमें डर किसी भी बात का ना हो। इसमें अकेलापन और असुरक्षा का भाव हमारे जीवन में कभी प्रवेश ना करे। इन्हीं बातों का समावेश इस अलबम में किया गया है। उमा मोहन द्वारा गाये गये कुल आठ प्रस्तुतियों में मंत्रों का प्रयोग पूरी तरह से निर्दिष्ट है। ऐसा माना जाता है कि मंत्र हमारे शरीर के तंंंंत्र को जागृत करने का कार्य करते हैं, जिसके कारण मानसिक रूप से हम किसी भी प्रकार की परेशानियाेें का सामना करने हेतु तैयार रहते हैं। इन आठ प्रस्तुतियों में प्रमुख रूप से ‘ओम नमो नारायण’, ‘नारायणा ‘नारायण सूक्तम’, ‘श्रीमन् नारायण भगवताहा’, ‘नारायण स्तोत्रम’, ‘हृदय स्तोत्रम’ और ‘ओमअष्टक्षरा मंत्र’ प्रमुख हैं, जो हमारे अंंंंदर की क्षमताआें को जगाने के लिए काफी है। विशेष तौर से यह कहना चाहूंगा कि उमा मोहन ने इसके हर क्षेत्र में कार्य किया है। यानी रचना शोध, संगीत रचना और गायन में भी उन्होंने प्रभावित करने का भरपूर प्रयास किया है। इसे टाइम्स म्यूजिक २९५ रुपये में जारी किया है।
