जलवायु सबधी समझाते से कोइ सतु नहीं : मनमोहन
ितवनतपुरम, ३ जनवरी (भाषा)। धानमी डामनमोहन िसंह ने आज कहा कि कोपेनहेगन शिखर वाता ने सीमित गित की आर पिरणामों से कोइ भी सतुट नहीं रहा। उहोंने कहा िक गीनहाउस गसों के उसजन में कमी का राता ही एक मा विकप ह आर भारत को इससे पीछे नहीं रहना चाहिए। ९७वें भारतीय विज्ञान कागेस का उदघाटन करते हए डामनमोहन सिंह ने माना कि पिछले महीने की जलवायु शिखरवाता के नतीजों में उसजन कटाती आर जवाबदेही को लेकर तीखे मतभेद देखे गये, जिससे कोइ सतुट नहीं हआ।
हालाकि उहोंने कहा कि भारत को जलवायु हितषी ााेगिकियों में वविक नेताआें के शामिल होने की आकाक्षा रखनी चाहिए। उहोंने कहा, ‘हमने कोपेनहेगन शिखरवाता में सीमित गति की आर नतीजों से कोइ सतुट नहीं था।’
डेनमाक की राजधानी कोपनहेगन में आयोजित १२ दिवसीय शिखरवाता के समापन के माके पर १०० से अधिक वविक नेताआें के साथ शामिल होने वाले श्री सिंह ने कहा कि राट बडी ऊजा क्षमता आर अक्षय ऊजा ाेतों की ओर बढने के लिए रणनीति तयार कर रहे ह। उहोंने कहा कि भारत को इन क्षेाें में पीछे नहीं रहना चाहिए। धानमी ने कहा, ‘वातव में हमें कटाती आर जलवायु परितवन पर अनुकूलन से सबधित विज्ञान एव ााेगिकी के विकास में नेताआें के बीच रहना चाहिए। इन ााेगिकियों के लिए बाजार केवल भारत नहीं ह। यह पूरी दुनिया ह।’ श्री सिंह ने कहा कि भारत के सामने खा सुरक्षा आर रोग नियण की चुनातिया ह, लेकिन जलवायु परितवन आर इसके भाव देश के सामने नयी चुनातिया पेश कर रहे ।
उहोंने कहा कि जलवायु परिवतन ऐसी समया ह, जो मानवजाति के ज्ञान आर बु को चुनाती दे रही ह। उहोंने कहा कि भारत अब जलवायु परिवतन आर हमारे विपुल जल भडारों के बधन की नयी चुनातियों का सामना कर रहा ह। धानमी ने परमाणु आर सार ऊजा जसी वछ आपूति के लिए ऊजा क्षे में बडी भागीदारी पर जोर दिया। उहोंने कहा, ‘जहा तक ऊजा की बात ह, अक्षय आर वछ ऊजा आपूतियों की बडी भूमिका की जरत होगी।’ परमाणु ऊजा के मामले में उहोंने विवास जताया कि परमाणु आपूतिकता समूह ारा पिछले साल इधन पाबदियों में ऐतिहासिक छूट से भारत को एक वरित परमाणु ऊजा विकास कायकम को तयार करने में मदद मिलेगी।
