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बसंत बहार

Swatantra Vaartha  Thu, 11 Feb 2010, IST

बसंत बहार

सामग्री ः १ लीटर दूध, ५० ग्राम चावल का आटा, शक्कर स्वादानुसार, थ़ोडीसी केसर (गर्म दूध में घुली), १ केला, १ चीकू, १/२ सेब, संतरे की फांके कुछ, थ़ोडे अनार दाने, १/२ टी स्पून पिसी इलायची, सजावट के लिए गुलाब की पंखु़डयां, चांदी का वर्क।

विधि ः सर्वप्रथम सेब, केला, चीकू छीलकर काट लें। संतरे की फांके छीलकर गूदा निकाल लें। अब चावल के आटे को १/२ कप दूध में घोलकर पेस्ट बनाएं। बचे दूध को गर्म रखें। उबाल आने पर चावल का पेस्ट डालें व हिलाते हुए पकाएं। ग़ाढा हो जाए, तब स्वादानुसार शक्कर घुलने तक पकाएं। फिर आंच से उतारकर ठंडा होने दें। कांच की सुंदर कटोरियों में कतरे फल डालें। ऊपर से ठंडे केसरी दूध का मिक्स डालें। इसे गुलाब की पंखु़डयों एवं चांदी के वर्क से सजाएं। बसंत बहार तैयार है। यह व्यंजन दिखने में जितना सुंदर है, खाने में उतना ही स्वादिष्ट भी है।

कैंसर का उपचार हुआ आसान

कैंसर जैसे असाध्य माने जाने वाले रोग का हर स्टेज पर इलाज संभव हो सके, इसके लिए दुनिया भर में अनुसंधान किए जा रहे हैं। इन अनुसंधानों में वैज्ञानिकों को काफी सफलता भी हाथ लगी है। वैज्ञानिक अनुसंधानों के कारण ही कई तरह के कैंसर का ट्रीटमेंट अब काफी आसान हो गया है। हाल ही में कैंसर के इलाज के लिए हुए एक अनुसंधान में वैज्ञानिकों के हाथ एक और ब़डी सफलता लगी है। इस स्टडी में अनुसंधानकर्ताआें ने कैंसर का इलाज करने के लिए एक ऐसे नियम का पता लगाया है, जो रेडियोथेरैपी की प्रभावशीलता को ब़ढा देता है। कैंसर रिसर्च में छपी अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार कुछ खास दवाआें के इस्तेमाल से ट्‌यूमर की स्थिति में चूहों की रक्तवाहिकाआें की स्थिरता में सुधार हुआ। चूहों पर हुई इस स्टडी में ब़ढया नतीजे निकलकर सामने आए हैं। इस अनुसंधान में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्रे इंस्टीट्‌यूट फॉर रेडिएशन आेंकोलॉजी एंड बायोलॉजी के विज्ञानिकों ने भाग लिया।

दरअसल, ट्‌यूमर में अधिक स्थिर रक्त आपूर्ति कैंसर के मरीजों को कीमोथेरेपी बेहतर रूप से उपलब्ध कराती है। ग्रे इंस्टीट्‌यूट के निर्देशक प्रोफेसर गिलीस मैक्केना ने कहा, ‘कैंसर के उपचार के लिए नया तरीका खोजकर हम बेहद रोमांचित हैं। इसमें दवाएं कैंसर कोशिकाआें को रेडियोथैरेपी और कीमोथैरेपी के प्रति संवेदनशील बनाती हैं।’

मैक्केना ने कहा, ‘आप अगर सोच रहे हैं कि ट्‌यूमर कोशिकाआें को ऑक्सीजन की आपूर्ति कर आप उन्हें ब़ढाने में मदद करेंगे, तो आप गलत हैं, क्योंकि कोशिकाआें को बेहतर रक्त आपूर्ति के साथ ऑक्सीजन पहुंचाकर हम रेडियोथैरेपी और कीमोथैरेपी को काम करने में अधिक सक्षम बनाते हैं, ताकि वे ट्‌यूमर को मार सकें।’

वैज्ञानिकों ने चार दवाआें के प्रभाव का परीक्षण किया, जो कैंसर थैरेपी के लिए चिकित्सीय इस्तेमाल में लाई जा रही हैं या फिर जिसका विकास किया जा रहा है।

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