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गिरीश संघी ने कांग्रेसजनों को दिया ‘जीत का मंत्र’

Swatantra Vaartha  Sun, 7 Feb 2010, IST

गिरीश संघी ने कांग्रेसजनों को दिया ‘जीत का मंत्र’

पटना। कांग्रेस सांसद व बिहार के संगठन चुनाव प्रभारी डॉ गिरीश संघी ने आज पार्टीजनों को ‘जीत का मंत्र’ दिया। उन्होंने पार्टीजनों का आह्वान करते हुए कहा ‘ध्यान रहे, गोल टीम करती है। यह दोचार लोगों के वश की बात नहीं। हम मैच (विधानसभा चुनाव) के फाइनल में पहुंच चुके हैं। हमसे ही सबका मुकाबला है।

यह स्थिति हमारी ही तग़डी मशक्कत का परिणाम है, लेकिन जीत की गारंटी टीम वर्क और मेहनत की अपेक्षा रखती है। टीम भावना के साथ काम हो। हमारी टीम का एक भी सदस्य ग़डब़डाया, तो सामने दिख रही सुनिश्चित जीत भी संदेह के दायरे में आ जायेगी। क्या हम अपने दरवाजे पर आयी जीत को अपने ही कारणों से दुत्कारना चाहेंगे?’ वे कांग्रेस मुख्यालय (सदाकत आश्रम) में समन्वय समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

डॉ संघी ने आज दरअसल मूल वजहों पर सीधी चोट की, जो बिहार में कांग्रेस की दुर्दशा के खास कारण माने जाते रहे हैं। वे वस्तुत: राज्य के दिग्गज कांग्रेसियों से इसके बारे में जानना चाहते थे, ताकि जिम्मेदारों को पश्चाताप के भाव में लाकर कांग्रेस को अंदरूनी खींचातान एवं लंग़डीमारी की बदनामी से मुक्त कराया जा सके। उन्होंने कई मर्तबा पूछा भी कि आखिर दिक्कत क्या है? इस दिशा में उनकी बातें और आगे ब़ढतीं, उसके पहले ही समन्वय समिति ने अपनी ओर से उनको आपसी एकजुटता बनाये रखने का भरोसा दिया। डॉ संघी का मकसद फौरी तौर पर कामयाब रहा।

उन्होंने कहा,‘समन्वय दिल से ज़ुडी बात है। यह जुबानी नहीं हो सकती, और न ही यह भाषण का विषय है। पांचसात सदस्यों वाले परिवार में भी अक्सर तनातनी होती है। यह स्वाभाविक मानवीय प्रक्रिया है। जहां कुछ लोग होंगे, ऐसी स्थितियां बनेंगी ही। फिर हमें चाहिए कि छोटीछोटी बातों या मात्र व्यक्तिगत स्वार्थ के चक्कर में हम अपने महान उद्देश्य को नहीं भूलें।’ उन्होंने सबको पार्टी के उद्देश्य (राज्य में सत्ता में वापसी) की याद दिलायी।

उन्होंने कहा,‘समन्वय दिल से होना चाहिए। यह राज्य का चुनावी वर्ष हैं। अरसे बाद प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में जोरदार गुंजाइश बनी है। आम लोग कांग्रेस से ज़ुडने, उसके परिवर्तन अभियान का सहभागी बनने को तत्पर हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके अरमानों को पूरा करें। ऐसे में यदि हमने अपने स्तर से थ़ोडी भी चूक की, तो सब कुछ ग़डब़डा जा सकता है।’ इसी दौरान उन्होंने टीम, टीमवर्क और टीम द्वारा किये जाने वाले गोल की चर्चा की।

उन्होंने पार्टीजनों से आग्रह किया,‘पहले हम सब अपने राजनीतिक दुश्मनों से निपटें, मिलजुलकर सत्ता हासिल करें। घरेलू झग़डे के लिए तो पूरी जिंदगी प़डी है।’ उन्होंने उन संदभा] व तथ्यों की चर्चा की कि कैसे आपसी ल़डाई में बिहार में कांग्रेस की दुर्गति होती चली गयी है और कहा,‘अब जबकि पार्टी द़ौड प़डी है, हमलोग उसे अपने साथ से लगातार जोश दे रहे हैं, हमारा परम कर्तव्य बनता है कि हम अपने लक्ष्य (सत्ता) को हर हाल में हासिल करें।’

डॉ संघी ने सदस्यता अभियान के बारे में विस्तार से बताया। एक मायने में यह जारी अभियान की राज्यव्यापी रिपोर्टिंग थी। उन्होंने अपने अनुभवों का हवाला देते हुए दावा किया अगर हम सदस्यता अभियान को सही तरीके से अंजाम देने में कामयाब रहे, तो बिहार की अगली सरकार कांग्रेस की होगी।

उन्होंने प्रचार तेज करने की जरूरत बतायी और इस क्रम में अपनी रथयात्रा की चर्चा की। उन्होंने रथ यात्रा के उद्देश्य, उसके सभी पक्षों के बारे में बताया। एक मायने में वे इस रणनीति पर समन्वय समिति की राय जानना चाहते थे। समिति ने एक स्वर में इस पर अपनी सहमति दी। पार्टी के दिग्गज नेताआें ने डॉ संघी के इस प्रस्तावित अभियान की पुरजोर तारीफ की और इसकी कामयाबी में जुटने का भरोसा दिया। उम्मीद है कि रथयात्रा १६ फरवरी से प्रारंभ हो।

कांग्रेस के बिहार मामलों के प्रभारी जगदीश टाइटलर ने भी समन्वय व एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा,‘हम किसी भी स्तर पर संवादहीनता की स्थिति न बनने दें। यह ब़डा खराब है और संगठन को घुन की तरह खा जाता है।’ प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने सभी के सहयोग से काम करने का वादा करते हुए पार्टीजनों से अपील की वे ऐसा कुछ न करें, जिससे कोई उपेक्षित या आहत महसूस करे। आखिरकार समिति ने तय किया कि किसी भी स्तर पर आपसी मतभेद से पार्टी को क्षति नहीं होने दी जायेगी। बैठक ने इसे व्यक्तिगत क्षति माना तथा आपसी भेदभाव मिटाते हुए मिलजुल कर काम करने की बात तय हुई।

सदाकत आश्रम की बैठक के बाद डॉ संघी वरीय कांग्रेसी एवं विधायक रामदेव राय के यहां भोज में शरीक हुए। भोज के बहाने वस्तुत: दिग्गज कांग्रेसियों का जुटान हुआ था। डॉ संघी यहां भी एकजुटता की बदौलत कांग्रेस की सत्ता में वापसी के तानेबाने बुनते रहे। बाद में होटल में भी उनसे मिलने वालों की भ़ीड लगी रही। कांग्रेस के अलावा अन्य पार्टियों के नेता भी आये थे। कांग्रेसियों के साथ जीत की रणनीति, तो दूसरों से फीडबैक लेने की कवायद। इससे पहले पटना हवाईअड्डे पर उनका स्वागत किया गया, जहां से वे होटल गए और उसके बाद सीधे सदाकत आश्रम। उन्होंने जगदीश टाइटलर के साथ एकांत में गंभीर मंत्रणा की। श्री टाइटलर आज रात दिल्ली को रवाना हो गये। डॉ संघी रविवार को पार्टी के सदस्यता अभियान की समीक्षा करेंगे।

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