ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार खत्म करेंगे?

  • सही
  • गलत
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

शीत ऋतु में खानपान

swatantravarhta  Mon, 28 Dec 2009, IST

शीत ऋतु में खानपान

शीत ऋतु दतक दे चुकी ह। सदियों का मासम जहा सेहत सुधारने का मासम ह, वहीं खानपान का आनद भी इसी ऋतु में आता ह। यह ऋतु ाकतिक प से हमारे शरीर को पोषण दान करने में सहायक होती ह आर हमारे वाय की रक्षा भी करती ह।

इस ऋतु में वातावरण में या सर्दी के कोप एव शीत वायु के पश से हमारे शरीर की ऊमा अदर ही क जाती ह। इसी ऊमा की उणता से हमारे पाचन त की श बढती ह, जठरा तीव होती ह, जिससे पाचन त मजबूत होकर शरीर को वथ बनाता ।

इन दिनों में गरि व अिधक भोजन भी आसानी से पच जाता ह। शीत ऋतु में भूख भी बढ जाती ह। इसीलिए शीत ऋतु में पाकि आहार का अवय सेवन करना चाहिए, साथ ही हकेफुके यायाम एव कामकाज करना भी आवयक ।

हमें अपने आहार में ऐसे पदाथा] को शामिल करना चाहिए, जो वसायु हों, मीठे हों आर अल रस वाले व पाकि हों, साथ ही शरीर को वथ रखने वाले हों। मूग, मोठ, चना, मसूर, उडद, मका, बाजरा, गेह आदि पाकि खा पदाथ ।

साथ ही घी, दूध, रबडी, मेवा , खीर, मलाइ आदि अनेक पाकि खा पदाथ एव माि जसेगाजर का हलवा, उडद का हलवा, मूग का हलवा, जलेबी, कलाकद, मूग उडद की दाल के लडडू खसखस का हलवा, मेवा, तिल के लू एव गुड से बने खा पदाथ, जसे गजक, गुड पी आदि इस मासम के अनुुकूल यजनों में से ह। शीत ऋतु में पिंड खजूर खाना अयत लाभदायक एव वायवթक होता ह। मूगफली, खजूर, पपीता, सेब, अनार, केला, चीकू भी लाभदायक फल ह। शीत ऋतु में लहसुन एव मेथीदाने का सेवन करना सेहत की से बहत फायदेमद ह। लहसुन की चटनी, अचार, लहसुन को का खाना या सजी में खाना अति उाम ह। मेथीदाने की सजी खाना या मेथी का साग, पालक का साग, बथुआ आर सरसो का साग फायदेमद सजिया ह। मेथी की पूडी पराठे, मूली व आलू के पराठे, मटर पनीर, सरसों का सागमे की रोटी आदि वादि एव वायवթक यजन इस ऋतु में अयत लाभदायक ह। आवला, गाजर, टमाटर का रस बहत गुणकारी ह। इसके साथ ही सदियों में रोज एक अमद, एक सेब का सेवन जर करना चाहिए।तिदिन एक गिलास गाजर का रस पीने से साल भर तक आखों में तेज व चमक बरकरार रहती ह। रा में भोजन के ढाइ तीन घटे के बाद एक गिलास दूध पिए। शीत ऋतु मे ाय सर्दीजुकाम, खासी, दमा, बोंकाइटिस, लू एव कफजय बीमारिया जोर पकडती ह, इसलिए खानपान का विशेष यान रखना चाहिए। अपनी कति को जानकर ही आहार करना चाहिए अयथा यह बहत सी बीमारियों को जम देता ह।

ाय देखने में आता ह कि अज्ञानता वश लोग गलत खानपान करते ह आर बीमार पड जाते ह। सर्दी में विशेषकर सुबह एव शाम को ठडी एव ठडी तासीर वाली वतुए नहीं खानी चाहिए। खाली पेट कोइ भी ठडा पदाथ न खाए।

ठडा गम साथसाथ न खाए। अधिक गम खानेपीने के बाद ठडा पानी न पिए । यदि सर्दीखासी का कोप हो, तब चवाल, दूध एव दूध की बनी ठडी चीजें, दही , मेवे की मिठाइ, तले हुए पदाथ, जसे पूडी, पराठे, समोसे, कचारी, भजिए, चाट, मगोडे, मदे से बनी चीजें, जसे बेड, सडविच, पेटीज, खता, मठरी आदि न खाए।

सजियों में खासी होने पर नींबू आर टमाटर न खाए। ठडे पेय जसेकोड डिंस, फिज की ठडी वतुए , आइकीम आदि का सेवन बिकुल नही करना चाहिए। इस कार खानपान को मासम की कति के अनुप रखकर अय मासमों की तरह शीत ऋतु के तिकूल पभावों से बचते हए उसकी अनुकूलता का आनद उठाया जा सकता ह।

आपकी राय