नाक के सौंदर्य की प्रतीक नथ
यदि यह कहा जाए कि स्त्री की खूबसूरती में उनकी नाक काफी हद तक भूमिका निभाती है, तो गलत बात न होगी और जो नाक इतनी महत्वपूर्ण हो, उसे आभूषणों से सजा दी जाए तो फिर कहना ही क्या ! नाक के आभूषणों में लौंग(तीली), नथ और बुलाक (दोनों नथुनों के बीच की हड्डी को छेद कर डाली जाने वाली नथ) प्रमुख होते हैं। ये आभूषण विभिन्न प्रांतों के धर्म तथा रीतिरिवाजों के अनुसार विभिन्न प्रकार के होते हैं।
फैशन में आज काफी बदलाव आया है। शहरों में आधुनिक महिलाएं अब भारी भरकम नथों से विदा ले चुकी हैं। वे हल्कीफुल्की विविध प्रकार की लौंग ही पसंद करती हैं, मगर गांवों और आदिवासी समाज में हमें नथ का परंपरागत रूप आज भी देखने को मिलता है और एक रोचक सामाजिक बदलाव की जानकारी भी देता है।
प्राचीनकाल से ही सजनेसंवरने में गहनों का महत्व रहा है। सिर से लेकर काननाक, गला, हाथ, बाजू और पांव यानी हम सर्वांगण आभूषणों से सजाते हैं। शादी, ब्याह के समय दुल्हन को सजाने में जो आभूषण सर्वाधिक महत्व रखता है तथा हर धर्म में जिसकी अपनी अलग पहचान होती है, वह होती हैनथ ! नाक में कहीं बायीं और कहीं कहीं दोनों ओर भी छेद किए जाने और उसमें कुछ पहनने का रिवाज न जाने कितना पुराना है। यह परंपरा आज तक चली आ रही है और स्त्रियों की आभूषण प्रियता को देखकर लगता है, यह आगे भी ऐसे ही लोकप्रिय रहेगी।
आवश्यक नहीं कि नथ सोने की हो। यह चांदी की भी होती है तथा आजकल कई मिश्रित धातुआें की भी बनने लगी है, जो कि शौकिया पहनी जाती है। राजामहाराजाआें के समय में रानियों या राजकुमारियों के लिए जो नथ बनती थी, वह सोने की, हीरेजवाहरात से ज़ुडी हुई तथा आकार में काफी ब़डी होती थी, जिन्हें सहारा देने के लिए बारीक चेन लगाकर, बालों में अटकाया जाता था।
यह रिवाज आज भी है कि चाहे नथ हल्की हो या भारी, उसे स्थिर रखने के लिए बारीक चेन या डोरी लगायी जाती है। हमारे गांवों में विशेषकर राजस्थान के छोटेछोटे गांवों एवं कस्बाेेेें में, शादीब्याह के अवसर पर तथा मेलेत्यौहारों के समय रंगबिरंगी पोशाकों में सजीधजी युवतियां, अपने चमचमाते आभूषणों में इठलाती बलखाती दिखायी देती हैं। आंखों के ऊपर से दो उंगलियों से घूंघट उठाकर जब नव वधुएं देखती हैं, तो नाक पर झूलती हुई नथ पर हर किसी की नजर अपनी ओर खींच लेती है।
हिंदू तथा मुस्लिम समाज में भी विवाह के अवसर पर दुल्हन को नथ (हैसियत के अनुसा) अवश्य च़ढाई जाती है।
दक्षिण भारत में तथा महाराष्ट्र में भी ब़डी सुंदर रत्नज़डत नथें देखने को मिलती हैं। राजस्थान में शादीब्याह हो या पुष्कर, नागौर या कोलायात का पशु मेला, ब़डीब़डी आंखों के नीचे झूलती डोलती नथें किसका मन नहीं मोह लेतीं।
