सुषमा बनीं नेता विपक्ष गडकरी होंगे भाजपा अद्यक्ष
नइ दीली । वरिठ भाजपा नेता लालकण आडवाणी ने आज अतत: विपक्ष के नेता का पद छोड दिया आर लोकसभा में भाजपा की उपनेता सुषमा वराज को आडवाणी की जगह नेता तिपक्ष बना दिया गया। आडवाणी को भाजपा ससदीय दल का अयक्ष बनाया गया है।
भाजपा ससदीय दल ने अपने सविधान में सशोधन कर आज सवसमति से आडवाणी को ससदीय दल का चेयरमन (अयक्ष) बनाया। अयक्ष की हसियत से आडवाणी ने अपने पहले फसले में सुषमा वराज को लोकसभा आर अण जेटली को रायसभा में विपक्ष का नेता नियुत किया। इन नियुकथ के साथ ही नववष में भाजपा को नये नेतव की ओर ले जाने की कवायद शु हो गयी। कल होने वाली भाजपा ससदीय बोड की बठक में राजनाथ सिंह अपना अयक्षीय ताज महाराट के देश अयक्ष नितिन गडकरी को पहनाने जा रहे ह। इस तरह से तीनों भावी पदों पर अपेक्षाकत युवा नेतव (६० से नीचे) आसीन हो जाएगे। लोकसभा के पिछले चुनाव में हार के बाद पार्टी में जारी कलह के इस परिवतन के साथ पटाक्षेप की उमीदें सघ परिवार कर रहा ह। इस बदलाव की परेखा राटीय वयसेवक सघ ने बनायी थी। अलबाा आडवाणी के राजनीति के हाशिये में पहच जाने की अटकलें सच नहीं बन पायीं। यह माना जा रहा था कि आडवाणी राजनीति से सयास ले लेंगे, इन सबका उहोंने अपने ही शदों में खडन करते हए कहा, ‘आज अखबारों में ऐसी सुखिया देखीं कि ‘आडवाणी युग का आज अत’ या ‘रथयाी आज रथ से उतर जाएगा’। आडवाणी ने कहा कि ‘ये न समझें कि आडवाणी युग का अत हो गया ह।’ अगर वे समझते ह कि आडवाणी सकियता छोड देंगे या आडवाणी राजनीति छोड देंगे, तो वे सब गलत ह।’ आडवाणी ने कहा कि वह १४ साल की आयु से ही रथयाी बन गये थे आर ‘अगर कोइ ये कहेगा कि आडवाणी रथ से उतर गये, तो म उसे (रथ) छोडने वाला नहीं। जीवन भर चलेगी, मेरी।’
पाकितान यात्र के दारान २००५ में जिना के बारे में टिपणी के कारण सघ परिवार के सबसे करीबी से किरकिरी बने आडवाणी तमाम उतार चढाव के बावजूद अपना राजनीतिक वजूद बचाये रखने में सक्षम साबित हए। उहोंने कहा कि भाजपा ससदीय दल के अयक्ष के प में ‘मेरे जीवन आर मेरी राजनीति में एक नया अयाय शु हआ ह।’ उहोंने कहा कि नेता विपक्ष का पदभार छोडने पर वह राहत आर पूण सतुटि का अहसास कर रहे ह। राहत इसलिए कि सकिय राजनीति में रहने के बावजूद अब जवाबदेही उनकी नहीं रहेगी। सघ से अपने रितों को याद करते हए भाजपा नेता ने कहा कि अगर वह राजथान के चारक के प में सकिय नहीं होते, तो शायद आज राजनीति में नहीं होते। उहोंने आज की पीढी के राजनीतिज्ञों पर तीखी टिपणी करते हए कहा, ‘आज राजनीति में आने वाले राजनीति को ऐसा काय मानते ह, जिससे धन कमाया जा सके। ताकत बनायी जा सके आर भाव बनाया जा सके।’ उहोंने कहा, ‘लेकिन यह मानसिकता यतिगत एजेंडा ह, जबकि आजादी की लडाइ के समय राजनीतिज्ञों का ऐसा यतिगत एजेंडा नहीं हआ करता था।’
आडवाणी ने कहा कि भाजपा में यतिगत एजेंडा जितना कम होगा, पार्टी उतनी अधिक भारत की सेवा कर सकेगी। उहोंने पदों के लिए आपसी खींचतान पर परोक्ष टिपणी करते हए कहा कि राजनीति में आज रेलवे कपाटमेंट की मानसिकता बन गयी ह। साथ ही कहा कि रेल के डिबे में जितने लोग चढ जाते ह, वे चाहते ह कि बाकी लोग उसमें न घुसने पायें, भले ही उसमें सीटें खाली यों न हों। आडवाणी ने पार्टी को आगाह किया कि ऐसी वा से बचें। परिवतन के इस हर में भी आडवाणी का ‘मोदी ेम’ एक बार फिर मुखर हआ। उहोंने कहा कि आज सुबह ही उनकी मोदी से बात हइ ह। उहोंने गुजरात सरकार ारा थानीय निकायों में अनिवाय मतदान किये जाने सबधी कानून बनाये जाने की शसा की। उहोंने कहा कि वह १९७० से आज तक चुनाव सुधारों के बारे में असर सोचा करते ह। गुजरात के इस कानून को उहोंने अछा कानून बताया।
भाजपा ससदीय दल का अयक्ष निवाचित होने के बाद उहोंने सुषमा को लोकसभा आर जेटली को रायसभा में विपक्ष का नेता नियुत करने की घोषणा करने के साथ ही कहा कि दोनों सदनों में उपनेताआ आर मुय सचेतकों के बारे में वह बाद में निणय करेंगे। बाद में सुषमा ने विपक्ष का नेता नियुत किये जाने के लिए आडवाणी का आभार कट किया। सुषमा ने कहा कि नेता विपक्ष बनाये जाने का ताव आने पर उहोंने पट कर दिया था कि ऐसी कोइ यवथा बने, जिसमें आडवाणी का मागदशन बना रहे, तभी वह इसे वीकार करेंगी।
सुषमा ने कहा कि उहें खुशी ह कि पार्टी के विधान में सशोधन कर आडवाणी को ससदीय दल का अयक्ष निवाचित कर ऐसी यवथा बनायी गयी। उहोंने कहा, ‘पदों का परिवतन जर हआ ह, लेकिन यवथा पहले जसी ही चलती रहेगी। आडवाणीजी की छछाया में म आर जेटली पहले की तरह काम करते रहेंगे।’ जेटली ने कहा कि वह आडवाणी की इस टिपणी से नहीं रखते कि अब वह जिमेदारी नहीं होने से राहत का अनुभव कर रहे ह। उहोंने कहा कि उनकी माजूदगी हमारे बीच बनी रहेगी आर इससे हमें निणय लेने में आसानी होगी।
इससे पहले बठक शुरु होने पर अयक्ष राजनाथ सिंह ने पार्टी के विधान ६ (ए) १२ में सशोधन कर आडवाणी को ससदीय दल का अयक्ष निवाचित करने का राता साफ कर दिया। उनके इस ताव को बठक में सवसमति से मजूरी दे दी गयी। इस सशोधन के साथ ही भाजपा ससदीय दल के अयक्ष को ससद के दोनों सदनों के विपक्ष के नेता, उपनेता आर मुय सचेतक चुनने का अधिकार होगा। पार्टी के वरिठ नेता एम वेंकया नायुडू ने इस ताव का अनुमोदन आर गोपीनाथ मुडे ने समथन किया। बाद में आडवाणी को अया बनाये जाने के ताव का यशवत सिहा ने अनुमोदन आर एस एस अहलूवालिया ने समथन किया।
शिये में पहच जाने की अटकलें सच नहीं बन पायीं। यह माना जा रहा था कि आडवाणी राजनीति से सयास ले लेंगे, इन सबका उहोंने अपने ही शदों में खडन करते हए कहा, ‘आज अखबारों में ऐसी सुखिया देखीं कि ‘आडवाणी युग का आज अत’ या ‘रथयाी आज रथ से उतर जाएगा’। आडवाणी ने कहा कि ‘ये न समझें कि आडवाणी युग का अत हो गया ह।’ अगर वे समझते ह कि आडवाणी सकियता छोड देंगे या आडवाणी राजनीति छोड देंगे, तो वे सब गलत ह।’ आडवाणी ने कहा कि वह १४ साल की आयु से ही रथयाी बन गये थे आर ‘अगर कोइ ये कहेगा कि आडवाणी रथ से उतर गये, तो म उसे (रथ) छोडने वाला नहीं। जीवन भर चलेगी, मेरी।’
पाकितान यात्र के दारान २००५ में जिना के बारे में टिपणी के कारण सघ परिवार के सबसे करीबी से किरकिरी बने आडवाणी तमामउतार चढाव के बावजूद अपना राजनीतिक वजूद बचाये रखने में सक्षम साबित हए। उहोंने कहा कि भाजपा ससदीय दल के अयक्ष के प में ‘मेरे जीवन आर मेरी राजनीति में एक नया अयाय शु हआ ह।’ उहोंने कहा कि नेता विपक्ष का पदभार छोडने पर वह राहत आर पूण सतुटि का अहसास कर रहे ह। राहत इसलिए कि सकिय राजनीति में रहने के बावजूद अब जवाबदेही उनकी नहीं रहेगी। सघ से अपने रितों को याद करते हए भाजपा नेता ने कहा कि अगर वह राजथान के चारक के प में सकिय नहीं होते, तो शायद आज राजनीति में नहीं होते। उहोंने आज की पीढी के राजनीतिज्ञों पर तीखी टिपणी करते हए कहा, ‘आज राजनीति में आने वाले राजनीति को ऐसा काय मानते ह, जिससे धन कमाया जा सके। ताकत बनायी जा सके आर भाव बनाया जा सके।’ उहोंने कहा, ‘लेकिन यह मानसिकता यतिगत एजेंडा ह, जबकि आजादी की लडाइ के समय राजनीतिज्ञों का ऐसा यतिगत एजेंडा नहीं हआ करता था।’
आडवाणी ने कहा कि भाजपा में यतिगत एजेंडा जितना कम होगा, पार्टी उतनी अधिक भारत की सेवा कर सकेगी। उहोंने पदों के लिए आपसी खींचतान पर परोक्ष टिपणी करते हए कहा कि राजनीति में आज रेलवे कपाटमेंट की मानसिकता बन गयी ह। साथ ही कहा कि रेल के डिबे में जितने लोग चढ जाते ह, वे चाहते ह कि बाकी लोग उसमें न घुसने पायें, भले ही उसमें सीटें खाली यों न हों। आडवाणी ने पार्टी को आगाह किया कि ऐसी वा से बचें। परिवतन के इस हर में भी आडवाणी का ‘मोदी ेम’ एक बार फिर मुखर हआ। उहोंने कहा कि आज सुबह ही उनकी मोदी से बात हइ ह। उहोंने गुजरात सरकार ारा थानीय निकायों में अनिवाय मतदान किये जाने सबधी कानून बनाये जाने की शसा की। उहोंने कहा कि वह १९७० से आज तक चुनाव सुधारों के बारे में असर सोचा करते ह। गुजरात के इस कानून को उहोंने अछा कानून बताया।
भाजपा ससदीय दल का अयक्ष निवाचित होने के बाद उहोंने सुषमा को लोकसभा आर जेटली को रायसभा में विपक्ष का नेता नियुत करने की घोषणा करने के साथ ही कहा कि दोनों सदनों में उपनेताआ आर मुय सचेतकों के बारे में वह बाद में निणय करेंगे। बाद में सुषमा ने विपक्ष का नेता नियुत किये जाने के लिए आडवाणी का आभार कट किया। सुषमा ने कहा कि नेता विपक्ष बनाये जाने का ताव आने पर उहोंने पट कर दिया था कि ऐसी कोइ यवथा बने, जिसमें आडवाणी का मागदशन बना रहे, तभी वह इसे वीकार करेंगी।
सुषमा ने कहा कि उहें खुशी ह कि पार्टी के विधान में सशोधन कर आडवाणी को ससदीय दल का अयक्ष निवाचित कर ऐसी यवथा बनायी गयी। उहोंने कहा, ‘पदों का परिवतन जर हआ ह, लेकिन यवथा पहले जसी ही चलती रहेगी। आडवाणीजी की छछाया में म आर जेटली पहले की तरह काम करते रहेंगे।’ जेटली ने कहा कि वह आडवाणी की इस टिपणी से नहीं रखते कि अब वह जिमेदारी नहीं होने से राहत का अनुभव कर रहे ह। उहोंने कहा कि उनकी माजूदगी हमारे बीच बनी रहेगी आर इससे हमें निणय लेने में आसानी होगी।
इससे पहले बठक शुरु होने पर अयक्ष राजनाथ सिंह ने पार्टी के विधान ६ (ए) १२ में सशोधन कर आडवाणी को ससदीय दल का अयक्ष निवाचित करने का राता साफ कर दिया। उनके इस ताव को बठक में सवसमति से मजूरी दे दी गयी। इस सशोधन के साथ ही भाजपा ससदीय दल के अयक्ष को ससद के दोनों सदनों के विपक्ष के नेता, उपनेता आर मुय सचेतक चुनने का अधिकार होगा। पार्टी के वरिठ नेता एम वेंकया नायुडू ने इस ताव का अनुमोदन आर गोपीनाथ मुडे ने समथन किया। बाद में आडवाणी को अया बनाये जाने के ताव का यशवत सिहा ने अनुमोदन आर एस एस अहलूवालिया ने समथन किया।
