संबंध नहीं,प्रतिभा दिलाती है काम ः स्वाति चिटनिस
टीवी पर जेडी मजीठिया के लोकप्रिय धारावाहिक जस्सू बेन की मुख्य भूमिका से चर्चा में आने वाली और मराठी के बाद हिन्दी भाषी दर्शकों में भी लोकप्रियता कमाने वाली महाराष्ट्र के जलगांव की रहने वाली अभिनेत्री स्वाति चिटनिस अब चाहे तो जश्न मना सकती हैं। इसकी वजह है कि उनका धारावाहिक जस्सूबेन बेशक बीच में बंद हो गया और उसके बाद उनका स्टार प्लस का एक ही धारावाहिक मितवा भी चर्चा में रहा। इस पखव़ाडे ना केवल उनकी फिल्म ‘रोड टू संगम’ मैदान में आयी है, बल्कि कलर्स पर परेश रावल के धारावाहिक लागी तुझसे लगन में भी धमाकेदार शुरुआत हुई है। हालांकि कहा जा रहा है कि ‘लागी तुझसे लगन’ के मिलने में परेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसकी वजह भी है कि अपनी हालिया फिल्म ‘रोड टू संगम’ में स्वाति ने परेश की पत्नी आरा की भूमिका की है।
प्र इस बात में कितना दम है कि रोड टू संगम करना आपके लिए फायदे का सौदा रहा ?
उ जरा सा भी नहीं। रोड टू संगम तो मैंने अब की है जबकि परेश रावल से मेरी मुलाकात काफी पहले हुई थी। लेकिन उन्हें लगा कि उनकी फिल्म में उनकी मुस्लिम बीवी की भूमिका मैंने करीने से निभायी है सो उन्होंने अपने धारावाहिक में भी मेरी जगह निकाल ली,बस।
- यानी उन्होंने ही आपको भूमिका दिलवायी?
प ऐसी बात नहीं। कोई किसी को भूमिका नहीं दिलवाता। यहां आपके संबंध नहीं आपकी प्रतिभा काम आती है। जस्सूबेन के बाद मैंने जब मितवा किया तो लोगों को मेरा काम पसंद आया।
- आपको क्या लगता है कि लागी तुझसे लगन की दत्ता पाटिल की भूमिका लोगों को कितनी पसंद आएगी?
प हां यह एक ऐसी मां की भूमिका है, जो अपने डॉन बेटे दत्ता पाटिल यानी मिशान रहेजा और बेटी बनी आशका गरोडिया से बहुत प्रेम करती है, लेकिन एक दिन धारावाहिक की नायिका बनी नकुषा जब उसके बेटे पर होने वाले हमले से उसकी जिंदगी बचाती है, तो वह एक नए प्रतीक के रूप में सामने आ जाती है।
-इसमें आपके लिए नया क्या है?
प ऐसा कुछ नहीं जो मैंने पहले नहीं किया, लेकिन इसमें नायिका और मेरे बेटे के साथ मेरी बेटी और मेरे बेटे के दाहिने हाथ माने जाने वाले अभिनेता विनय रोहेरा का प्रेम त्रिकोण भी जब विस्तार लेगा तो इसकी कहानी कई चौंकाने वाले स्तरों के साथ सामने आएगी।
- आपको नहीं लगता है कि आपका यह रोल एक बार फिर जस्सूबेन की तरह कोमल मन की पारंपरिक मां का ही है जबकि मितवा की महावीरी का चरित्र इनके मुकाबले कुछ ज्यादा ही सख्त रहा ?
प लागी मुझसे लगन में मेरा अभी काम शुरू हुआ है। जस्सूबेन की तरह यह अभी कई बार कई रूपों में सामने आने वाली है जबकि महावीरी की सख्त भूमिका के लिए भी मेरे इस परितर्वन के लिए मेरे पास बधाइयों के ढेर लग गए थे। जस्सूबेन एक कोमल और अपने घर की हर समस्या के लिए एक निवारण की तरह थी जबकि महावीरी उसके विपरीत अपने परिवार के प्रति परंपरा और उन्हें बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध सख्त किस्म की महिला है। लेकिन पाटिल परिवार की मुखिया इन दोनों से अलग है।
ी पाटिल की मां की असलियत क्या है?
प अभी नहीं बता सकती, लेकिन वह अपने अंडरवर्ल्ड में मुखिया बने बेटे की मां है जिसका पति उसे छ़ोड गया है और बेटा उसकी परंपरा को निभाते हुए उसका काम संभाल रहा है। आगे इसकी कहानी और चरित्रों में बदलाव आते रहेंगे।
= आपके मितवा को लेकर कहा गया था कि आज के माहौल में ऐसे विषयों पर बने धारावाहिक समाज में एक अलगाव ही पैदा करने का काम कर रहे हैं?
प नहीं। मितवा की मंशा ऐसी नहीं थी। इसकी कहानी में ऐसे तत्व पिराए गए जो ऐसी मान्यताआें और रु़ढवादी परंपराआें के विरोध में वैचारिक स्तर पर एक मुहिम की शुरुआत करने वाले थे। हाल ही में उत्तर प्रदेश और हरियाणा में घटी कुछ ऐसी खौफनाक घटनाआें को यदि देखें तो आज भी हमारे समाज में ऐसी परंपराएं और संकीर्ण मानसिकताएं बनी हुई हैं, जो मानवीय स्तर पर स्वीकार नहीं की जा सकती।
- जस्सूबेन और मितवा के अलावा किन फिल्मों और धारावाहिकों में काम किया?
प जस्सूबेन के बाद मैं आराम कर रही थी और जब मितवा का प्रस्ताव आया तो फिर इसमें व्यस्त हो गयी। यह स्टार प्लस का ब़डा धारावाहिक तथा और लगभग इसमें मुझे रोज शूटिंग करनी प़डी है। सो बाकी फिल्मों और धारावाहिकों के लिए समय नहीं मिला। अब जब लागी तुझसे लगन मिला तो बाकी काम कम हो गए हैं।
- आपकी फिल्म रोड टू संगम पिछले दिनों काफी चर्चा में रही?
प हां! मुस्लिम पृष्ठभूमि पर बनी निर्देशक अमित राय की इस फिल्म में मुख्य भूमिका में हशमतुल्ला बने परेश रावल की आरा नाम की ऐसी पत्नी की भूमिका में हूं, जो एक फोर्ड कंपनी की एक ऐसी ग़ाडी को ठीक करने का काम करता है जिसमें गांधी जी की अस्थियां ले जायी गयी थीं, लेकिन जब शहर में एक बम विस्फोट हो जाता है और उसके पति को पक़ड लिया जाता है, तो वह उसकी मदद का सबसे ब़डा आधार बनकर उभर - परेश रावल के बारे में क्या कहती है?
प बस इतना ही कि उनका जवाब नहीं।
