ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या तेलंगाना मामला केन्द्र सरकार के गले की हड्‍डी बन गया है?

  • हाँ
  • नहीं
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

विज्ञापन व प्रचार की सरकार है नीतीश सरकार : गिरीश संघी

Swatantra Vaartha  Tue, 9 Mar 2010, IST

advisement nitiesh goverments, sanghiविज्ञापन व प्रचार की सरकार है नीतीश सरकार : गिरीश संघी

पटना। कांग्रेस के लिए ‘जयघोष’ बटोरती सांसद व चुनाव प्रभारी डॉ गिरीश संघी की रथयात्रा, नीतीशलालू के खिलाफ जनता की मुनादी है। बिहारियों की कांग्रेस खातिर इस दुलार की अपेक्षा डॉ संघी को भी नहीं थी। भ़ीड और उसके ‘रिस्पांस’ से उत्साहित डॉ संघी का दावा रहा‘इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जय होनी ही है।’

असल में रथयात्रा जिधर से भी गुजर रही है, विगत दो दशक से बिहार के रहनुमा बने लोगों के लिए कईकई सवाल छ़ोड जा रही है। साफ दिख रहा है कि लोग लालूनीतीश से कितने परेशान रहे हैं और कैसे बेहतर विकल्प को त़डफ़डाये हुए हैं। रथयात्रा से राजनीतिक गलियारे में ह़डकंप है। आमलोग इस बात से ज्यादा खुश हैं कि कांग्रेस ने अरसे बाद इस कदर खुद को बेहतर विकल्प के रूप में पेश किया है। अभी तक बिहार में कांग्रेस के बारे में यही धारणा थी कि वह ‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ करती है। डॉ संघी उसे खुले में ले आये हैं। यात्रा के मात्र दो दिन के अनुभव से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा इतने उत्साहित हैं कि उन्होंने कहा‘हम सब संघी साहब के इस एहसान को कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने बिहार में कांग्रेस को नये सिरे से ख़डा किया है।’

रथयात्रा के दौरान डॉ संघी गांवगांव यह संदेश फैला रहे हैं कि उनकी राजनीतिक परिवर्तन की यह मुहिम तभी रुकेगी, जब कांग्रेसी मंत्रिमंडल पटना के गांधी मैदान मे शपथ लेगी। वे ब़डे करीने से एक स्थान की भ़ीड के मूड को दूसरे स्थलों पर शेयर करते हैं। विशेषकर कांग्रेसी जमात तो बौरासी गयी है। जनता का उत्साह स्थानीय स्तर पर कांग्रेसियों के बीच कायम खींचतान को भी खत्म करने में मददगार है। डॉसंघी कांग्रेसियों को समझाते हैं‘बताइये, क्या आप पब्लिक के इस तरह के रिस्पांस को अपने मामूली स्वार्थ एवं लंग़डीमारी में खत्म कर देंगे? कांग्रेस के लिए अभी से अधिक मुनासिब वक्त कभी नहीं आयेगा। सभी मिलकर जोर लगाइये, नीतीशमोदी की सरकार की विदाई तय है।’

डॉ संघी का काफिला आज सुबह भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया से रवाना हुआ। करमौनी, डोभी, पिपरघट्टी, शेरघाटी, दमजापुर, चंडी स्थान, आमस (गया) होते हुए औरंगाबाद के मदनपुर में प्रवेश किया। औरंगाबाद के रमेश चौक पर ब़डी सभा हुई। काफिला आगे ब़ढा। संतुआ के बाद इसने कैमूर जिले में प्रवेश किया। कुदरा के बाद डेहरी आन सोन में ब़डी सभा हुई। ताराचंडी में छोटी, तो मोहनिया में ब़डी सभा। गया में कांग्रेस जिलाध्यक्ष सिराजुद्दीन रहमानी, औरंगाबाद के जिलाध्यक्ष यमुना सिंह, रोहतास की जिलाध्यक्ष प्रमिला देवी आदि इन सभाआें में साथ रहीं। डॉ संघी के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉशकील अहमद खां, पूर्व मंत्री डॉ अशोक चौधरी, पूर्व सांसद विजय सिंह यादव, पूर्व विधायक जय कुमार पालित आदि हैं।

डॉ संघी उदाहरणों के हवाले आमलोगों को समझा रहे हैं कि ‘आखिर वे क्यों पिछ़डे हुए हैं? उनकी दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है?’ उन्होंने गया जिले के एक स्थान पर बस में बोरों की तरह ठूंसे यात्रियों को देखा और फिर जनता को इसे दिखा, लगे दूसरे राज्यों से बिहार की तुलना करने। लोगों से उनका सवाल था, ‘बताइये, कहीं ऐसे यात्रा होती है? पैसेंजर बस के बाहर हैं। यह बिहार के अविकास का प्रतीक भर है। लगभग सभी क्षेत्रों में यही स्थिति है।’ उन्होंने बिजली के मामले में जब आंध्र प्रदेश से बिहार की तुलना की, तो सुनने वाले हतप्रभ रह गये।

कमोवेश सभी स्थानों पर डॉ संघी बिहार की दुर्गति और इसमें लालू प्रसाद, राब़डी देवी, नीतीश कुमार आदि की जिम्मेदारी को चिह्नित करते हुए आम लोगों से सवाल करते रहे ‘यह सब कुछ जानने के बाद भी आप लोग उनको वोट देंगे? गंभीरता से सोचिये और फिर मुझे बताइये।’ भ़ीड थ़ोडी देर चुप रहने के बाद ‘नहींनहीं’ बोलने लगती थी।

सभाआें को संबोधित करते हुए डॉ संघी ने कहा कि यह सरकार विज्ञापन और प्रचार की सरकार है। दस हजार से अधिक घोषणाएं हो चुकी हैं। लगभग ९० अरब की योजनाआें का शिलान्यास कर दिया गया है और रुपये का ठिकाना नहीं। यह ठगी नहीं तो और क्या है? नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में ‘कोसी प्रलय’ के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहरायाहै। सरकार चुप्पी साधे है। क्यों? डॉसंघी के अनुसार पांच साल कम नहीं होते हैं। आप लोग ही बतायें कि क्या आप इस सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं?

उनका आरोप रहा कि सुशासन की दावेदार सरकार के पांच वर्ष कागजी कार्यकलापों में गुजर गये। कुछ लोग मजे में आइडिया की खेती करते रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं को ‘सीईओ’ (चीफ एक्जिक्यूटिव आफिसर) के रूप में पेश किया। उन्होंने ब़डीब़डी बातें कहीं। बिहार की रीब्रांडिंग की बात हुई। एमओयू खूब साईन हुए। आयोग, रिपोर्ट कार्ड, टास्क फोर्स, रोडमैप, कंसलटेंट, पावर प्रेजेंटेशन, डेवलपमेंट माडल, विकासपरक शब्दों की भरमार है। लेकिन इन सबका नतीजा क्या निकला? एक भी ब़डा निवेशक निवेश करने नहीं आया। क्यों नहीं आया? आप लोगों ने कभी सोचा है?

डॉ संघी कहा कहना था कि यह सरकार सही बीपीएल सूची तक नहीं बना सकी है, जबकि गरीबों के कल्याण, उनके उद्धार के लिए यह बुनियादी जरूरत है। सिर्फ गरीबों की बात करने से कुछ नहीं होगा। वास्तव में उनके लिए कुछ करना होगा। उनका सवाल था ‘यह सरकार ऐसा कुछ कर रही है? अब तो मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी मामले नहीं निपट रहे हैं। आप लोग जनता दरबार में गये होंगे। बताइये, आपकी समस्याआें का फौरन निदान होता है? हमने तो सुना है कि शिकायत करने वालों पर ही मुकदमे हो रहे हैं।’

डॉ संघी ने सवालिया लहजे में कहा, ‘क्या घूस का रेट नहीं ब़ढा है? विजिलेंस ताब़डत़ोड रिश्वतखोरों को गिरफ्तार कर रहा है, पर भ्रष्टाचार की ज़ड पर हमला नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ? शुरू में स्पीडी ट्रायल का असर दिखा। मगर क्या रूटीन अपराध का ग्राफ नहीं ब़ढा है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वोट के चक्कर में सामाजिक तानाबाना को ध्वस्त कर दिया है। और सबसे मजेदार कि वे समरस समाज की भी बात कहते हैं। आखिर वे ‘महादलित कार्ड’ क्यों खेल रहे हैं?

डॉ संघी ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार की कथनी और करनी में कोई साम्य नहीं है। वे अक्सर कहते रहे हैं कि ‘अगर जनता से किया गया वायदा पूरा न हुआ, तो माफी मांग कर घर बैठ जाऊंगा, वोट मांगने नहीं जाऊंगा।’ क्या इस बार वे वाकई वोट मांगने नहीं आयेंगे, क्योंकि विकास तो हुआ नहीं है।

आपकी राय