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प्थक तेलगाना के मराठी मानस का वाभािवक झुकाव

Swatantra Vaartha  Thu, 28 Jan 2010, IST

प्थक तेलगाना के मराठी मानस का वाभािवक झुकाव

मराठी समाज का तेलगाना के ति झुकाव रहना यह एक वाभाविक िकया है । इसे ऐतिहासिक पभूमि भी ा ह। यह कहानी इस १७२४ से शु होती ह। आसिफजही घराना यहा उदित हआ। मुगल सामाय समा होने के कगार पर था। मराठा सामाय गतिमान हआ था आर महारा, कनाटक आर तेलगाना क्षे के कुछ हिसे निजाम शासित राय में आ गए। यहा से उनकी दुभाय की कहानी शु होती ह। तेलुगु, कދड आर मराठी भाषिक समुदाय भेदभाव के शिकार होते रहे।

निजाम ने १७९८ में बिटिशों के महासाा का पभुव वीकार किया। थानीय जनता को कोइ सहारा न रहा आर यही कारण ह कि तीनों समुदायों में घनिता बढी। थानीय नेतव एक दूसरों को मदद करते थे, उनकी सथाए सवारते थे। राजा पालाल पाीि, राजा धनराज गिरजी आर माडिपाटी हनुमतराव विवेक वधिनी सथा के पदाधिकारी रहे ह। इस निजाम शासित देश में आध महासभा, कनाटक परिषद आर महारा परिषद राजकीय आर सामाजिक क्षे में कायरत थे। इन सथाआें के काय में तालमेल था आर इन सथाआें का विलीनीकरण कागेस में बाद में हआ।

राजकीय क्षे में तीन महान शयाि कायरत थी, आय समाज ने हिंदुआें के अतिव की लडाइ छेडी। पडित केशवराव जी कोरटकर, इनके सुपु ब विनायकरावजी वािलकार, शेषराव वाघमारे आदि नेतागण आय समाज से सल थे। कागेस के सर्वेसवा वामी रामानद तीथ, मराठी कދड भाषिक थे। धमवीर वामन नाइक का काम शिक्षा आर सामाजिक क्षे में सराहनीय रहा ह। आपके सुुपु ब श्रीधर नाइकजी ने यह परपरा चलाइ। यह सभी माडपाटी हनुमतराव के ेरणा ाेत रहे ह। हिंदू महासभा मराठी भाषिकों का गढ रहा ह।

कागेस पार्टी की थापना की पहली सभा काशीनाथराव जी व के मकान पर २९६१९३८ को हइ। इसकी घोषणा करने की तारीख ९९१९३८ तय की गइ थी। पर सात सितबर को ही इस पर पाबदी डाल दी गयी। निजाम शासन में कागेस जम लेेने के पहले ही पाबदी की शिकार बनी। इसके विरोध में पहला सयागह गोविंदराजवी नानल ने किया। भाषावार ात रचना में मराठी समुदाय का महवपूण योगदान रहा ह। एक माच १९४० में निजामाबाद में हए अधिवेशन में हदराबाद राय के विघटन की माग की गयी। इसके तुतकता थे वामी रामानद तीथ आर दिगबर राव बिंदूजी। वातय काल पूव यह सिफ कपना ही रह गयी।

भारत को भुसाा ा होने के बाद १९४८ में भाषावार ात रचना के हेतु एसके धार कमेटी की थापना हइ। यह कमेटी भाषावार ात रचना के अनुकूल नहीं थी। बाद में पडित नेहजी की अयक्षता में फरवरी १९४९ में दूसरी कमेटी थापित हइ। हदराबाद राय के विभाजन का आपने विरोध किया। हदराबाद में मराठी समाज का कितना भाव था यह हदराबाद के थम मुयमी बी रामकिशन राव के ममिडल पर क्षेिप डालने से होता ह। ममिडल के मराठी सदय इस पकार थे सवश्री दिगबर राव बिदू, विनायकराव वािलकार, गोपालराव एकबोटे, देवीसिंह चाहान, फुलचद गाधी, श्रीनिवासराव एरखेलीकर, भगवानराव गाढे, हदराबाद राय के पहले सभापति काशीनाथ राव व थे। शकर राव चाण आर पीवी नरसिंहराव कागेस के कायवाहक थे।

हदराबाद के नानलनगर में कागेस का पहला अधिवेशन १७११९५३ को हआ। वामी रामानद तीथ ने अपने वागत भाषण में भाषावार ात रचना का पुरकार दिया। इससे वामीजी को प नेह का रोष झेलना पडा। हदराबाद का विघटन आर भाषा के आधार पर राय की रचना यही ाथमिक उेय उस समय था, पर इसी व अय घटनाकम ने जम लिया आर वह था मूकी, गर मूकी आदोलन। अय राय के अगेजी शिक्षितों को बडे पमाने पर नाकरिया मिलने लगी। इसके विरोध में यह आदोलन शु हआ। अलग तेलगाना के विचारधारा की नींव १९५२ के इस आदोलन में रखी गयी। इसमें जीरामाचारी, अबुल हसन सयद आर सामने न आते हए भी छ प से अदनी मदद कर रहे थे डा एमचा रेडडी। आध देश का जम व पाेी श्रीरामुलु के बलिदान के उपरात हआ आर तेलगाना सहित आ १९५६ मे थापित हआ। उसी समय तेलगाना मे आध के वचव की बात कट होने लगी आर १९६९ में इस भावना ने उग प धारण किया, पर तेलगाना के ति विवासघात हआ। इस आदोलन को यश ा करने के लिए चालीस वष का इतजार करना पडा।

आध देश की थापना होने के बाद मराठी समाज का थान नगूय ही रहा ह। मुलिम समाज के उथान के लिए भरसक पयास किया जा रहा ह, पर मराठी भाषिक की समयाआें को नजरअदाज किया जा रहा ह। मराठी पाठशालाए शिक्षकों के अभाव से बद होने लगी ह। मराठी सथाआें को हासिंग बोड माफत मिली हइ जमीन छिनने के यास होने लगे ह। महारा ने जो भुगता वह तेलगाना को न भुगतना पडे, ऐसी हमारी इछा ह। मुबइ को कें शासित देश बनाने का यास हआ। ऐसा यन हदराबाद के बारे में भी हो सकता ह। हदराबाद सहित तेलगाना बनना, यह सभी के हित में होगा। हमारी शुभकामनाए तेलगाना के साथ ह आर आध देश का विघटन ेम आर साहाद के साथ हो ? कोइ अयि घटना का सामना दोनों को भी करना न पडे।

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