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अदालत का सज्जन को राहत देने से इंकार

Swatantra Vaartha  Fri, 19 Feb 2010, IST

अदालत का सज्जन को राहत देने से इंकार

नई दिल्ली। वर्ष १९८४ के सिख विरोधी दंगों के मामले में गिरफ्तारी के संकट का सामना कर रहे कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने अंतरिम राहत देने से आज इंकार कर दिया।

न्यायमूर्ति एके पटनायक ने कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया कि नेता को गिरफ्तार करने से सीबीआई को सोमवार तक के लिये रोका जाये।

कुमार की ओर से हाजिर वकील आईयू खान ने दलील दी थी कि उच्च न्यायालय को सीबीआई को नेता को गिरफ्तार करने से रोकना चाहिये, क्योंकि मामला अदालत में लंबित है। उन्होंने दलील दी कि मामले में कुमार को गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है और पीठ जब तक उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला न कर ले, तब तक उच्च न्यायालय को उन्हें यह राहत देनी चाहिये। न्यायमूर्ति पाठक के कल (१९ फरवरी) को अवकाश पर रहने के चलते इस मामले की सुनवाई अब सोमवार को होगी। इस अवधि के दौरान सीबीआई के कुमार को गिरफ्तार कर लेने की संभावना बरकरार है। सुनवाई अदालत के कुमार को अग्रिम जमानत देने से इंकार करने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय में यह याचिका कल सुनवाई के लिये आयी थी, लेकिन न्यायमूर्ति एसएल भायाना ने सुनवाई न्यायमूर्ति पाठक की नियमित पीठ के समक्ष करने के लिये कार्यवाही मुल्तवी कर दी।

मूल रूप से न्यायमूर्ति पाठक की पीठ में ही इस याचिका पर सुनवाई होनी थी। बहरहाल, सुनवाई अदालत में कुमार के गैरहाजिर होने के चलते अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट लोकेश कुमार शर्मा ने नेता के खिलाफ गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इसके बाद उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होने से पहले सीबीआई के कुमार को गिरफ्तार कर लेने की संभावना उत्पन्न हो गयी। वर्ष १९८४ के दंगों के दो पृथक मामलों में सीबीआई ने गत १३ जनवरी को कुमार सहित १३ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भ़डकाऊ भाषण किये जिसके चलते हिंसा में १२ लोगों की मौत हो गयी। जांच एजेंसी ने वर्ष २००५ में नानावटी आयोग की सिफारिश पर मामला दर्ज किया था। अपनी जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किये थे।

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