कोली की फासी की सजा पर रोक
नइ दिली । उतम यायालय ने निठारी हयाकाड के मुय अभियुत सुरिदर कोली को सुनाइ गइ मात की सजा पर आज रोक लगा दी। कोली ने दलील दी कि मकान का मालिक होने के नाते सह अभियु मोनिंदर सिंह पढेर पर यादा जिमेदारी थी, लेकिन उसे बरी कर दिया गया।
कोली ने कहा कि जिस मकान में बलाकार आर जघय सिलसिलेवार हया की घटनाए हइ, उसका मालिक होने के नाते पढेर पर यादा जिमेदारी थी, लेकिन उसे बरी कर दिया गया, इसलिए वह भी बरी किए जाने का हकदार ह। उसने यह भी दावा किया कि उसे दोषी ठहराया जाना पूरी तरह परिथितिजय सायों पर आधारित था। अपने अधिवा सुशील बलवाडा के जरिए दायर अपील में कोली ने कहा, चूकि उ यायालय ने इस तय को समझने में गलती की कि याचिकाकता (कोली) की थिति बरी किए गए सह अभियु (पढेर) की तुलना में बेहतर थी।’ उहोंने कहा, ‘अभियोजन पक्ष के अनुसार जिस मकान में अपराध हआ, वह मकान सह अभियु का था आर अपने नाकरों के मामले में मकान मालिक की यादा जिमेदारी ह। इन परिथितियों में सदेह का लाभ याचिकाकता को भी दिया जाना चाहिए था।’
गाजियाबाद की स अदालत ने १३ फरवरी, २००९ को कोली के साथ पढेर को मात की सजा सुनाइ थी, लेकिन इलाहाबाद उ यायालय ने पढेर को बरी कर दिया, जबकि दिसबर, २००६ में काश में आए इस जघय हयाकाड के मामले में नाकर कोली को सुनाइ गइ मात की सजा की पु कर दी थी।कोली ने कहा कि मकान का मालिक होने के नाते मकान से ककालों की बरामदगी के बारे में पढेर को बताना चाहिए। अपील में कहा गया, ‘उ यायालय इस बात को समझने में नाकाम रहा कि याचिकाकता मकान का मालिक नहीं ह आर शवों के बारे में पीकरण देने की जिमेदारी याचिकाकता की बजाय मकान का मालिक होने के नाते सह अभियु पर थी।’
याचिकाकता ने दावा किया कि उसके खिलाफ कोइ यक्ष साय नहीं था आर पुलिस के समक्ष दिया गया इकबालिया बयान सबूत के तार पर वीकाय नहीं ह, इसलिए दोषी ठहराया जाना नहीं टिकता। कोली ने यह भी दावा किया कि निठारी हयाकाड दुलभतम मामलों में नहीं आता, जिसके लिए मात की सजा जरी ह। कोली के अनुसार उसे दोषी ठहराया जाना किसी ठोस सबूत पर आधारित नहीं था, बकि परिथितिजय सबूतों पर आधारित था, योंकि अभियोजन पक्ष बिना किसी शक के उसके अपराध को साबित करने में विफल रहा। करीब तीन साल पहले निठारी हयाकाड के काश में आने के बाद देशभर में इस पर काफी हगामा हआ था। कोली को १३ फरवरी, २००९ को विशेष सीबीआइ अदालत ने १४ वर्षीय रिपा हलधर बलाकार आर हयाकाड में दोषी ठहराते हए मात की सजा सुनाइ थी। वह निठारी हयाकाड का शिकार हइ लडकियों आर महिलाआ में से एक थी।धान यायाधीश केजीबालकणन आर यायमूति बीएसचाहान की पीठ ने कोली को सुनाइ गइ मात की सजा पर रोक लगाते हए कोली की अपील पर सीबीआइ आर उार देश सरकार से जवाब मागा। कोली के साथसाथ स अदालत ने पढेर को भी मात की सजा सुनाइ थी। इलाहाबाद उ यायालय ने हालाकि ११ सितबर, २००९ को पढेर को आरोप मु कर दिया था, जबकि कोली को सुनाइ गइ मात की सजा की पु कर दी थी। उ यायालय के फसले से असतु कोली ने मात की सजा के खिलाफ उतम यायालय में अपील दायर की थी।
