जम्मूकश्मीर पर भारत की संवेदनाआे का सम्मान करे चीन : कृष्णा
मुंबई। भारतीय हिस्से वाले कश्मीर के बारे में चीन की टिप्पणी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने आज बीजिंग से कहा कि वह जम्मूकश्मीर पर भारत की संवेदनशीलता का सम्मान करे, जो उनके देश का अभिन्न अंग है।
चीन द्वारा जम्मूकश्मीर को ‘भारत नियंत्रित कश्मीर’ और गिलगितबाल्टिस्तान को ‘पाकिस्तान का उत्तरी भाग’ बताने संबंधी आपत्तिजनक टिप्पणी के एक दिन बाद कृष्णा ने आज कहा, ‘मुझे आशा है कि चीन की सरकार जम्मूकश्मीर पर हमारी संवेदनाआें का सम्मान करेगी।’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘जम्मूकश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इस मुद्दे पर चीन के प्रवक्ता द्वारा टिप्पणियों पर हमने गहरी चिंता जताई है।’ इससे पहले कृष्णा ने वर्ष २००८ में आतंकी हमले का निशाना बने ताज होटल का दौरा किया। ताज होटल को सिर्फ मुंबई नहीं, बल्कि पूरे देश का ऐतिहासिक स्थान बताते हुए कृष्णा ने कहा, द्ग२६/११ हमले में जान गंवाने वालों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए हम यहां आए हैं।द्
उधर, पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर क्षेत्र (पीओके) के गिलगितबल्तिस्तान में चीनी सैनिकों की द्गगतिविधि और मौजूदगीद्ध पर भारत ने चीन को अपनी चिंता से आज अवगत कराया। गौरतलब है कि द्गन्यूयार्क टाइम्सद्ध ने अपनी एक खबर में दावा किया था कि इस क्षेत्र में चीन के ११,००० सैनिक मौजूद हैं। प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से मिलकर दिल्ली से लौटने के बाद चीन में भारत के राजदूत एसजयशंकर ने भारत की चिंताआें से अवगत कराने के लिए चीन के उपविदेश मंत्री झांग झिजुन से भेंट की।
भारतीय दूतावास के सूत्रों ने यहां बताया कि चीनी मंत्री ने जयशंकर को बताया कि चीनी सैनिक वहां ब़ाढ प्रभावित लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए पीओके में मौजूद हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों से ज़ुडे कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की, लेकिन उसका ब्यौरा देने से इंकार कर दिया। पीओके में चीनी सेना की मौजूदगी के संबंध में द्गन्यूयार्क टाइम्सद्ध में आयी रिपोर्ट के बाद भारत ने कहा था कि वह इस बात के सत्यापन में जुटा है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने यह भी कहा, द्गयदि यह सच है,स तो गंभीर चिंता का विषय है। हम राष्ट्र की सुरक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, करेंगे।द्ध यह रिपोर्ट चीन द्वारा भारत के खिलाफ एक के बाद एक असहज कार्रवाई को प्रदर्शित करती है। हाल ही उसने सेना के उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल को इस आधार पर वीजा देने से इंकार कर दिया था कि वह जम्मूकश्मीर में सैनिकों की अगुवाई करते हैं, जो उसकी नजर में विवादित क्षेत्र है।
हालांकि भारत ने पहले ही चीन के साथ रक्षा विनिमय पर विराम लगा दिया है, लेकिन चीन का कहना है कि उसे भारत से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है और उसका भारत के साथ रक्षा सहयोग यथावत है।
