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दबाव में हु आ रुचिका का स्कूल से निकासन

swatantravartha  Fri, 8 Jan 2010, IST

दबाव में हु आ रुचिका का स्कूल से निकासन

चडीगढ। रुचिका छेडछाड मामले में की गयी एक यायिक जाच में आज सकेत दिया गया ह कि थानीय सकेड हाट कूल ने हरियाणा के पूव पुलिस महानिदेशक के खिलाफ छेडछाड की शिकायत के तकाल बाद गलत तरीके आर दुभावनापूण तरीके से किशोरी छाा को निकासित कर दिया था।

एसपीएस राठार के खिलाफ ताजा जाच पर इस रिपोट का असर पडने की पूरी सभावना है ।

जाच रिपोट के अनुसार हालाकि राठार का इस निकासन में सीधा हाथ होने के सबूत नहीं ह, लेकिन इस मामले में पके परिथितिजय सबूत है , योंकि छेडछाड की घटना के तकाल बाद छाा को निकासित कर दिया गया था। इसमें कहा गया ह, ‘फीस के भुगतान के बजाय कुछ अय कारकों के चलते चिका (गिरहाेा) का निकासन हआ।’ उपसभागीय मजिटेट ेरणा पुरी ारा की गयी जाच के नतीजों को जारी करते हए शिक्षा तथा गह सचिव रामनिवास ने सवाददाता को बताया, ‘अल से सितबर, १९९० के बीच फीस का भुगतान नहीं करने के कारण चिका के निकासन के मामले में बाहरी असर था।

उस समय छकी आयु १४ वष थी आर वह कक्षा ना में अययनरत थी।’पुलिस ने राठाड (६७) पर हाल में दज ताजाथमिकी में अय आरोपों के अलावा आमहया के लिए उकसाने का आरोप लगाया ह। गारतलब ह कि चिका ने १९९० में छेडछाड के तीन साल बाद आमहया कर ली थी। निवास ने कहा, ‘हालाकि १९८७ से २००२ के दारान फीस का भुगतान नहीं कर पाने के १३५ अय मामले थे, लेकिन केवल चिका के मामले में ही कारवाइ की गयी। सिफ उसके साथ ऐसा किया गया। चिका के खिलाफ कारवाइ करने के लिए बाहरी दबाव था।’ रिपोट में कहा गया, ‘कूल की कारवाइ भेदभावकारी, गलत, मनमाना आर दुभावना से ेरित थी।’ निवास ने कहा कि राठार की पुी यािजलि भी १९९०९१ के दारान दो बार फीस का भुगतान कर पाने में असफल रही थी, लेकिन उसे निकासित नहीं किया गया। उस साल के दारान फीस का भुगतान नहीं कर पाने के १७ मामले थे, लेकिन किसी को भी कूल से निकासित नहीं किया गया। उहोंने कहा कि चार तरों पर इस मामले पर गार किया जा रहा ह, जिसमें सबसे पहला मामला कावेंट कूल के बधक को कूल की धानाचाय सिटर सेबेटिना के खिलाफ कारवाइ के लिए रिपोट भेजने का ह, जिहोंने मनमाने आर गलत तरीके से कारवाइ की। उहोंने कहा कि सिटर सेबेटिना तब आर आज भी कूल की धानाचाय ।

उहोंने कहा कि शासन को उमीद ह कि उनके खिलाफ तकाल कारवाइ की जाएगी। उहोंने कहा कि चडीगढ शासन ने भी धानाचाय को शिक्षा के क्षे में दिये गये उलेखनीय योगदान के लिए दिये समान को वापस लेने का फसला किया ह। यह पुरकार उहें २००५ में दिया गया था।

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