मुस्लिम आरक्षण मामले की सुनवाई २२ मार्च को
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को चार फीसदी आरक्षण देने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से बनाए गए कानून को निरस्त करने के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर २२ मार्च को सुनवाई करने का आज फैसला किया।
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के सात न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने ५:२ के बहुमत के फैसले में राज्य में पिछ़डे वर्ग के मुसलमानों को चार फीसदी आरक्षण प्रदान करने वाले कानून को संविधान के अनुच्छेद १४, अनुच्छेद १५ (१) और अनुच्छेद १६ (२) का उल्लंघन करार दिया था। अटार्नी जनरल जीईवाहनवती ने आंध्र प्रदेश सरकार की तरफ से प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपील का उल्लेख किया और इसपर तत्काल सुनवाई किए जाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा महत्वपूर्ण है और इसपर कुछ बहस की आवश्यकता है। हालांकि, इस निवेदन का वरिष्ठ अधिवक्ता रविशंकर प्रसाद ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि अपील पर तत्काल सुनवाई करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार ने धार्मिक आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने की परिकल्पना की है। प्रसाद उन लोगों का उच्चतम न्यायालय में प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जिनकी याचिका पर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछ़डे वर्ग के मुसलमानों को आरक्षण प्रदान करने वाले २००७ के कानून को बरकरार नहीं रखने लायक करार दिया था।
