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महगाइ रोकने के िलए दूसरी हिरत काति जरी

Swatantra Vaartha  Tue, 26 Jan 2010, IST

महगाइ रोकने के िलए दूसरी हिरत काति जरी

नइि दली । राष्टपती पितभा पाटिल ने अनाज की घटती उपलधता आर उनके बढते दामों पर चिंता जताते हए दूसरी हरित काति की दिशा में तुरत कदम उठाने की आज जरत बताइ।

गणत दिवस की पूव सया पर राट के नाम अपने सबोधन में राटपति ने कहा कि हमारे देश की तरह पूरे विव में खाा की माग बढ रही ह। यह थिति हमें आगाह करती ह कि हमें कषि उपादकता बढाने पर गहराइ से यान देना होगा, जिससे कि खाााें की उपलधता सुनिचित की जा सके, विशेषकर उन कषि उपादों, जिनकी आपूति कम ह, ताकि बढती हइ कीमतों से बचा जा सके। उहोंने कहा कि इस महवपूण उेय को पूरा करने के लिए, ‘म दूसरी हरित काति की दिशा में तुरत कदम उठाने पर जोर देना चाहगी।

इसके लिए नइ तकनीकों, बेहतर बीजों, उत कषि तरीकों, भावी जल बधन तकनीकों आर अधिक मजबूत ढाचों की आवयकता ह, जो किसानों को वज्ञानिक समुदाय, ऋण देने वाली सथाआें तथा बाजार से जोडें। राटपति ने भारत के विशाल भूभाग आर जनसया के अनुपात में देश के माजूदा बुनियादी ढाचा को अपयात बताया। उहोंने कहा कि एक ऐसा देश जोभागोलिक प से सातवा तथा जनसया की टि से दूसरा सबसे बडा देश ह, उसके लिए हमारा माजूदा बुनियादी ढाचा अपयात ह। इससे सपक बाधित आर अव होता ह। हमें इस थिति को बदलना होगा। पुलों, सडकों, बदरगाहों तथा हमारी बिजली उपादन क्षमता, परिवहन सुविधाआें आदि को यापक तर पर बढाना होगा। देश में नइ सुरक्षा नीति बनाने की चचा के बीच राटपति ने कहा कि सरकार आतरिक सुरक्षा की चुनातियों से निपटने के लिए अयधिक चाकसी बरतने आर उपयुत कदम उठाने के लिए तिब ह।

विकास के लिए सुरक्षापूण माहाल को जरी बताते हए उहोंने कहा कि हमारा देश दो दशक से यादा से आतकवाद का निशाना रहा ह। सरकार ने आतकवाद से पदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए आवयक सुरक्षा उपाय किए ह आर करती रहेगी। वह इस सकट का मुकाबला करने के लिए अतराटीय समुदाय के साथ भी काय करेगी।

देश में विभि योजनाआें के लिए आवटित विशाल धनराशि के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं आने पर खिता जताते हए पाटिल ने कहा कि इसके पीछे सबसे बडी बाधा आर समया कमजोर कायावयन आर यवथा में भटाचार का होना ह। उहोंने इस बात पर जोर दिया कि शिथिल कायावयन की इस पुरानी बीमारी के कारणों का उपचार करना होगा। परियोजनाआें, कायकमों आर योजनाआें के कायावयन की कमियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। सकारामक बदलाव के लिए ऐसा करना जरी ह। सग सरकार के समावेशी विकास के लय के बारे में उहोंने कहा कि इसके लिए सामाजिक याय जरी ह। इसे भावी सामाजिक क्षे के बुनियाद ढाचे के जरिए दान किया जा सकता ह। सामाजिक सेवाआें आर रोजगार के अवसरों के साथसाथ सभी नागरिकों को उाम शिक्षा आर बेहतर सेवाए उपलध करवानी होंगी।

धमनिरपेक्षता के साित पर हमेशा अडिग रहने के सदभ में उहोंने कहा कि हमारे सविधान में धमनिरपेक्षता का जो माग चुना गया ह, हमारे राटीय जीवन में इसके थान को कभी नहीं बदला जा सकता ह। हमें सामाजिक समरसता को बनाए रखना ह। हमारी मिलजुल कर रहने की परपरा जारी रहनी चाहिए, ताकि यह हमारी भावी पीढियों के जीवन वाह का एक अभि हिसा बन सके।

इकीसवीं शतादी के पहले दशक के दारान भारत में आमूल परिवतन आने का जिक करते हए राटपति ने कहा कि न सिफ भारत में बडे बदलाव आए ह, बकि यह खुद भी विव में बदलाव लाने वाली शति के प में उभरा ह। राट एक निणायक मोड पर पहच गया ह। यहा से हम ыढ विवास आर निठा के साथ मिलकर काम करेंगे, तो एक विकसित आर गतिशील राट के अपेक्षित उजवल भविय का दावा कर सकते ह।

साथ ही उहोंने सचेत किया, ‘अपनी कमियों को दूर करने आर अपने गुणों को एक ऊजावान शति में बदलने के दारान हमें पूरी तरह जागक होना चाहिए कि हमें या सहेजकर रखना ह आर या बदलना ह। उहोंने कहा कि सबसे पहले हमें अपने लोकताकि मूयों आर धमनिरपेक्षता के साितों को सजो कर रखना होगा। राटपति ने कहा कि हमें अलगअलग विचारों का समान करना होगा आर मतभेदों पर सकारामक आर मीपूण ढग से यान देना होगा। ये एक ऐसे समाज की नींव ह, जो एक समग इकाइ के निमाण के लिए विभि भाषाआें, धमों आर सकतियों को अपना लेता ह। हमारे जसे विशाल आर विविधतापूण राट को इन मूयों का निरतर पालन करना चाहिए।

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