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हैदराबाद में श्रीकृष्णा समिति की बैठक पांच को संभव

Swatantra Vaartha  Fri, 26 Feb 2010, IST

हैदराबाद में श्रीकृष्णा समिति की बैठक पांच को संभव

नई दिल्ली। पृथक तेलंगाना राज्य की मांग का अध्ययन करने के लिये न्यायमूर्ति बीएनश्रीकृष्णा की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति संभवत: पांच मार्च को हैदराबाद में आंध्र प्रदेश के राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचारविशर्म करेगी। न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने यहां समिति की दूसरी बैठक के बाद संवाददाताआें से बातचीत करते हुये उम्मीद जताई और कहा कि आंध्र प्रदेश के सभी वगो] से बातचीत करने के बाद इस समस्या का स्वीकारयोग्य समाधान निकल आयेगा।

बैठक के बारे में उन्होंने बताया कि यह बहुत अच्छी रही और कई मुद्दों पर चर्चा की गयी। समिति के सभी सदस्य जल्द ही मार्च के पहले सप्ताह में हैदराबाद का दौरा करेंगे। इस दौरे के दौरान समिति इस मामले से संबंधित सभीमहत्वपूर्ण व्यक्तियों और संगठनों के साथ विचारविमर्श करके उनके मत को जानेगी। न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने कहा कि समिति को विभिन्न संगठनों और व्यैक्तिक तौर से ज्ञापन प्राप्त हो रहे हैं। समिति ने उनकी समीक्षा भी प्रारंभ कर दी है।

तेलंगाना समर्थकों द्वारा समिति के कार्यक्षेत्र में संशोधन की मांग पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुये न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने कहा कि इस बारे में एक मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। उन्हें फैसला लेना है।

उन्होंने कहा कि समिति अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार अगले दो महीने तक आंध्र प्रदेश में सभी वगो] से विचारविमर्श करेगी। लोगों के विचार को जानने के बाद समिति समीक्षा करेगी और वह ऐसे नतीजे पर पहुंच सकती है, जो सभी लोगों को स्वीकार हो सकता है।

समिति की कानूनी वैधता के सवाल पर न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने कहा कि इस बारे में उन्हें मालूम नहीं है। उनकी केवल काम करने में दिलचस्पी है।

समिति के सदस्य सचिव एवं पूर्व गृह सचिव विनोद कुमार दुग्गल ने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव ने उन्हें और समिति के अन्य सदस्यों के बारे में सूचित कर दिया है और यह एक वास्तविक अधिसूचना है। तेलंगाना समर्थकों द्वारा समिति का विरोध करने के बारे में न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने कहा कि देश में ऐसी कोई समिति नहीं हुई, जिसका विरोध नहीं हुआ है। तेलंगाना क्षेत्र के कुछ कांग्रेसी सांसदों ने आरोप लगाया है कि श्रीकृष्णा राज्य के विभाजन के पक्ष में नहीं हैं।

इस पर उन्होंने कहा कि ऐसे आरोपों का सामना महात्मा गांधी को भी करना प़डा था। मैं तो कुछ भी नहीं हूं।दुग्गल ने बताया कि वह और समिति के एक अन्य सदस्य डॉरणबीर सिंह आंध्र प्रदेश को विभाजित कर पृथक तेलंगाना की मांग का अध्ययन करते वक्त ऐतिहासिक, संवैधानिक, राजनीतिक और कानूनी पहलुआें पर ध्यान देंगे, जबकि अन्य सदस्य अबू सालेह शरीफ और सुश्री रविंदर कौर आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुआें को देखेंगी।समिति को प्राप्त ज्ञापनों के बारे में न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने कहा कि समिति को पृथक तेलंगाना राज्य के गठन और विरोध में कुछ ज्ञापन मिले हैं।

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