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लोग मुझे खलनायकी में पसंद करते हैं:आशुतोष राणा

Swatantra Vaartha  Fri, 10 Sep 2010, IST

लोग मुझे खलनायकी में पसंद करते हैं:आशुतोष राणा

मध्यप्रदेश के रहने वाले और सबसे पहले टीवी के लिए महेश भट्‌ट के धारावाहिक ‘स्वाभिमान’ में दिखायी देने वाले अभिनेता आषुतोश राणा ने पूजा भट्‌ट की तनुजा चंद्रा निर्देशित फिल्म ‘दुश्मन’ से अपना फिल्मी कैरियर शुरू किया था, लेकिन आशुतोष राणा की टीवी से दोस्ती पुरानी है। लंबे समय तक टीवी से गायब रहे आशुतोष ने पिछले साल चैनल रीयल के भारत के सबसे ब़डे रिएल्टी शो कहे जाने वाले सरकार की दुुनिया में एक ऐसे तानाशाह की भूमिका यानी बिगबॉस सरीखी माने जाने वाली भूमिका से वापसी की थी जो सामने भी था और शो में हिस्सा लेने वालों के लिए खतरा भी बने रहा। जहां तक अभिनय की दुनिया में उनके हाेेने का अर्थ है, तो लगभग साल भर बाद हो रही उनकी टीवी पर वापसी में भी वे दूसरे चरित्रों के लिए खतरा बनकर ही लौटे हैं।

प्र लेकिन क्या यह जरूरी है कि आप टीवी हो या फिल्म खलनायक बनकर ही सामने आएं?

उ नहीं! कोई जरूरी नहीं, लेकिन जब मुझे लगता है कि किसी खलनायक की भूमिका में मेरे लिए नयी गुंजाइश बन रही है, तो मैं उसे कर लेता हूंं। फिल्मों में मेरी शुरुआत दुश्मन और संघर्ष जैसी ही फिल्मों से हुई थी। लोगों ने मुझे पसंद किया और मैं यही कर रहा हूं। अपने पिछले रिएल्टी शो सरकार की दुनिया में भी मैंने कुछ ऐसा ही अलग किया था।

े काली एक अग्निपरीक्षा में ऐसा क्या है आपके लिए?

प दरअसल यह प्रकृति को दिखाने वाली कहानी है। कहानी में मैं केशव ठकराल नाम का ऐसा पात्र हूं जो बिजनेसमैन, ताकतवर और लोगों के लिए मसीहा जैसा है। वाेे समझता है कि जनबल, धनबल, बाहूबल और ज्ञानबल से सब कुछ जीता जा सकता है, पर ये अलगअलग आदमी के पास हो, तो कोई लाभ नहीं। मेरे पास ये सब हैं इसलिए इस ताकत की ग्लोरी को मैं नायिका के साथ भी ज़ोड देता हूं।

े आपको लगता है कि जैसी भूमिका आपनेअपने पिछले शो में निभायी और जिस तरह की भूमिका अब निभा रहे हैं वो आसानी से मिलते हैं?

प हां, हमारे समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो ताकत के बल पर एक समानांतर न्याय की दुनिया चलाते हैं, लेकिन वो उनके अपने कायदे कानूनों से बनी होती है। काली में भी मेरा पात्र ऐसा ही है जो राजनीति, कानून, पुलिस और हिंसा के बल पर नायिका के लिए सबसे ब़डा खतरा बन जाता है। इसे देखकर लोगों को शोले का गब्बर याद आ जाएगा जो सिर्फ अपने मकसद को पाने के लिए जीता था। चाहे उसके लिए फिर कितनी हिंसा क्यों ना करनी प़डे।

े इस समय आप जिस धारावाहिक में हैं उसे महिला उत्प़ीडन और यौन शोषण के खिलाफ एक ल़डायी भी माना जा रहा है?

प देखिए स्त्री के अपमान और उसके शोषण का हर युग में बस तरीका बदलता रहा है। सीता और द्रोपदी से लेकर। यह प्रकृति की विकृति से ल़डने वाली मुहिम है। अगर इसमें मैं किसी तरह लोगों की मदद कर सकता हूं, तो मेरी उपलब्धि होगी। यह धारावाहिक महिलाआें को इस अंजान शोषण से ल़डने में मदद करेगा।

े यह भी कहा जा रहा है कि कहानी बैडमिंटन की एक मशहूर खिल़ाडी की असली जिंदगी से प्रेरित है?

प कुछ लोग ऐसा मान रहे हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है। हमारे जीवन की हर कहानी की प्रेरणा हमें हमारे बीच से ही मिलती है। काली की कहानी भी एक ऐसी ही ल़डकी रचना की कहानी है, जो बैडमिंटन की खिल़ाडी बनकर शोहरत पाना चाहती है, लेेकिन ठकराल उसकी राह में ऱोडा बन जाता है, तो वेे आने साथ होने वाले यौन अन्याय के खिलाफ विश्वास, साहस और धैर्य के साथ उसका मुकाबला करती है।

े आपकी शुरुआत तो खलनायकी से ही हुई?

प यह संयोग की बात है कि जब मैंने फिल्मों में काम करने का मन बनाया तो महेश जी को दुश्मन और संघर्ष जैसी फिल्मों के लिए मैं ही सबसे सही चुनाव लगा, लेकिन यह मेरे लिए चुनौती भी रहीं कि मैंने अपने कैरियर की शुरुआत में ही ऐसी भूमिकाएं निभायी जो शायद दूसरे कलाकार मना कर चुके थे। इनमें शबनम मौसी और तमन्ना जैसी फिल्में शामिल थीं।

े आप आजकल फिल्में नहीं कर रहे हैं, लेकिन आपने टीवी पर काम करना मंजूर कर लिया है?

प मैं टीवी के लिए नया नहीं हूं। मैंने सबसे पहले महेश भट्‌ट का दूरदर्शन का धारावाहिक स्वाभिमान किया था और उसकेे बाद बाजी की एंकरिंग की। जहां उसके बाद सरकार की दुनिया टीवी की दुनिया का सबसे ब़डा रिएल्टी शो था। जहां तक मेरे फिल्में कम करने की बात है, तो मैं गिनकर फिल्में नहीं करता। मैं चाहता हूं कि मैं सौ की जगह दस फिल्में करूं लेकिन मुझे लोग याद रखें जैसे शबनम मौसी या दुश्मन और संघर्ष के साथ हुआ। फिर मैं भाग्य को सबसे ब़डा मानता हूं। कई बार हमारी पसंद और भगवान का फैसला नहीं मिलते। आपकी अपनी फिल्में कौन सी पसंद हैं आपको?

प दुश्मन और शबनम मौसी।

े आपकी पत्नी रेणुका शहाणे खुद जानी मानी अभिनेत्री हैं, और आपने उनके साथ अपनी फिल्म निर्र्माण कंपनी भी शुरू की है?

प हां, हमारी पहली मराठी फिल्म रीटा को लोगों ने पसंद किया है। आजकल वे मेरे लिए हिन्दी में फिल्म बनानेे के लिए एक पटकथा पर भी काम कर रही हैं।

े उनके साथ जीवन और परिवार के बारें में क्या सोचते हैं?

प मुझे उनका साथ मिला यह मेरे लिए जीवन की सबसे महत्वपूर्ण बात है। बस अपने दो बेटों के साथ एक बेहतर जिंदगी जीना चाहता हूं।

े अपनी शुद्ध हिन्दी के साथ?

प क्यों नहीं। हिन्दी मेरी मातृभाषा है और मैं इस पर गर्व महसूस करता हूं।

े अब आने वाली फिल्मों का क्या हाल है। आप तो दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम कर रहे थे?

प नहीं! वहां मैंने ज्यादा काम नहीं किया। सिर्फ बैंकी, बंगारन और ओक्का मगादू जैसी फिल्में की। जहां तक आने वाली फिल्मों की बात है, तो अलीबाबा और इकतालीस चोर, सरगना, रामायण, कुशल मंगल और हेमिल्टन पैलेस जैसी फिल्में आ रही हैं।

सुषमा पारचा

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