गडकरी ने कार्यकर्ताआें में विश्वास पैदा किया : आडवाणी
नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का मानना है कि नये अध्यक्ष नितिन गडकरी को लेकर पार्टी में उम्मीद जगी है कि गडकरी पार्टी को वह सब कुछ दे पाएंगे, जिसकी अभी भाजपा को जरूरत है।
आडवाणी ने कहा कि इंदौर में जब प्रतिनिधि एकत्र होना शुरू हुए, तो सबके चेहरे पर एक सवाल साफ देखा जा सकता था। यह सवाल था ‘क्या २००४ और २००९ के लोकसभा चुनाव हारने के बाद निराश पार्टी कार्यकर्ताआें के मन में ५२ वर्षीय गडकरी उत्साह और विश्वास का संचार कर पाएंगे, इन तीन दिनों में मतभेदों को दूर होते हुए देखा है। तीसरे दिन जब प्रतिनिधि इंदौर से रवाना हुए, तो उनके सवाल, संदेह सब दूर हो चुक थे और उनकी जगह अपूर्व उत्साह था।’
इंदौर में १७ से १९ फरवरी तक भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक संपन्न हुई है। आडवाणी ने अपने ब्लाग में लिखा है ‘१९५१ में डॉमुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। हममें से जो लोग आज भाजपा में हैं और जिन्होंने वह दौर देखा है, वह सभी लोग डॉमुखर्जी की विचारधारा की ओर आकृष्ट हो गये और इस तरह १९५१ में हमारी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई। १९७७ से १९८० की तीन वर्षीय अल्पावधि को छ़ोड दें, तो यह यात्रा आज तक जारी है।’ पूर्व गृहमंत्री आडवाणी ने लिखा है कि भाजपा जल्द ही विपक्ष की हाशिये वाली पार्टी से राष्ट्रीय राजनीति के दो प्रमुख ध्रुवों में से एक में तब्दील हो गई। आज हम संसद में मुख्य विपक्षी दल हैं। देश के नौ राज्यों में हमारी सरकार है। इनमें से छह में हमारी अपनी सरकार और तीन में राजग की यानी गठबंधन सरकार है। इंदौर आडवाणी के लिए खास महत्व रखता है। ब्लाग में उन्होंने लिखा है कि उनका जन्म सिंध में हुआ और वहां वह २० साल की उम्र तक रहे। उन्होंने लिखा है ‘१९५३ में मेरी उम्र १६ साल थी। तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षण शिविर के लिए मैं इंदौर गया था। यह सिंध के बाहर मेरा पहला प्रवास था। मेरे लिए इंदौर से इंदौर की ६७ साल की यात्रा बहुत रोमांचक है।’
आडवाणी ने लिखा है ‘पिछले दो दशक में हमने पार्टी को फर्श से अर्श तक ब़ढते देखा। १९८४ में भाजपा अपने राजनीतिक करिअर के बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंच गई। पूरे देश में उसे केवल दो लोकसभा सीटें मिलीं।’ उन्होंने लिखा है ‘पांच साल बाद १९८९ में पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर उभरी। अयोध्या आंदोलन ने हमें हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति में वर्चस्व रखने वाली कांग्रेस को शिकस्त देने में तथा दो ध्रुवीय राजनीति के उत्कर्ष में मदद की।
