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बच्चे को कैसे बचाएं न्यूमोनिया से

Swatantra Vaartha  Fri, 30 Jul 2010, IST

बच्चे को कैसे बचाएं न्यूमोनिया से

हर मातापिता की यह इच्छा होती है कि उनका बच्चा स्वस्थ और प्रसन्न रहे, फिर भी कुछ आम स्वास्थ्य समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनका सामना ज्यादातर बच्चों को करना पडता है। न्यूमोनिया ऐसी ही स्वास्थ्य समस्या है, जिसका सामना ज्यादातर बच्चों को करना प़डता है।

दरअसल न्यूमोनिया श्वसनतंत्र से संबंधित संक्रमण का गंभीर रूप है, जो नाक से लेकर मिडिल इयर और फेफ़डे तक कहीं भी हो सकता है। यह फेफ़डे को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। जिस बच्चे को न्यूमोनिया होता है, उसके एक या दोनों फेफ़डों में पस और तरल पदार्थ भर जाते हैं, जो फेफ़डे के ऑक्सीजन ग्रहण करने में रुकावट पैदा करते हैं। इससे बच्चे को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। फेफ़डे हजारों श्वसन नलियों के समूह से मिलकर बने होते हैं और ये श्वास नलियां भी कई छोटी इकाइयों से मिलकर बनी होती हैं। यह संक्रमण प्रायः बैक्टीरिया, वायरस, फंगल इंफेक्शन की वजह से होता है पर सबसे ज्यादा वायरस की वजह से न्यूमोनिया की समस्या होती है। कई बार जन्म के समय भी शिशु को न्यूमोनिया के इन्फेक्शन का खतरा रहता है। वायरस से होने वाली न्यूमोनिया में बच्चों को तेज बुखार, घरघराहट के साथ तेज गति से सांस चलने, खांसी, बुखार, सिरदर्द, ठंड लगने व भोजन में अरुचि की समस्या होती है। पांच वर्ष से कम उम्र के ज्यादातर बच्चों को अगर यह बीमारी हो तो उन्हें सांस लेने में बहुत कठिनाई महसूस होती है, इस वजह से शिशु सुस्त हो जाता है और उसे दूध पीने में भी कठिनाई होती है।

क्या होते हैं लक्षण

* बुखार, ठंडक महसूस होना, कंपकपाहट और खांसी ।

* श्वास की गति का तेज होना और घरघराहट सुनाई देना।

* उलटी, सीने या पेट के निचले हिस्से में दर्द।

* शिशु को दूध पीने में कठिनाई और बडे बच्चों में भूख न लगने की समस्या।

* कभीकभी स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर बच्चे के होंठों और नाखूनों का रंग नीला पड जाता है।

* कुछ स्थितियों में बच्चों को केवल सांस लेने में समस्या हो सकती है।

* कभीकभी जब बच्चे के फेफ़डे के निचले हिस्से में इन्फेक्शन होता है, तो उसे सांस लेने में कोई कठिनाई नहीं होती, लेकिन उसे बुखार, पेट के निचले हिस्से में दर्द, उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

* जब बैक्टीरिया की वजह से न्यूमोनिया की समस्या होती है, तो बच्चा अक्सर बीमार रहता है और उसे बुखार और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं होती हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

* बच्चे को न्यूमोनिया के संक्रमण से बचाने के लिए आजकल बाजार में वैक्सीन भी उपलब्ध हैंं, जिन्हें लगवाने से बच्चा इस बीमारी से बचा रहता है।

* अगर आपके बच्चे को ऐसी समस्या हो, तो आप प्रतिदिन सुबह और शाम उसके शरीर के तापमान की जांच करें।

* प्रीमेच्योर पैदा होने वाले बच्चों को न्यूमोनिया होने का खतरा ज्यादा रहता है, अतः जन्म के बाद ऐसे बच्चों का विस्तृत चेकअप जरूर करवाना चाहिए, ताकि सही समय पर बच्चे का इलाज करवाया जा सके। जिन बच्चों को टीबी का इन्फेक्शन होता है, उन्हें भी न्यूमोनिया होने की आशंका अधिक होती है।

* अगर घर में किसी को यह इन्फेक्शन हो, उससे बच्चे को दूर रखें और इस बात का ध्यान रखें कि किसी दूसरे संक्रमित व्यक्ति के पानी के गिलास से बच्चा पानी न पिए और उस व्यक्ति के रुमाल और तौलिये को भी बच्चे से दूर रखें।

* अगर आपके बच्चे को छाती में दर्द की शिकायत रहती है, तो आप सूती कप़डे पर प्रेस चलाकर हलके गरम कप़डे से बच्चे की छाती की सिंकाई करें।

* बच्चे होंठों और नाखूनों की रंगत की जांच करती रहें। अगर उनकी रंगत नीली या स्लेटी होती है, तो इसका अर्थ यह है कि फेफ़डे को सांस लेने भर पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है।

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