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सुप्रीम कोर्ट की पूण पीठ करेगी हाइकोट के फसले पर िवचार बालाक्र्ष्ण

Swatantra Vaartha  Thu, 14 Jan 2010, IST

सुप्रीम कोर्ट की पूण पीठ करेगी हाइकोट के फसले पर िवचार बालाक्र्ष्ण

नइ िदली,। भारत के धान यायाधीश केजीबालाकणन ने आज कहा कि उचतम यायालय की पूण पीठ दिली उच यायालय के फसले के भावों पर विचार करेगी, जिसने कहा ह कि धान यायाधीश का पद सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आता ह। उहोंने हालाकि इस सबध में आर कोइ टिपणी करने से यह कहते हए इकार कर दिया कि उहोंने अभी उच यायालय का फसला पढा नहीं ह आर केवल समाचारपों में काशित रिपोटे] ही देखी ह।

आज सेवानिवा हो रहे यायाधीश तण चटर्जी के समान में उचतम यायालय में आयोजित एक विदाइ समारोह से इतर यायाधीश बालाकणन ने सवाददाताआें से कहा, ‘अभी तक मने फसला नहीं देखा ह। मुझे इसे देखने दें। अभी तक मने केवल आपकी महवपूण रिपोटे] ही देखी ह। गारतलब ह कि दिली उच यायालय के मुय यायाधीश एपीशाह की अयक्षता वाली एक तीन सदयीय पीठ ने अपने महवपूण फसले में कहा ह कि भारत के धान यायाधीश का पद सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में आता ह।

उचतम यायालय ने इस फसले के खिलाफ अपील करने का फसला किया ह। यह फसला यायाधीश बालाकणन के लिए एक झटका ह, जो लगातार यह कहते आ रहे ह कि भारत के धान यायाधीश पद को इस पारदर्शी कानून के दायरे में नहीं लाया जा सकता। अदालत की वहद पीठ ने एकल पीठ के इस फसले को भी सही ठहराया, जिसमें कहा गया ह कि उचतम यायालय की रजिटी तथा भारत के धान यायाधीश के पद को अलगअलग अग नहीं कहा जा सकता।

उच यायालय ने उचतम यायालय के इस विचार को भी खारिज कर दिया कि भारत के धान यायाधीश के पद को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत लाने से यायिक वतता ‘बाधित’ होगी। साथ ही कहा कि उचतम यायपालिका को पारदर्शी कानून से आखें नहीं चुराना चाहिए। उच यायालय ने कहा कि यायिक वतता किसी यायाधीश का विशेषाधिकार नहीं, बकि एक जिमेदारी ह।

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