खाद्य मुद्रास्फीति एक अंकीय हुई
नई दिल्ली,)। सब्जियों के दाम नीचे आने और पिछले साल का तुलनात्मक आधार ऊंचा होने की वजह से इस साल पहली बार खाद्य मुद्रास्फीति की दर दहाई से नीचे उतर कर एक अंकीय हो गयी है। १७ जुलाई को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति ९६७ प्रतिशत रह गई।
इससे एक सप्ताह पहले की तुलना में इसमें २८० प्रतिशत अंक की गिरावट आई। इस बीच, खाद्यान्नों और ईंधन मूल्यों में वृद्धि को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है और महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष ने दो दिन से संसद की कारवाई ठप कर रखी है। खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गयी। हालांकि प्राथमिक वस्तुआें पर आधारित मुद्रास्फीति अभी भी १४५० प्रतिशत पर बनी हुई है। सरकारी आक़डों के अनुसार सब्जियों विशेषकर आलू और प्याज के दाम घटने से खाद्य मुद्रास्फीति एक सप्ताह पहले के १२४७ प्रतिशत से घटकर ९६७ प्रतिशत रह गई। हालांकि पिछले साल इसी सप्ताह के दौरान इस वर्ग में मुद्रास्फीति १५५० प्रतिशत के उच्चस्तर पर थी, तुलनात्मक आधार ऊंचा होने की वजह से भी इसमें ब़डी गिरावट दर्ज की गई। मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने कहा कि यह स्वागत योग्य समाचार है, जैसी मुझे उम्मीद थी, उसी के अनुरूप मुद्रास्फीति नीचे आई है, बहरहाल इसकी ब़ढाच़ढाकर व्याख्या करने की जरूरत नहीं है।
उधर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर जयती घोष ने कहा कि यह गिरावट मुख्यत ऊंचे तुलनात्मक आधार की वजह से है। मानसून की प्रगति और खेती उत्पादकता ब़ढने के साथ आने वाले दिनों में इसमें और गिरावट की उम्मीद है। दस प्रतिशत से नीचे उतरी खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर सरकार राहत महसूस कर सकती है, लेकिन सरकारी आंक़डों के अनुसार पिछले साल की तुलना में दालदलहन के दाम अभी भी २१२३ प्रतिशत, दूध १९०३ प्रतिशत और फलों के दाम १२१४ प्रतिशत तक ऊंचे हैं।
