स्वस्थ रहने के सूत्र
दिनचर्या में थ़ोडासा व आसान परिवर्तन आपको स्वस्थ व दीर्घायु बना सकता है। बशर्ते आप कुछ चीजों को जीवनभर के लिए अपना लें और कुछ त्याज्य चीजों को हमेशा के लिए दूर कर दें। इसके लिए अपनाइए सरलसा २० सूत्री जीवन।
* प्रतिदिन प्रातः सूर्योदय पूर्व (५ बजे)उठकर दो या तीन किमी घूमने जाएं। सूर्य आराधना से दिन का आरंभ करें। इससे एक शक्ति जागृत होगी, जो दिलदिमाग को ताजगी देगी।
* शरीर को हमेशा सीधा रखें, यानी बैठे तो तनकर, चलें तो तनकर, ख़डे रहें तो तनकर अर्थात शरीर हमेशा चुस्त रखें।
* भोजन से ही स्वास्थ्य बनाने का प्रयास करें। इसका सबसे सही तरीका है, भोजन हमेशा खूब चबाचबाकर आनंदपूर्वक करें, ताकि पाचन क्रिया ठीक रहे, इससे कोई भी समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी।
* मोटापा आने का मुख्य कारण तैलीय व मीठे पदार्थ होते हैं । इससे चर्बी ब़ढती है, शरीर में आलस्य एवं सुस्ती आती है। इन पदाथा] का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।
* गरिष्ठभारी भोजन या हजम न होने वाले भोजन का त्याग करें। यदि ऐसा करना भी प़डे तो एक समय उपवास कर उसका संतुलन बनाएं।
* वाहन के प्रति मोह कम कर उसका प्रयोग कम करने की आदत डालें। जहां तक हो कम दूरी के लिए पैदल जाएं। इससे मांसपेशियों का व्यायाम होगा, जिससे आप निरोगी रहकर आकर्षक बने रहेंगे, साथ ही पर्यावरण की रक्षा में भी सहायक होंगे।
* भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में फलसब्जियों का प्रयोग करें। उनसे आवश्यक तैलीय तत्व प्राप्त करें, शरीर के लिए आवश्यक तेल की पूर्ति प्राकृतिक रूप से पदाथा] से ही प्राप्त करें।
* दिमाग में सुस्ती नहीं आने दें, कार्य को तत्परता से करने की चाहत रखें।
* घर के काया] को स्वयं करें, यह कार्य अनेक व्यायाम का फल देते हैं।
* व्यस्तता एक वरदान है, यह दीर्घायु होने की मुफ्त दवा है, स्वयं को व्यस्त रखें।
* कप़डे अपने व्यक्तित्व के अनुरूप पहनें। थ़ोडे चुस्त कप़डे पहनें, इससे फुर्ती बनी रहेगी।
* जीवन चलने का नाम है, गतिशीलता ही जीवन है, यह सदा ही याद रखें।
* अपने जीवन में लक्ष्य, उद्देश्य और कार्य के प्रति समर्पण का भाव रखें।
* शरीर की सुंदरता उसकी सफाई में है। इसका विशेष ध्यान रखें।
* सुबह एवं रात में मंजन अवश्य करें। साथ ही सोने से पूर्व स्नान कर कप़डे बदलकर पहनें। आप ताजगी महसूस करेंगे।
